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COVID19

आस्था, राजनीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य: कोविड-19

                                             ( राम पुनियानी ) कोविड-19 की दूसरी और कहीं अधिक खतरनाक लहर पूरे देश में छा चुकी है. जहाँ मरीज़ और उनके परिजन बिस्तरों, ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं वहीं कोविड योद्धा इस कठिन

कोविड -19 महामारी के संदर्भ में भारत के मुसलमानों से अपील !

(Jaipur,5 April 2020) कोविड -19 का वैश्विक प्रकोप देश और मानवता के लिए एक बड़ी चुनौती है। हम इसे नियंत्रण में रखने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।कुछ दिनो से समाज में एक संदेश जा रहा है कि भारत में कुछ मुसलमान सामाजिक दूरी और महामारी के

जब राजनेता अपनी सीमाएँ बन्द कर रहे हैं , वैज्ञानिक अपनी सीमाएँ खोल रहे हैं !

(स्कन्द शुक्ला) राजनीतिक समता और वैज्ञानिक समता में बहुत अन्तर है। यह सच है कि राजनीति में समता के संस्कार विज्ञान में हुई प्रगति का परिणाम हैं : सोलहवीं-सत्रहवीं अठारहवीं सदी में यदि एक-के-बाद-एक वैज्ञानिक खोजें न हुई होतीं , तब न

तकलीफों से गुजर कर राजस्थान पहुंच रहे हैं प्रवासी, सरकार करें प्रवासियों को राजस्थान लाने के…

(लखन सालवी)प्रवासी राजस्थानी गुजरात के विभिन्न शहरों से विभिन्न माध्यमों से लौट रहे हैं इसके लिए भारी रकम की अदायगी करनी पड़ रही है और राजस्थान में उनकी कोरोना वायरस संक्रमण की स्क्रीनिंग की जा रही है, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं कि वे

क्या लोग घर बैठे कोविड-19 के लिए कोई जाँच कर सकते हैं ?

(स्कन्द शुक्ला) जो भी इन-दिनों कोविड-19 -सम्बन्धी जानकारियों पर ध्यान रखे हुए हैं , वे जानते हैं कि डॉक्टर इस संक्रमण की डायग्नोसिस के लिए मुख्यत: जिस तरीक़े का प्रयोग कर रहे हैं , वह आरटी-पीसीआर है। रोगी या रोगाशंका वाले व्यक्ति के नाक या

80 करोड़ गरीबों को 3 महीने तक 10 किलो मुफ्त अनाज !

(दिल्ली,26 मार्च 2020) वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन से प्रत्‍यक्ष रूप से प्रभावित गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के साथ-साथ गांवों में रहने वालों के लिए 1.7 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की। प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न

अमीरी के कुत्ते भी चर्बीले है ,मजदूर के चेहरे जर्द पीले है ..!

(नारायण बारेठ)उनके हाथ भारत में निर्माण करते है ,कोई बांध ,कोई बिजलीघर ,हॉस्पिटल और राजमार्ग उन हाथो के बनावट की गाथा सुनाते है .फिर वो लम्हा आया जब उन हाथो ने याचना की ,गुजरात में मेहनत मशक्क्त कर पेट पालते हजारो मजदूरों को बेसहारा छोड़

कोरोना वायरस : दलित समाज के लिए घातक हो सकता है

(डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल 'मेघ' ) मैं बहुत चिंता में हूँ। जबसे कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की जानकारी भारत में आने लगी है। और इस वैश्विक महामारी के खतरे और प्रसार से बचने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। इनमें मंदिर, मस्जिद, चर्च,

कोरोना से बचने के लिए एक अपील !

(भंवर मेघवंशी ) साथियों, अपने अपने घर ही ठहरो,मत आओ मिलने,मत बुलाओ कुछ दिन किसी को,मुझसे भी मत मिलिये। हम लोग 6 मार्च से अपना जयपुर ऑफिस बन्द करके गांव लौट आये हैं,अब सारा काम घर से ही कर रहे हैं। कहीं भी आना जाना, मिलना जुलना

कोरोना वायरस के बाद की दुनिया : युवाल नोआ हरारी

(युवाल नोआ हरारी)मानवता इस समय एक वैश्विक संकट से जूझ रहा है। शायद हमारी पीढ़ी का यह सबसे बड़ा संकट है। अगले कुछ सप्ताहों में आम लोग और सरकारें जिस तरह की निर्णय लेंगी वह शायद यह तय करेगा कि आनेवाले वर्षों में दुनिया की तक़दीर कैसी होगी।