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महात्मा गाँधी

घनी रात में भी उजाला करने वाली एक चिंगारी हैं गांधी – तुषार गांधी

( हिंदू कॉलेज में ‘गांधी : एक असंभव संभावना’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान ) ( नई दिल्ली ) ‘आज के दौर में गांधी असंभव लगे यह आश्चर्य की बात नहीं है.आज ऐसी विपरीत परिस्थितियां हैं,जिससे यह प्रश्न उठना स्वाभाविक हो जाता है कि क्या सच में गांधी

गाँधी जयंती: क्यों आया ट्विटर पर गोडसे जिंदाबाद का तूफ़ान ?

( राम पुनियानी ) गत 2 अक्टूबर (गाँधी जयंती, 2021) को ट्विटर पर ‘नाथूराम गोडसे अमर रहे’ और ‘नाथूराम गोडसे जिंदाबाद’ की ट्वीटस का अंबार लग गया. ये नारे उस दिन भारत में ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे थे. यह देखकर कई लोगों को बहुत धक्का लगा. जो

गाँधी और गोडसे: विरोधाभासी राष्ट्रवाद

( राम पुनियानी ) इस वर्ष गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2020) पर ट्विटर पर ‘नाथूराम गोडसे जिन्दाबाद’ के संदेशों का सैलाब सा आ गया और इसने इसी प्लेटफार्म पर गांधीजी को दी गई श्रद्धांजलियों को पीछे छोड़ दिया. इस वर्ष गोडसे पर एक लाख से ज्यादा

महात्मा गाँधी, नस्ल और जाति

-राम पुनियानी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दुनिया के सबसे बड़े जनांदोलन का नेतृत्व किया था. यह जनांदोलन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध था. गांधीजी के जनांदोलन ने हमें अन्यायी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए दो महत्वपूर्ण औज़ार दिए

भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू की शहादत पर डॉ अम्बेडकर के विचार

( यह आलेख डॉ अम्बेडकर द्वारा सम्पादित पाक्षिक अख़बार 'जनता' के 13 अप्रैल 1931 के अंक में छपा था ) भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू इन तीनों को अन्ततः फांसी पर लटका दिया गया। इन तीनों पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने सान्डर्स नामक अंग्रेजी

भारत छोड़ो आंदोलन की भावना कैसे हो पुनर्जीवित?

सन 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन, जिसकी 75वीं वर्षगांठ हम इस वर्ष मना रहे हैं, भारत के स्वाधीनता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था. सन 1942 के 8अगस्त को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यसमिति ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान (जिसे अब…