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डॉ अम्बेडकर

डीएनटी महासभा ऑफ़ इंडिया ने राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया

 ("भारत रत्न डॉ बी आर अम्बेडकर की परिकल्पना का भारत “ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन )जयपुर : डीएनटी महासभा ऑफ़ इंडिया द्वारा डॉ बी आर अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल केसावत “मेवाड “ की

बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण दिवस ऑनलाइन विचार संगोष्ठी का आयोजन

साहित्य चेतना मंच के तत्वावधान में बाबा ‌साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस की स्मृति में (गूगल मीट) पर ऑनलाइन विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय : 21 वीं सदी और बाबा साहब। इस वर्चुअल कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली

समाज का ऋण चुकाने में निवेश

( पे बैक टू सोसायटी के एक असफल तथा दो सफल प्रयोगों पर डॉ. सिरीषा पटिबंदला और डॉ.जस सिमरन कहल का विचारोत्तेजक आलेख  ) गुरप्रीत (बदला हुआ नाम), पंजाब के एक ग़रीब परिवार की दलित लड़की, बारहवीं कक्षा के इम्तिहान में 99 फ़ीसद से भी ज़्यादा

डॉ.अंबेडकर ने 14 अक्टूबर को ही बौद्ध धम्म की दीक्षा क्यों ग्रहण की ?

( बी एल बौद्ध ) आज 14 अक्टूबर का दिन है. कुछ लोग आज धम्म क्रांति दिवस मना रहे हैं, तो कुछ लोग बौद्ध महोत्सव मना रहे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि आज ही के दिन बाबा साहेब अंबेडकर ने नागपुर में 10 लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की

भीम आर्मी ने मंदिर को किया पाठशाला में तब्दील !

( सुरेश चंद्र मेघवंशी )कोरोना काल में जहां एक ओर बच्चो की पढ़ाई बाधित हो रही है , जिसके कारण बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं, वहीं भीम आर्मी शंभूगढ़ ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अनूठी पहल करते हुये मंदिर को ही पाठशाला में तब्दील

डॉ. आंबेडकर : पुलिस, जासूस, और अखबारों की नजर से

( अनिरुद्ध कुमार )मानव सभ्यता के प्रारम्भ से ही सरकारी आदेशों, परिपत्रों, पुलिस और जासूसी संस्थाओं की रिर्पोटों की इतिहास लेखन में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। इतिहास लेखन या उनके पुनर्लेखन में इन हजारों वर्षों से ये स्रोत ऐतिहासिक

आंबेडकर और लोहिया के साथ की संभावना !

(गोपेश्वर सिंह)दलितों के लिए मानवोचित सम्मान तथा राजनीतिक अधिकार हासिल करना आम्बेडकर की पहली प्राथमिकता थी. वे यह भी जानते थे कि बिना आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुए न तो दलितों की मुक्ति की कल्पना की सकती है और न आधुनिक भारत की नीव रखी जा सकती

रमाबाई को डाॅ. आंबेडकर का दिल छू लेने वाला ऐतिहासिक पत्र !

(डॉ. अम्बेडकर द्वारा अपनी पत्नी रमा बाई के लिए लंदन से लिखा गया पत्र ) लंदन, 30 दिसंबर 1930रामू ! तू कैसी है, यशवंत कैसा है, क्या वह मुझे याद करता है? उसका बहुत ध्यान रखना रमा. हमारे चार बच्चे हमें छोड़ गए. अब यशवंत ही तेरे मातृत्व का

संविधान की उद्देशिका वितरित की और स्कूली बच्चों को संविधान के महत्व से अवगत कराया !

(जयपुर 5 दिसम्बर 2019) 26 नवम्बर (संविधान दिवस) से 10 दिसम्बर ( अंर्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ) तक, संवैधानिक मूल्य जाग्रति पखवाड़ा आयोजन

डॉ.अंबेडकर को समझने के लिए एक जरुरी पुस्तक

( इन्द्रेश मैखुरी )पीछे मुड़ कर देखना एक जरूरी काम है. लेकिन राजनीति में पीछे मुड़ के देखने के दो नजरिए हैं. प्रतिगामी विचार के वाहक अतीत में ही जीते हैं और तमाम आधुनिक संसाधनों का लाभ उठाते हुए,वैचारिक स्तर पर समाज को पीछे ही ले जाना
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