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नज़रिया

क्या कबीर, गोरख और नानक यही चाहते थे ?

 ( संजय श्रमण ) कबीर क्या अब भी गरीबों दलितों आदिवासियों के लिए क्रान्ति की मशाल बने हुए हैं? यह सवाल बहुत जटिल और खतरनाक है. इसका उत्तर खोजने की बड़ी इच्छा होती है. कबीर को मानने और जानने वालों से गहराई से चर्चा कीजिये तो पता चलता है

कोई सूरत नज़र नहीं आती, फिर भी कलम चल रही है !

( डॉक्टर दुर्गा प्रसाद अग्रवाल )लिखने पढ़ने का शौक रखने वालों के लिए किताबें जीवन का पर्याय होती हैं. वे इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहते कि उन्हें लगातार उम्दा किताबें मिलती रहें. किताबों का मिलना उनके छपने पर निर्भर है और छपना उनके लिखे जाने

एस सी / एस टी एक्ट का सही क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पा रहा है ?

 ( रक्षित परमार )आइए जानते हैं कि आखिर क्या ऐसी दुविधाएं हैं कि अनुसूचित जाति -जनजाति कानून इसके मूर्त रूप में नहीं आ पा रहा है  ? इसके पीछे बहुत से ऐसे कारण हैं जिनको जानना ज़रूरी हैं , सबसे पहला कारण शुरू होता हैं , स्थानीय पुलिस

रचना होगा अपना साहित्य, लिखना होगा अपना इतिहास !

( नवल किशोर कुमार )इतिहास सचमुच में बेहद दिलचस्प विषय है। यह एक विज्ञान की तरह है। इसमें भी न्यूटन के गति के नियमों की तरह सिद्धांत हैं। कोई भी क्रिया तबतक नहीं होती जबतक की न जाय। भारत का इतिहास जरा अलग है। असल में विज्ञान के मामले में

हाशिये के समुदाय : तीन इतिवृत्त

( राजा राम भादू ) हाशिये के समुदायों पर सामाजिक- सांस्कृतिक सामग्री का नितांत अभाव मिलता है। आदिवासी समुदायों पर भारतीय नृतत्वशास्त्र सर्वेक्षण के अन्तर्गत कुछ मोनोग्राफ प्रकाशित हुए हैं। लेकिन ये दशकों पुराने हैं और इन्हें अद्यतन नहीं

लोग हो गये गोरधन !

( राजा राम भादू )दीपावली से जुड़ी पर्व- श्रृंखला में गोबर्धन भी एक पर्व है। इस दिन की महिमा मैं ने वैसी अन्यत्र नहीं देखी जैसी ब्रज में विद्यमान है। मथुरा के निकट गोबर्धन है। उसी अंचल में गोवर्धन पर्वत स्थित है। पहाड की परिभाषा के हिसाब से

वामपंथियों को गद्दार कहने वाले जरुर पढ़े !

( मनीष सिंह )  हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी नाम का एक संगठन उस जगह बना था, जिसे आप फिरोजशाह कोटला कहते है, आज क्रिकेट की वजह से जाना जाता है। वह कोटला जो सुल्तान फिरोजशाह की आरामगाह था। वह मुसलमान सुल्तान जिसने अशोक के धराशायी हो

केबीसी में मनुस्मृति दहन पर प्रश्न से मचा बवाल

(राम पुनियानी ) ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) सबसे लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में से एक है. इसमें भाग लेने वालों को भारी भरकम धनराशि पुरस्कार के रूप में प्राप्त होती है. हाल में कार्यक्रम के ‘कर्मवीर’ नामक एक विशेष एपीसोड में अमिताभ

कुछ बातें नेहरु के बहाने !

( अशोक़ कुमार पाण्डेय ) जवाहर लाल नेहरु का ज़िक्र सोशल मीडिया, अखबारों और चंडूखानों में केवल 14 नवम्बर तक महदूद नहीं रहता. वह एक तरफ आज़ाद हिन्दुस्तान के निर्माता हैं तो दूसरी तरफ़ कश्मीर को राष्ट्र संघ में ले जाके उलझाने वाले. एक तरफ

आरक्षण का आधार और महत्त्व !

( प्रो. विवेक कुमार )पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में आरक्षण के विरोध में तमाम तरह के लॉजिक इसके विरोधियों द्वारा दिए जा रहे हैं। इनमें में कुछ कॉमन लॉजिक ऐसे हैं जिन्हें हम बेसिरपैर बातें कहें तो अधिक सही होगा। उन 'महान' ज्ञानियों के