लखबीरसिंह के हत्यारे नानक-धर्म की रूह के भी हत्यारे हैं !

त्रिभुवन ( लखबीर सिंह के हत्यारे नानक धर्म की रूह के भी हत्यारे हैं ,ठीक उसी तरह जैसे इस्लामिक, जैसे हिन्दू और जैसे बाकी सब ) पंजाबी के कवि प्रोफ़ेसर मोहनसिंह के काव्यसंग्रह 'सावे पत्तर' में एक कविता है, 'रब'। इसकी शुरू की पंक्तियां

घनी रात में भी उजाला करने वाली एक चिंगारी हैं गांधी – तुषार गांधी

( हिंदू कॉलेज में ‘गांधी : एक असंभव संभावना’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान ) ( नई दिल्ली ) ‘आज के दौर में गांधी असंभव लगे यह आश्चर्य की बात नहीं है.आज ऐसी विपरीत परिस्थितियां हैं,जिससे यह प्रश्न उठना स्वाभाविक हो जाता है कि क्या सच में गांधी

गाँधी जयंती: क्यों आया ट्विटर पर गोडसे जिंदाबाद का तूफ़ान ?

( राम पुनियानी ) गत 2 अक्टूबर (गाँधी जयंती, 2021) को ट्विटर पर ‘नाथूराम गोडसे अमर रहे’ और ‘नाथूराम गोडसे जिंदाबाद’ की ट्वीटस का अंबार लग गया. ये नारे उस दिन भारत में ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे थे. यह देखकर कई लोगों को बहुत धक्का लगा. जो

उफ्फ! एक दशक बाद अब आसाम में एक और भजनपुरा

डायरी (24 सितंबर, 2021) ( नवल किशोर कुमार ) बाजदफा यह सोचता हूं कि क्या किसी एक मुल्क में एक ही मजहब को मानने वाले लोग हो सकते हैं? यदि हां तो क्या वह मुल्क दुनिया का सबसे सुंदर मुल्क होगा? सबसे सुंदर का मतलब यह कि वहां अपराध नहीं

“ हिन्दुत्व अपने जन्म से ही जातिवादी और दलित विरोधी है !”

( डिस्मेन्टलिंग ग्लोबल हिंदुत्व कॉन्फ्रेंस में मेरा भाषण ) तमाम चुनौतियों व खतरों के बावजूद यह कॉन्फ्रेंस हो रही है ,यह ख़ुशी की बात है. इस कॉन्फ्रेंस में आपने मुझे वक्ता के रूप में बुलाया और अपनी बात रखने का मौका दिया,इसके लिए मैं

“ हिन्दुत्व के हिमायती हमको बोलने क्यों नहीं देते प्रधानमंत्री जी ?”

( खुला पत्र  ) प्रिय प्रधानमंत्री जी,  जय भीम !  मैं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक गाँव से यह पत्र आपको लिख रहा हूँ.मैं एक लेखक ,पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और खेती किसानी करता हूँ तथा दलित,आदिवासी और घुमंतू जैसे वंचित

टोक्यो में तिरंगा उंचा

मोहनलाल सोनल 'मनहंस' टोक्यो में चांदी सी चमक तिरंगा लहराती मीराबाई चानू । नमन भारत की बेटी को थापित किया उज्ज्वल बिंदू ।। पी वी सिंधु ने एक बार फिरसच किया बैडमिंटन मे सपना । पदको के सुखे को खत्म कर देश सेवा

स्वतंत्र भारतः सपने जो पूरे न हो सके

( राम पुनियानी ) औपनिवेशिक शासन से भारत की मुक्ति के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वाधीनता आंदोलन के नेताओं के सपनों और आकांक्षाओं का अत्यंत सारगर्भित वर्णन अपने प्रसिद्ध भाषण 'ए ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी' में किया था.

क़ब्रों को पीटने वाले बीमार लोगों का देश !

- भंवर मेघवंशी यह देश गम्भीर रूप से जाति की बीमारी से ग्रस्त है, हालात दिन प्रति दिन भयावह होते जा रहे हैं. हर दिन कोई ऐसी घटना घटती है, जिसे देखकर , सुनकर और पढ़कर मन में सवाल आता है कि यह कैसा देश है और कैसे है हम इसके निवासी ? कभी

खूब तुम्हें जोहार

एक बेटी ने मान बढाया ,अचूक निशाना लगाया । दीपिका कुमारी महतो ने, गौरवमयी क्षण लाया ।। पेरिस की धरती पर ,तिरंगा उंचा फहराया । तीन स्वर्ण पदक पाकर ,देश का मान बढाया ।। झारखंड रांची की बेटी,बनी फिर