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 कोविड के बढ़ते मामलों के कारण यात्रा स्थगित

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कोटा, 6 जनवरी 2022- राज्य के विभिन्न जिलों में होती हुई जवाबदेही यात्रा आज कोटा पहुंची और ख़राब मौसम की वजह से रैली, सभा आदि नहीं करके अपना गेस्ट हाउस में एक आवश्यक बैठक की गई जिसमें यात्रा से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे और कोविड की परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए सर्वसम्मति से यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया साथ ही जवाबदेही कानून के लिए आन्दोलन जारी रखने का फैसला किया गया. 


आज दोपहर में प्रेस क्लब कोटा में मीडिया के साथियों के साथ प्रेस वार्ता आयोजित की गई जिसमें अपनी बात रखते हुए शंकर सिंह ने कहा कि कोविड के बढ़ते प्रभाव के कारण हमें यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है लेकिन जवाबदेही का यह आंदोलन जारी रहेगा। प्रेस कांफ्रेंस में अभियान से जुड़े कमल कुमार ने जवाबदेही क्यों जरूरी है पर अपनी बात रखी। 


मुकेश निर्वासित ने यात्रा की शुरुआत 20 दिसंबर 2021 से 6 जनवरी तक हुए कार्यक्रमों का ब्यौरा रखा। इसी के साथ पारस बंजारा ने यात्रा के सांस्कृतिक पक्ष को मीडिया के सामने रखा कि कलाकारों की कितनी अहम भूमिका रही। 


प्रेस वार्ता को सुशीला, रामकरण, तन्वी, मानुषी, मीत काकड़िया, प्रेम कंवर, चंद्रकला शर्मा, रमेश सेन, फिरोज खान ने भी संबोधित किया। प्रेस कांफ्रेंस का सफल संचालन अभियान से जुड़े भंवर मेघवंशी ने  किया। इस पूरी यात्रा के दौरान विनीत पंछी की पूरी टीम ने दस्तावेजीकरण किया और इसे विभिन्न माध्यमों से जन जन तक पहुंचाया। 


गौरतलब है कि सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान के बैनर  तले सौ से भी अधिक जन-संगठनों, अभियानों, नागरिक संगठनों/समूहों आदि के साथ एक 45-दिवसीय जवाबदेही यात्रा निकाली जा रही है, जिसकी राज्य के सभी 33 ज़िलों में जाने की योजना थी। पिछले 17 दिनों के दौरान जिन 12 ज़िलों में यात्रा गई है वहाँ इसे भारी जन-समर्थन मिला है।

इस दौरान यात्रा कोविड नियमों/दिशा-निर्देशों की सावधानी-पूर्वक पालना के साथ चलती रही है। लेकिन हाल के नए वेरीएंट के तेज़ी से फैलने की वजह से स्थिति अनिश्चित और चिंताजनक हो गई है। राजस्थान सरकार ने भी एक प्रोटोकॉल की घोषणा की है और लोगों भारी-भीड़ से बचने की सलाह दी है। हमारी अपनी चिंताओं और ज़िम्मेदार संगठनों और व्यक्तियों के तौर पर अपने कर्तव्य को देखते हुए हमने तय किया है कि जन-केंद्रित जवाबदेही क़ानून की पैरवी करने के लिए हम कोई और रास्ता निकालें और ऐसा करते समय यह भी ध्यान रखें कि कोविड का और ज़्यादा फैलाव ना हो इसीलिए हमने जवाबदेही यात्रा को अस्थाई तौर पर स्थगित करने का निर्णय लिया है, लेकिन हम स्पष्ट करना चाहते कि जवाबदेही कानून के लिए ये आन्दोलन जारी रहेगा और इसके लिए नए तरीके खोजे जायेंगे.

 
यद्यपि, यात्रा के हमारे अनुभव को देखते हुए हम राजस्थान विधानसभा के 2022 के बजट सत्र में जवाबदेही क़ानून को पारित किए जाने की माँग के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। यह वादा राजस्थान कांग्रेस कमेटी ने अपने 2018 के चुनावी घोषणा पत्र में किया था और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019 के बजट भाषण में इसे दोहराया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राम लुभाया पूर्व आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में समिति बनाई, जिसने कानूनी मसौदा महीने में प्रस्तुत किया, लेकिन आज दिन तक वह कानून को विधानसभा के पटल पर पेश नहीं किया।


उल्लेखनीय है कि राजस्थान की जनता विगत 10 साल से जवाबदेही कानून की मांग को लेकर आंदोलनरत है. वर्ष 2015-16 में एस.आर. अभियान द्वारा राजस्थान के सभी 33 जिलों में 100 दिन की पहली जवाबदेही यात्रा निकाली गयी थी। यात्रा के दौरान अभियान द्वारा लगभग 10,000 शिकायतों का पंजीकरण किया गया जिसमें राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर भी डाला गया था और उनका पीछा किया गया था, इसके बाद जयपुर में 22 दिन का जवाबदेही धरना लगाया गया और सरकार से तुरंत यह कानून पारित करने की मांग की गई ताकि लाखों लोगों के मूलभूत अधिकारों के हो रहे उल्लंघन को रोका जा सके। 


20 दिसंबर 2021 से जयपुर से शुरू हुई द्वितीय जवाबदेही यात्रा के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों पर जवाबदेही यात्रा गई है तथा इस दौरान राज्य भर से जवाबदेही क़ानून पारित किए जाने के अनुरोध वाले पोस्टकार्ड राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को उन अनेक लोगों के द्वारा भेजे जा रहे हैं जो पूरे राज्य में इस यात्रा को समर्थन दे रहे हैं। हर ज़िले में हमने छोटी-बड़ी नुक्कड़ सभाएं की। ज़िला मुख्यालय/क़स्बों में रैलियां, गांवों और बस्तियों में शिक़ायत निवारण के शिविर, ज़िला मुख्यालयों पर ज़िला कलक्टरों और विभिन्न सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़े ज़िला-स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठकें आदि की हैं। इस सबसे हमारा यह विश्वास और गहरा हुआ है कि एक मज़बूत और प्रभावी सामाजिक जवाबदेही क़ानून की बहुत ज़रूरत है। हमें सैकड़ों ऐसे लोग मिले जो बेसब्री से अपने विधि-सम्मत अधिकारों के साकार होने की राह देख रहे हैं। इनमें जीवनयापन से जुड़े बुनियादी मुद्दों जैसे राशन, पेंशन, मनरेगा में काम, वन अधिकार क़ानून के तहत व्यक्तिगत या सामुदायिक पट्टे, सिलिकोसिस में राहत-राशि, घुमंतू समुदायों के पट्टे आदि के साथ ही आधारभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं।


यात्रा के दौरान यह अनुभव हुआ है कि जनता के हित में सरकार द्वारा अधिकाधिक योजनाएं बनाने के संकल्प के बावजूद जब तक लोगों के हाथ में इन योजनाओं के उचित क्रियान्वयन की देखरेख और निगरानी का अधिकार नहीं होगा तब तक यह योजनाएँ ठीक से काम नहीं करेंगी। इसका कारण सरकारी कर्मचारियों, अधिकारीयों और जन प्रतिनिधियों का अपने दायित्व का पालन करने में अकुशल, असफल और संवेदनहीन होना भी है। ऐसे में बेहतरीन काम करने वाले चुनिंदा सरकारी कर्मचारियों पर बोझ बहुत अधिक बढ़ जाता है और वे यह भार उठा पाने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए हमारा मानना है कि सिर्फ़ प्रभावी डिजिटल व्यवस्थाओं और प्रतिबद्ध कर्मचारियों के होने मात्र से ही उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं होगा और जवाबदेही तय नहीं होगी। इसलिए बहुत जरुरी है कि प्रभावी जवाबदेही क़ानून लागू किया जाये.


 यात्रा ने किया 13 जिलों का सफर

 20 दिसम्बर को जयपुर से प्रस्थान कर जवाबदेही यात्रा अजमेर, राजसमंद, पाली, जालोर, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी होते हुये आज कोटा में यात्रा के प्रथम चरण को स्थगित किया जा रहा है.


 12 जिलों में जिला प्रशासन के साथ बैठकें हुई और जवाबदेही पर बात हुई

इस यात्रा के दौरान अजमेर, राजसमंद, पाली, जालौर, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और बूंदी जिला प्रशासन के साथ विभिन्न आम जन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लंबी चर्चाएं हुई।  जिलों के ज़िला कलेक्टर्स और अन्य ज़िला अधिकारियों द्वारा हर दिन जवाबदेही यात्रा समूह के साथ एक से डेढ़ घंटे की मीटिंग करके आम जनता के मसलों को सुना, कईं मामलों में त्वरित निस्तारण के लिए भी दिशा निर्देश जारी किए, इसके लिए ज़िला प्रशासन का भी हम धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। हमारा गहरा विश्वास है कि जवाबदेही से राजस्थान पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक शासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। 
भवदीय
अरुणा रॉय, कविता श्रीवास्तव, निखिल डे, शंकर सिंह, आर.डी. व्यास, श्यामलाल, चेतनराम, भंवर मेघवंशी, महेश बिंदल, फिरोज खान, राजेन्द्र शर्मा, धर्मचंद खैर, अनंत भटनागर, गोविंदलाल, कैलाश, विनित, तारा अहलुवालिया, जयेश जोशी, सिराज खान, डा. नरेन्द्र गुप्ता, रामलाल भट्ट, रामकरण, शकुंतला पामेचा, याकूब मोहम्मद, दिनेश माली, रक्षिता स्वामी, खुश, जवाहर सिंह, हरनाथ सिंह, रूपलाल, भैरुलाल, तारु सिंह, जीतेन्द्र कुमार, तन्वी, मानुषी, मीत काकडिया, ताराचंद वर्मा, सुमन देवठिया, भगवतीलाल, पारस बंजारा, सरफराज, ऋचा औदिच्य, वकता राम देवासी, मधुलिका, मानसिंह, जवानसिंह, प्रेम कंवर, जनता बाई,  सुशीला, नोरतमल, कमल टांक, मुकेश निर्वासित, संदीप विश्नोई, शांतिलाल, केसाराम, स्वरुप खान, पप्पूलाल, मनीषा, फिरोज खान बहुरुपिया, परमाराम, मूलचंद शर्मा, फारुख खान, अमज़द खान, श्याम भट्ट, कमलेश वर्मा, बालाजी, महेंद्र सिंह, कमलेश शर्मा, शिशिर, मयंक, ऐना, महविश, डिलन, वंदना प्रभा, ईश्वर, अमित, सत्यानारण, रामगोपाल बैरवा, दुर्गेश बैरवा, निखिल शेनॉय, शुभांगी, हाजी, पुखराज, अक्षय, सुदीप अमृता प्रवीण, घीसा सिंह, महेंद्र सिंह, हबीब खान एवं अभियान के सभी साथी

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