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 सिलिकोसिस नीति का हो रहा है व्यापक उल्लंघन !

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 ( पीड़ितों एवं उनके परिजनों को नहीं मिल रही है राहत ) 
जयपुर 29 जनवरी- राजस्थान में बड़े पैमाने पर पत्थर का खनन, पत्थर गढाई, पिसाई, क्रेसिंग एवं अन्य कई प्रकार के इससे सम्बंधित उद्योग संचालित हैं जिनसे राज्य की सरकार और खनन एवं अन्य नियोक्ता अंधाधुंध कमाई करते हैं. सभी जानते हैं कि राजस्थान के पत्थर की देश ही नहीं दुनिया में बड़ी पहचान है और यहाँ से पत्थर का निर्यात ओर उसे तराशने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है जिससे सरकार और उद्योगों को लाखों- करोड़ों रुपये की आमदनी होती है. लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष है कि खनन पत्थर गढाई, पिसाई, क्रेसिंग एवं इससे जुड़े अन्य जोखिमपूर्ण उद्योगों में मजदूरों की बहुत बुरी हालत है और उनको इसके कारण सिलिकोसिस नामक लाइलाज बीमारी होती है जिसका बचाव के अलावा कोई उपचार नहीं है. आज एक ओर जहां इन नियोक्ता व उद्योगो का विकास हो रहा है वंही दूसरी ओर श्रमिक वर्ग का नाश हो रहा है. आज खनन, पत्थर गढाई, पिसाई, क्रेसिंग जैसे जोखिमपूर्ण व्यवसाय में काम करने वाले श्रमिकों की सिलिकोसिस की वजह से 25 से 30 साल की उम्र में मौत हो रही है. इस वजह से सिरोही, करौली, उदैपुर, धौलपुर जैसे जिलो में दर्जनों गावो को विधवाओ के गाव कहा जाने लगा है.

 
राजस्थान सरकार ने राज्य में प्रगतिशील सिलिकोसिस नीति 2019 में बनाई जिसे आज तक ठीक से लागू नहीं किया है. राज्य में सिलिकोसिस नीति बनने के बाद भी सिलिकोसिस पीड़ितों को सहायता राशि के लिए इधर से उधर भटकना पड़ रहा है साथ ही सिलिकोसिस नीति में इनके लिए सहायता राशि ,सामाजिक सुरक्षा पेंशन, खाद्य सुरक्षा और उनके बच्चों को पढाई के लिए पालनहार सहायता का प्रावधान किये जाने के बाद भी समय पर यह सब सहायता नहीं मिल पा रही है. जबकि सिलिकोसिस निति में कहा गया है कि तकनिकी (डिजिटल) की सहायता से तुरंत सहायता दिए जाने की बात कही गई है. ऐसे में लगता है कि सिलिकोसिस नीति बनाने के बाद भी सरकार किसी की इस सम्बन्ध में जवाबदेही अभी तक तय नही कर पाई. जब सिलिकोसिस से पीड़ित लोग अपनी कहानी बयां करते हैं तो ऐसा लगता है कि ना स्थानीय स्तर के अधिकारी और ना ही राज्य स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही कहीं नज़र नहीं आती है, ऐसे में सिलिकोसिस पीड़ित और उनके परिवार जिन्होंने देश और नियोक्ताओ के विकास में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है उनको आज भी समय पर मुआवजा राशि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार और खाद्य सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसकी वजह से इन सिलिकोसिस पीड़ित मजदूरों ओर उनके परिवार को भूख व परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.


खनन, पत्थर घडाई, पिसाई, क्रेसिंग एवं इससे जुड़े अन्य उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को अपनी सिलिकोसिस की जाँच के लिए भी बहुत प्रयास करना पड़ता है, प्राथमिक जाँच और मेडिकल बोर्ड में जाँच में जाने से पहले भी जाँच के इन्तजार ये मजदूर मर जाते हैं. जाँच में सिलिकोसिस पीड़ित पाए जाने के बाद भी प्रमाण पत्र के लिए भटकना पड़ता है. कई मजदूर बिना प्रमाण पत्र के ही अपनी जान गँवा चुके होते हैं जिन्हें कुछ भी नहीं मिलता है. जैसे तैसे प्रमाणित होने वाले श्रमिकों को सहायता राशि ओर अन्य लाभ समय पर नहीं मिल पाते है. जबकि सरकार जाँच से लेकर सहायता राशि ओर योजनाओं से जुड़ाव तक के सभी काम ऑनलाइन तरीके से जनाधार ओर राज सिलिकोसिस पोर्टल के माध्यम से कर रही है.  

   
इसके बाद भी राज्‍य में न्यूमोकोनियोसिस बोर्ड सिलिकोसिस प्रमाणित *5,053 श्रमिक* लम्बे समय से अभी तक भी सहायता राशी की प्रतीक्षा में है। इसके अलावा *4,990 सिलिकोसिस प्रमाणित श्रमिकों के सहायता आवेदन (3,970* जीवित *व 1,020 मृत्यु) अधिकारियों द्वारा अलग अलग स्तर पर रिजेक्ट कर दिए गए हैं,* जबकि निति के अनुसार हर प्रमाणित श्रमिक को जीवित रहते ओर मरने के बाद सहायता दिए जाने का प्रावधान है. इसके अलावा आज तक हजारो कि संख्या में सिलिकोसिस प्रमाणित श्रमिको का पालनहार व खाध्य सुरक्षा जैसी योजनाओ से जुड़ाव नहीं हो पाया है, जबकि सरकार को सहायता राशि ऑटों सिस्टम लागू करके तुरंत प्रदान की जानी चाहिए. आज भी सिलिकोसिस की जॉच के लिए आवेदन करने वाले *श्रमिकों मे से 15,166 श्रमिकों के आवेदन CHC स्‍तर पर और 6,160 श्रमिकों* के आवेदन जिला न्‍यूमोकोनियोसिस बोर्ड स्‍तर पर जॉच के लिए लम्बित है। इनमें से कई श्रमिकों की तो जॉच के इंतजार में मृत्‍यु भी हो गई। सिलिकोसिस नीति के तहत सिलिकोसिस से श्रमिकों के बचाव, नियन्‍त्रण और नियमो की पालना के लिए अभी तक कोई भी निर्देश जारी नही हुए हैं। इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा स्थापित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) एवं राजस्थान संपर्क पर लगातार शिकायत दर्ज करते आ रहे हैं. इस वर्तमान जवाबदेही ढांचे की मूलभूत कमियों की वजह से इन पीड़ित शिकायतकर्ताओं के घाव पर नमक ही छिड़का जा रहा है एवं राज्य सरकार भी अपनी नीति को लागू करने में विफल साबित हुई है.

 
जवाबदेही यात्रा के दौरान 20 दिसंबर 2021 से 6 जनवरी 2022 तक सिलिकोसिस से जुडी *250 से अधिक* व्यक्तिगत और सामूहिक शिकायते दर्ज हुई हैं. सालो तक सहायता के इंतज़ार ओर सरकारी विभागों के चक्कर लगाने के अनेक उदहारण हमारे सामने आये हैं. इसके कुछ उदहारण आपके सामने हम यहाँ पेश कर रहे हैं. सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान हर सप्ताह एक मुद्दे को पेश करेगा ओर जवाबदेही यात्रा के दौरान दर्ज हर एक शिकायत का समाधान होने तक पीछा करता रहेगा. सिलिकोसिस से हमें साफ़ दिखता है कि जवाबदेही कानून के त्वरित एवं प्रभावी व क्रियान्वयन ना होने की वजह से अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है. हम उम्मीद करते हैं सरकार अपने वादे को निभाते हुए जवाबदेही कानून तुरंत पास करे.

  
 केस 1

प्रकाशप्रकाश पिता हीरालाल उम्र 34 साल निवासी कालेसरिया, देवगढ जिला राजसमन्‍द ने 05 सितम्‍बर, 2019 को राज सिलिकोसिस पोर्टल पर पंजीकरण क्रमांक 1900028298 के माध्‍यम से सिलिकोसिस जॉच के लिए आवेदन किया था। इस पर जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा 25 जनवरी 2021 को सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। सिलिकोसिस नीति के अनुसार प्रमाण पत्र जारी होने के बाद इन्हें जीवित रहते मिलने वाली 3 लाख रूपये की सहायता राशि स्‍वत: मिलनी चाहिए थी। सहायता के इंतजार में ही 24 अप्रैल, 2021 को सिलिकोसिस पीडित प्रकाश की मृत्‍यु हो गई। मृत्‍यु के बाद सहायता के लिए प्रकाश की पत्‍नी डाली बाई द्वारा दिनांक 03 जुलाई, 2021 को राज सिलिकोसिस पोर्टल पर पंजीकरण क्रमांक 2100138993 मृत्‍यु बाद सहायता के लिए आवेदन किया था। मृत्‍यु बाद सहायता के लिए आवेदन करने के बाद विभाग द्वारा जीवित सहायता आवेदन निरस्‍त (Reject at nodal officer) कर दिया गया। जीवित व मृत्‍यु सहायता नही मिलने पर प्रकाश के बूढ़े पिता हीरालाल कई बार सहायता के लिए जिला अधिकारियों से मिले लेकिन कोई सुनवाई नही हुई।


इस मामले में सिलिकोसिस सहायता के लिए 28 मई, 2021 को राजस्‍थान सम्‍पर्क पर परिवाद क्रमांक 052105510116669 (मो न. 9530078378) दर्ज करवाते हुए जीवित व मृत्‍यु सहायता अभी तक प्राप्‍त नहीं होने की शिकायत दर्ज करवाई। इस शिकायत को खान विभाग ने 8 जून, 2021 को Relief दिखाते हुए (नोडल अधिकारी द्वारा मृत्‍यु प्रमाण पत्र अपलोड करने पर अग्रिम कार्यवाही की जा सकती है) Partially Closed कर दिया। प्रार्थी द्वारा ने 8 जून, 2021 को ही सहायता नहीं मिलने की असुन्‍तष्टि पर शिकायत जारी रखने का आग्रह किया गया। इस पर फिर से खान विभाग ने 28 जून, 2021 को Relief दिखाते हुए (प्रार्थी ने पंजीकरण क्रमांक 1900028298 द्वारा आवेदन नोडल स्‍तर पर वेरीफिकेशन हेतु पेन्डिंग होकर निस्‍तारण किया जा रहा है) Partially Closed कर दिया। 28 जून को परिवादी ने सहायता नहीं मिलने तक शिकायत जारी रखने का आग्रह किया जिसे 2 जुलाई को Marked not satisfied किया गया।


पुरानी शिकायत के बाद सहायता नही मिलने पर प्रार्थी हीरालाल की ओर से दिनांक 14 जुलाई, 2021 को परिवाद क्रमांक 072108410471606 फिर से राजस्‍थान सम्‍पर्क पर दर्ज करवाया गया। जिसे खान विभाग ने 2 अगस्‍त, 2021 को Relief दिखाते हुए (सेंक्‍शन जनरेशन के लिए लम्बित है, जल्‍द ही निस्‍तारित कर दिया जाएगा) Partially Closed कर दिया। प्रार्थी ने 2 अगस्‍त, 2021 को ही सहायता नहीं मिलने की असुन्‍तष्टि पर शिकायत जारी रखने का आग्रह किया गया। इस पर फिर से खान विभाग ने 25 अगस्‍त, 2021 को Relief में फिर वही बात दिखाते हुए (सेंक्‍शन जनरेशन के लिए लम्बित है, जल्‍द ही निस्‍तारित कर दिया जाएगा) Partially Closed कर दिया। प्रार्थी ने 28 अगस्‍त, 2021 को सहायता नहीं मिलने की असुन्‍तष्टि पर शिकायत जारी रखने का आग्रह किया व 30 सितम्‍बर को अपनी ओर से Request for reopen किया जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नही की गई।

कार्यवाही नही होने पर प्रार्थी द्वारा तीसरी बार 02 दिसम्‍बर, 2021 को राजस्‍थान सम्‍पर्क पर परिवाद क्रमांक 122105511456962 दर्ज करवाया। जिसे खान विभाग ने 17 दिसम्‍बर, 2021 को Relief दिखाते हुए (1. प्रकाश पुत्र हीरालाल ने जीवित सिलिकोसिस सहायता राहत हेतु आवेदन किया लेकिन 24.06.2021 को खाता सम्‍बन्धित सूचना न‍ही होने के कारण रिजेक्‍ट कर दिया गया। 2. श्री प्रकाश पुत्र हीरालाल ने मृत सिलिकोसिस राहत योजना हेतु आवेदन किया सेंक्‍शन जनरेशन हेतु लंबित रहने के कारण सहायता राशि नही मिल पाई हैं) Partially Closed कर दिया। 20 दिसम्‍बर, 2021 को प्रार्थी द्वारा असन्‍तुष्टि दिखाने पर पर खान विभाग द्वारा फिर वही सहायता नही मिलने का कारण बताते हुए Partially Closed : Relief कर दिया।


इस मामले में पूर्व में 3 बार शिकायत के बाद भी सहायता नही मिलने पर प्रार्थी के पिता हीरालाल साल्‍वी ने जवाबदेही यात्रा के दौरान परिवाद क्रमांक 122105511621442 दिनांक 29 दिसम्‍बर, 2021 को फिर से अपनी शिकायत दर्ज करवाई। यह शिकायत फिर से खान विभाग को भेज दी गई और खान विभाग ने फिर से 4 जनवरी, 2022 को Relief दिखाते हुए (श्री प्रकाश पुत्र हीरालाल की मृत्‍यु के पश्‍चात उनकी पत्‍नी डाली बाई ने मृत सिलिकोसिस राहत योजना हेतु आवेदन किया जो खनिज विभाग द्वारा recomend कर दिया गया जो जिला स्‍तर पर सेंक्‍शन जनरेशन हेतु लंबित हैं) Partially Closed कर दिया। 10 जनवरी, 2021 को प्रार्थी द्वारा असन्‍तुष्टि दिखाने पर मामला फिर से खान विभाग को भेज दिया गया जो कि आज तक लम्बित है।


 केस 2: गट्टू सिंह

प्रार्थीया सज्‍जन कँवर निवासी गांव काछबा, तह गोगुन्‍दा, जिला उदयपुर के पति श्री गट्टू सिंह को 23 अप्रैल 2018 को जिला न्‍यूमोकोनियोसिस बोर्ड द्वारा राज सिलिकोसिस पोर्टल पर पंजीकरण क्रमांक 180002128 पर सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी किया गया। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद सहायता राशि के लिए जिला कलेक्‍टर कार्यालय में सहायता के लिए आवेदन किया लेकिन सहायता नही मिली। सहायता के इंतजार में दिनांक 8 जून, 2019 को गट्टू सिंह की मृत्‍यु हो गई। जीवित सिलिकोसिस सहायता के लिए जिला नोडल अधिकारी ने ब्‍लॉक प्रशासन (तहसील कार्यालय कमरा नम्‍बर 10) द्वारा इनके आवेदन का सत्‍यापन करते हुए 3 बार इनके आधार, जनाधार, बैक विवरण, सिलिकोसिस प्रमाण पत्र, मृत्‍यु प्रमाण पत्र आदि दस्‍तावेज जमा कर लिए लेकिन इन्‍हे यहायता नही मिली। इस बाबत इनके पुत्र रघुवीर सिंह ने 23 मार्च, 2021 को पिण्‍डवाडा में आयोजित जनसुवाई में भी अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी। बार बार सत्‍यापन, प्राथर्ना और शिकायत के बाद भी सहायता नही मिली। इसके बाद दिनांक 30.07.2021 को राज सिलिकोसिस पोर्टल पर आवेदन क्रमांक 2100144616 पर मृत्‍यु सहायता के लिए आवेदन कर दिया। मृत्‍यु सहायता के आवेदन के बाद विभाग द्वारा इनके जीवित सहायता के आवेदन को Reject कर दिया गया और मृत्‍यु सहायता का आवेदन पेन्डिंग बना रहा।


इस पर सहायता के लिए इनके पुत्र रघुवीर द्वारा दिनांक11 सितम्‍बर, 2021 को राजस्‍थान सम्‍पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई। इनके द्वारा दर्ज शिकायत को दो अलग अलग क्रमांक 092105510924093व 092104810924095पर दर्ज करते हुए क्रमश: खान व श्रम विभाग को भेज दिया गया। खान विभाग ने परिवाद क्रमांक 092105510924093 को 27 सितम्‍बर 2021 को परिवादी से सम्‍पर्क नहीं होने के कारण का हवाला देते हुए शिकायत का Final closure कर दिया गया। इसी प्रकार परिवाद क्रमांक 092104810924095को 27 सितम्‍बर को Partially Special Closed (प्रार्थी के दस्तावेज संलंग नहीं है ना ही श्रमिक कार्ड लगा हुआ है ऐसी स्थिति में आवेदन की जाँच किया जाना संभव नहीं है अतः प्रार्थी अपने दस्तावेज संलग्न करे) व 6 अक्‍टूबर, 2021 को Final Closure (No Response परिवादी से संपर्क नहीं होने के कारण परिवाद पूर्ण निस्तारित किया गया) जबकि उपरोक्‍त दोनो ही विभागो द्वारा प्रार्थी से कभी कोई सम्‍पर्क नहीं किया गया। सिलिकोसिस नीति के अनुसार सिलिकोसिस पीडित व प्रमाणित श्रमिक को सहायता के लिए श्रमिक कार्ड, नियोक्‍ता प्रमाण पत्र या अन्‍य दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करने की आवश्‍यकता नहीं है।


इसके बाद जवाबदेही यात्रा के दौरान दिनांक 30 दिसम्‍बर को सज्जन कँवर ने परिवाद क्रमांक 122105511628059 दर्ज करवाया। इस शिकायत को खान विभाग को भेज दिया गया। खान विभाग ने दिनांक 06 जवनरी, 2022 को Partially special closed (पीडित द्वारा सम्‍बन्धित कार्यालय में पजीयन करा स्‍वीकृति प्राप्‍त नही होने से भुगतान की कार्यवाही नही की जा सकती है। इसलिए परिवाद इस कार्यालय से सम्बंधित नही होने के कारण निरस्‍त किए जाने योग्‍य है) कर दिया गया। 11 जनवरी, 2022 को प्रार्थी के असन्‍तुष्‍ट होने पर फिर से खान विभाग के पास भेज दिया गया। 12 जवनरी, 2022 को विभाग ने बिना सोचे समझे फिर से Partially special closed (पीडित द्वारा सम्‍बन्धित कार्यालय में पजीयन करा स्‍वीकृति प्राप्‍त नही होने से भुगतान की कार्यवाही नही की जा सकती है। इसलिए परिवाद इस कार्यालय से सम्बंधित नही होने के कारण निरस्‍त किए जाने योग्‍य है। परिवादी को सम्‍बन्धित ई मित्र केन्‍द्र या CHC केन्‍द्र से पंजीयन करवाने बाबत बोले) कर दिया गया। 21 जनवरी को बिना परिवादी से सम्‍पर्क किए परिवादी से सम्‍पर्क नही होने का हवाला देते हुए Final Closure कर दिया।

केस-3

पप्पुराम पिता अनाराम उम्र 30 वर्ष निवासी आमली,पिण्डवाडा जिला सिरोही ने दिनांक 10 जून 2019 को राज सिलिकोसिस पर पंजीकरण क्रमाक 1900016558 के माध्यम से सिलिकोसिस जॉच के लिये आवेदन किया था इस पर जिला बोर्ड द्वारा 18 फरवरी 2020 को प्रमाण पत्र जारी किया गया, सिलिकोसिस नीति के अनुसार सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी होने के बाद स्वतः ही 3 लाख रुपये सहायता राशि मिलनी चाहिए थी । सहायता राशि का इन्तजार करते हुये दिनांक 04 मई 2020 को इनकी मृत्यु हो गई इसके बाद पप्पुराम की पत्नी तेरसी बाई जब मृत्यु सहायता का आवेदन करवाने के लिये जन आधार कार्ड से पप्पुराम का नाम हटाया और उसके बाद जब राज सिलिकोसिस पोर्टल पर आवेदन करने की कोशिश की तब राज सिलिकोसिस पोर्टल पर No data found based on the entered detail.Change your Detail to view results. ऐसे दिखायी देता है। आज दिनांक तक तेरसी बाई मृत्यु सहायता राशि का आवेदन नही कर पाई है।


जीवित सिलिकोसिस सहायता राशि भी नही मिली है। पिछले 2 साल से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रही है। इस मामले में सिलिकोसिस जीवित सहायता राशि के लिए दिनांक 23 मार्च 2021 को पिण्डवाडा में हुई जन सुनवाई में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई । इस मामले में सिरोही में जवाबदेही यात्रा के दोरान भी तेरसी बाई ने  शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन राजस्थान संपर्क पोर्टल पर नही डाली गई और आज तक जीवित सिलिकोसिस सहायता राशि नही मिली है ।


 केस -4
 सिलिकोसिस की चपेट में बिखर गया परिवार


भानाराम सिरोही जिले के पिण्डवाडा ब्लॉक के आमली गाँव के रहने वाले है करीब 60 साल इनकी उम्र है जहां आराम करने कि उम्र है वही 13 पोते ओर पोतीयों कि जिम्मेदारिया भान्नाराम लालन पालन मजदूरी ओर खेतीबाड़ी करके निभा रह है सिर्फ जिम्मेदारियो कि बात नही है इन्होने पत्थर घड़ाई में काम करने वाले 4 जवान बेटो को कंधा भी दिया.यहाँ के रोजगार में पत्थर घड़ाई में काम करने वालो को भगवान का दर्जा दिया जाता है क्योकि ये मजदुर मूर्ति निर्माण ओर भगवान कि प्रतिमा को सवारने कि कला में मायरे थे लेकिन इसके साथ जो सिलिकोसिस नामक लाइलाज बीमारी ने भान्नाराम के 4 बेटो को इस बीमारी से झकड लिया जिसमे भान्नाराम के बेटे पोसाराम, कमलेश, सुरेश और कालूराम पत्थर घड़ाई में काम करते करते धीरे धीरे भगवान को प्यारे हो गए ,जिसमे एक बेटे कि तो समय पर जाँच नही हो पायी ओर 3 बेटो को मेडिकल बोर्ड ने सिलिकोसिस प्रमाण पत्र दिया,जिसमे 2 बेटो को जीवित रहते प्रमाण पत्र मिला ओर एक बेटे को मृत्यु के बाद सिलिकोसिस प्रमाण पत्र मिला,भानाराम ने चारों बेटों के इलाज में लाखो रूपये खर्च कर दिया.

जेवरात भी बेच दिए साथ ही तीन बेटो कि बहुए भी घर छोड़ दिए ओर अब सिर्फ एक बहु ओर भानाराम कि पत्नी सहित 13 बच्चो को पालते है, लेकिन इस सिलिकोसिस बीमारी ने अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते देखा चारों बेटो को खो दिया .सरकार की नीति लागु होने के बाद भी सहायता राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रह है जिसमे 2 बेटो की मृत्यु दावा सहायता राशि अभी तक भी नही मिली और दो सिलिकोसिस परिवारों को खाद्य सुरक्षा में नाम भी नही जुडा हुआ है ऐसे में अकेला व्यक्ति भानाराम 13 बच्चो का लालन पालन केसे कर पायेगा. ना पालनहार से किसी बच्चो को जोड़ा जा रहा है ऐसे में इन बच्चो का भविष्य और शिक्षा कि जवाबदेही किसकी होगी .आज पिण्डवाडा में हजारो कि संख्या में ऐसे कई परिवार है जो मूर्ति निर्माण ,पत्थर घड़ाई और शिल्प कला में आकर देने में सबसे ज्यादा नाम है देश में लेकिन इन मजदूरो ओर परिवारजनों के लिए सरकार कि नीति अनुसार इनका पुनर्वास केसे हो ये एक सवाल हमेशा रहता है .

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