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सामाजिक संगठनों व सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों का बजट पर राज्य स्तरीय क्षमता वर्धन प्रशिक्षण शिविर हुआ संपन्न

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जयपुर. डॉ बी आर अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी झालाना डूंगरी जयपुर में स्वाधिकार दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन राजस्थान,राष्ट्रीय दलित मानव अधिकार अभियान नई दिल्ली व दलित अधिकार केंद्र जयपुर के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया.प्रशिक्षण शिविर में दलित अधिकार केंद्र के मुख्य कार्यकारी श्री पीएल मीमरोठ ने प्रशिक्षण के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. अधिकांता सिंह ( राष्ट्रीय समन्वयक दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन ) ने अनुसूचित जाति जनजाति के केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया बजट के विश्लेषण पर बात की तथा नीति आयोग द्वारा जारी की गई अनुसूचित जाति जनजाति गाइडलाइन के बिंदुओं पर प्रकाश डाला.


सुश्री रितिका सिंह ( प्रोग्राम ऑफिसर दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन नई दिल्ली) ने उच्च शिक्षा वह बच्चों के बजट के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज भी दलित बच्चों को छात्रवृत्ति टाइम पर नहीं मिलती,केंद्र सरकार द्वारा उसके हिस्से की छात्रवृत्ति के पैसे राज्य सरकारों को भेजने में देरी की जाती है,जिससे दलित बच्चों को आगे उच्च शिक्षा प्राप्त करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है,इसके लिए दलित संगठनों ,सामाजिक कार्यकर्ताओं  , सोसाइटी के लोगों को जागरूक होना होगा.राज्य स्तर पर एडवोकेसी करने की जरूरत है.


डॉक्टर नेसार अहमद निदेशक राजस्थान बजट अध्ययन विश्लेषण केंद्र पर प्रकाश डाला.राजेंद्र भाणावत  (रिटायर्ड आईएएस ) ने सामुदायिक व नागर समाज के प्रतिनिधियों की बजट एडवोकेसी में भूमिका के बारे में बताते हुए कहा कि जब तक योजनाबद्घ रूप से समाज के लोग बजट पर एडवोकेसी नहीं करेंगे जब तक दलित और आदिवासियों का बजट दलितों के लिए खर्च नहीं होगा.


सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने दलित आदिवासी बजट की मॉनिटरिंग,जवाबदेही तथा पारदर्शिता बनाए रखने में सामाजिक संगठनों तथा नागरिक समाज की भूमिका के बारे में विस्तार से बतायाडॉक्टर नवीन नारायण (प्रोग्राम मैनेजर- एक्शन एड जयपुर ) में राजस्थान में दलित आदिवासियों की आर्थिक सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब तक गैर बराबरी खत्म नहीं होगी जब तक सामाजिक न्याय की कल्पना करना मुश्किल है.


राजस्थान आर्थिक अधिकार आंदोलन राजस्थान के राज्य समन्वयक एडवोकेट चंदा लाल बैरवा ने कहा कि राजस्थान में 30 परसेंट बजट दलित व आदिवासियों के विकास के लिए खर्च होना चाहिए लेकिन सरकार की दलित विरोधी मानसिकता के कारण से बजट आवंटित नहीं किया जाता, जो आवंटित किया जाता तो खर्च नहीं होता, खर्च किया जाता तो अन्य मदों में खर्च कर दिया जाता है ,जिससे दलितों का विकास नहीं हो पा रहा इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से सभी सिविल सोसाइटी के लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि दलितों के बजट की मॉनिटरिंग पारदर्शिता व जवाबदेही तय करें ताकि दलितों का विकास हो सके. इस मौके पर एडवोकेट सतीश कुमार ( निदेशक – दलित अधिकार केंद्र ) ने भी अपने विचार रखे. विभिन्न जिलों से आये दर्जनों प्रतिनिधि शामिल थे.

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