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बारवा प्रकरण में न्याय नहीं मिला !

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( भंवर मेघवंशी ). पाली जिले की बाली तहसील के बारवा गाँव में दलित युवा जितेंद्र कुमार की जातिवादी आतंकियों ने धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी, न्याय के लिए इंसाफ़ पसंद लोगों ने लम्बी लड़ाई लड़ी, थोड़ा सा मुआवज़ा और दो हत्यारोपियों की गिरफ़्तारी करके इतिश्री कर ली गई, जबकि आंदोलन कारी 50 लाख मुआवज़े और एक परिजन को नौकरी देने की माँग कर रहे थे.

अभी हाल ही में दो सांप्रदायिक घटनाएँ भीलवाड़ा और उदयपुर में हुई, जिसमें दो लोग मारे गये, भीलवाड़ा में आपसी रंजिश के चलते 20 वर्षीय दलित युवक आदर्श तापड़िया तथा उदयपुर में 49 वर्षीय टेलर कन्हैया लाल साहू का धर्मांध तत्वों ने क़त्ल कर दिया,तापड़िया के परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवज़ा दिया गया और साहू के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवज़ा और दो पुत्रों को नौकरी दे दी गई, मुख्यमंत्री जी ने मृतक टेलर साहू के परिजनों से मुलाक़ात भी की और उनकी हत्या पर ट्वीट करके दुःख भी प्रकट किया और श्रद्धांजलि भी दी.

इंसानियत के नाते यह अच्छा कदम था, पीड़ितों को समुचित राहत दी जानी चाहिये, मगर धार्मिक आतंकियों के हाथों मारे गए लोगों के और जातीय आतंकियों के हाथों मारे गए लोगों के मध्य भेदभाव ठीक बात नहीं है.अब सवाल उठ रहे हैं कि भीलवाड़ा में जो लड़का मारा गया, उसके परिजनों को महज़ बीस लाख मिले, क्यों ? क्योंकि वह दलित था ? और जाति अंध समाजकंटकों के हाथों मारे गये जितेंद्र कुमार मेघवाल के लिए न कोई ट्वीट, न उनके घर मिलने जाना, न उसकी निर्मम हत्या की भर्त्सना और मुआवज़ा भी सिर्फ़ 5 लाख, परिजन को नौकरी की तो बात भी नहीं की जा रही है ! यह सब अन्याय नहीं है ? आज का दलित बहुजन युवा सब देख रहा है, वह हर घटना पर न केवल नज़र रख रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर खुल कर अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहा है, लोग सत्ता से सवाल पूछ रहे हैं कि जब वैसे ही छूरे से उतनी ही निर्मम हत्या की सारे घटनाएँ थी, तो मुआवज़े , श्रद्धांजलि और नौकरी देने में भेदभाव क्यों किया गया है.

आज देसूरी और नारलाई में आयोजित विचार विमर्श और चिन्तन बैठकों में मैने साफ़ तौर पर कहा कि बारवा प्रकरण में दलितों को न्याय नहीं मिल पाया है,अब तक बारवा के पीड़ितों के साथ जो हुआ, वह संतुष्टिदायक नहीं है. जितेंद्र कुमार के परिजनों को पचास लाख रुपए का मुआवज़ा और एक परिजन को नौकरी दी जाये अन्यथा इस अन्याय की अनुगूँज राजस्थान के हर कोने में फैलते देर नहीं लगेगी.हम मूकदर्शक नहीं बैठे रह सकते.नारलाई के चिन्तन शिविर में भीलवाड़ा, राजसमंद, पाली , जालोर, सिरोही और उदयपुर तथा जोधपुर के साथी भी शामिल रहे.

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