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नाटक की सार्थकता उसके पढ़े जाने में नहीं, उसके देखे जाने में : असग़र वजाहत

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(प्रो. असग़र वजाहत)

हिन्दू कालेज में वेबिनार –
दिल्ली। नाटक पढ़ने की चीज नहीं है, वह देखे जाने की चीज है। नाटक की सार्थकता उसके मंचन किये जाने में होती है। नाटक में निहित अथाह संभावनाओं के कारण इसमें लोगों की रुचि बनी रहती है, क्योंकि नाटक के भीतर विश्लेषण की, नए आयाम खोजे जाने की बहुत संभावनाएं होती हैं। सुप्रसिद्ध साहित्यकार और नाटककार असग़र वजाहत ने हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था ‘अभिरंग’ के सत्रारम्भ समारोह में उक्त विचार व्यक्त किए।

प्रो. वजाहत ने ‘‘नाटक : लेखन से मंचन तक’’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार में कहा कि नाटक को जितने भी लोग पढ़ते हैं, जरूरी नहीं कि सभी के भीतर उस नाटक की एक ही जैसी छवि बने। उन्होंने कहा कि लेखक से लेकर निर्देशक तक, सभी अपने कल्पनाशीलता के अनुसार अपने अपने मन में उस नाटक उसकी छवि बनाते हैं। नाटक के मंच तक पहुंचने तक के सफ़र में वो अनेक विभागों से हो कर गुजरती है और इस प्रक्रिया में उसका स्वरूप हर पायदान पर निखरता जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैमरा मैन, लाइटिंग विभाग, संगीत, कॉस्टयूम, मंच सज्जा आदि सभी विभाग नाटक के मूल स्वरूप में अपना अपना योगदान देते जाते हैं, उसमें अपना कुछ जोड़ते जाते हैं, और इन पायदानों से गुजरने और निखरने के बाद नाटक का मूल टेक्स्ट मंच पर प्रस्तुत किया जाता है।

व्याख्यान का समाहार में प्रो. वजाहत ने कहा कि नाटक एक कलात्मक विधा है, मंच इसकी जरूरतों को पूरा करता है; मंच का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता, नाटक लेखन उसे सार्थकता देती है। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों से सवाल जवाब के सत्र में प्रो असग़र वज़ाहत ने विद्यार्थियों को नाटक देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का नाटक देखना बहुत जरूरी है। आप नाटक देखें फ़िर इसे पढ़ें, इससे आपकी समझ बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं को मराठी,बांग्ला और कन्नड़ के हिंदी और अंग्रेज़ी में अनुवादित नाटकों को पढ़ने का सुझाव दिया। कोरोना के चलते उत्पन्न स्थितियों में नाटक की संभावना पर उन्होंने नाटक से जुड़े विषय पर व्याख्यानों और सत्रों के आयोजन किए जाने की बात कही। उन्होंने ऑनलाइन मीडिया के माध्यमों से नाटकों के मंचन का प्रसारण और एनएसडी द्वारा ड्रामा के वीडियो आदि चलाने के कार्यक्रमों को आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

इस सत्र में उन्होंने हबीब तनवीर आदि निर्देशकों से जुड़े कुछ संस्मरण भी सुनाए। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में अभिरंग के परामर्शदाता और हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ० पल्लव ने स्वागत उद्बोधन में ‘अभिरंग’ के इतिहास और गतिविधियों के सम्बन्ध में बताया।  उन्होंने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए अभिरंग की कार्यकारिणी की घोषणा की जिसमें संयोजक- अमन पटेल, सह संयोजक – हर्ष उर्मलिया, सचिव-श्रेष्ठा आर्या, महासचिव-राहुल तिवारी, मीडिया प्रभारी-श्रेयश श्रीवास्तव, सह सचिव-अभिनव, कोषाध्यक्ष-अंजली को बनाया गया है।

हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ०धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने प्रो असग़र वजाहत का विस्तृत परिचय देते हुए उनके रचनात्मक अवदान को रेखांकित किया। प्रश्नोत्तर सत्र का संयोजन डॉ० नौशाद अली ने किया। अंत में अभिरंग के संयोजक अमन पटेल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वेबिनार का संयोजन हर्ष उरमलिया ने किया। वेबिनार में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ-साथ नाटक को जानने समझने में रुचि रखने वाले अनेक महाविद्यालयों के प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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