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उदयपुर में सहायता राशि के लिए भटक रहे सिलिकोसिस पीड़ित और उनके परिजन  

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पजीकृत श्रमिकों को भी नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

1247 शिकायतें मिली उदयपुर जिले की

 
उदयपुर, 29 दिसम्बर। जवाबदेही यात्रा आज 10वें दिन उदयपुर जिला मुख्यालय पहुंची। जहां पर यात्रा ने मौहता पार्क में सभा की 
सभा के दौरान आदिवासी क्षेत्रों से आएं महिला पुरुषों ने अपनी समस्याएं रखी और अपनी समस्याओं को शिकायत पत्र पर दर्ज भी करवाया, उक्त शिकायतों को सरकार तक निस्तारण के लिए पहुंचाया जायेगा। आज यात्रा के दौरान 1247 शिकायतें दर्ज की गई।

सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान से जुड़े निखिल डे ने जवाबदेही कानून की उपयोगिता बताते हुए कहा कि जब सरकार हमारी है, सरकार को चलाने, सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह हमारे पैसों से चलती है तो हम क्यों अपने काम के लिए भटकते रहते है, उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए पर सभी ने एकजुटता दिखाते हुए इस कानून को पास करने की सहमति जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल में क्यों सरकारी कर्मचारियों के बच्चे नहीं पढ़ते, सरकार को एक कानून लाना चाहिए कि सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई करें ताकि स्कूल की व्यवस्था और शिक्षा में परिवर्तन ही देश के विकास में योगदान होगा।

 जंगल जमीन जन आंदोलन के संयोजक रमेश नंदवाना ने सवाल उठाया कि वन अधिकार कानून के अन्तर्गत सिर्फ दो ही काम करने है व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार देने के वे अब तक नहीं मिल पा रहे है, इसलिए भी हमको जवाबदेही चाहिए। आदिवासी अधिकार मंच से जुड़े धर्मचंद खैर ने कहा कि सालों से लोग व्यक्तिगत वन अधिकार के दावे लेकर घूम रहे हैं और एक बार नहीं कई बार दावे जमा कर चुके हैं लेकिन उनके दावों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। सरकार की आदिवासियों के प्रति कोई जवाबदेही है या नहीं। यहां पर बटकी बाई ने कहा कि सरकार वन विभाग के एक कर्मचारी के कहने पर दावे निरस्त कर दिए जाते हैं जबकि आदिवासी तो सकड़ों वर्षों से जंगल में ही रहे रहे हैं।

मजदूर किसान शक्ति संगठन के शंकरसिंह ने कहा कि हमको ये तो पता चलना चाहिए कि हमारा काम कब तक हो जायेगा वो स्कूल का हो, नरेगा का हो, स्वास्थ्य का हो, थाने का हो, कोर्ट का हो, हम चक्कर पर चक्कर लगाते जाते है और काम है कि आगे खिसकता ही जाता है, हमें ये पता होना चाहिए कि हमारा इस तारीख तक काम पूरा हो जायेगा, इसलिए हमको जवाबदेही कानून चाहिए हर हालत में चाहिए। 

कई ऐसे उदाहरण है जो ये बताते है कि बिना जवाबदेही के काम ऐसे ही आगे खिसकते रहते हैं जैसे-आदिवासी महिला जागृति संगठन के माध्यम से झाड़ोल-गिर्वा फलासिया ब्लॉक के 40 गांव वालों ने सामुदायिक वन दावे लगाए, 2 वर्षों में दो बार जमा किए, पहले तो विभाग ने फाईले भरवाने में सहयोग नहीं किया, जैसे तैसे फाईल जमा की तो रसीद नहीं दी, अब जब रसीद मिल गई तो फाईले ही खो गई, अब नई फाईलें भरी ये ही सिलसिला जारी है। ऐसे ही व्यक्तिगत वन दावों की स्थिति झाड़ोल-गिर्वा फलासिया के कई लोगों की फाईले रिजेक्ट की जा रही है। नेनबार सेरा के 600 लोगों की फाईल 400 ऑनलाईन व 200 करीब ऑफलाइन जमा की इस वर्ष सिर्फ 3 पट्टे मिल करीब 25 विचाराधीन और 285 फाईले रिजेक्ट कर दी गई।

वन विभाग और सचिव द्वारा गलत तरीके से फाईल को रिजेक्ट करने के चलते सैंकड़ों आदिवासी बेघर होने को मजबूर हैं।भूराराम पिता हामता राम पंचायत बांगवास, तहसील कोटड़ा, उदयपुर भूराराम भूरा ने 10 साल पत्थर गढाई का काम किया। अगस्त 2021 से सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित है, सितम्बर, 2021 में उसे मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र जारी किया गया। उसको सिलिकोसिस सहायता राशि  एवं पेंशन दी जा रही थी पर अभी पिछले करीब 4 महीनों से पेंशन बंद है। और आज दिन तक पेंशन चालू  नहीं हुई। 


अरावली निर्माण मज़दूर सुरक्षा संघ के भँवर लाल ने बताया कि लोगों को श्रम कल्याण बोर्ड की योजनाओं के लाभ नहीं मिल रहे हैं. मनरेगा में 90 दिन मज़दूरी करने वाले लोगों के आवेदन भी श्रम विभाग द्वारा निरस्त किए जा रहे हैं. ज़िले में 11000 से अधिक आवेदन विभाग ओर वेरिफ़िकेशन के स्तर पर लम्बित पड़े हुए हैं.उजाला संघठन की खन्ना देवी ने बताया कि मनरेगा के आवेदनों की रसीद नही मिल रही हैं. काम का भुगतान भी लम्बित हैं. सायरा बरवाडा, सलूमबर, गोगुन्दा, खेरवाड़ा के उजाला संघठन के सदस्यों ने राशन ओर पेंशन से जुड़े मुद्दे उठाए.

नेशनल हॉकर्स फेडरेशन के याकूब मोहम्मद, मो. निजाम, गुमान सिंह राव के साथ रेहड़ी पटरी व्यावसायी, स्ट्रीट वेंडर्स ने भी जवाबदेही यात्रा में भाग लिया और उन्होंने अपनी मांगे रखी कि उनका भी सर्वे करके उनको प्रमाण पत्र दिये जाये। आज उदयपुर जिले में 1247 शिकायतें प्राप्त हुई। सभा के दौरान एडवोकेट रमेश नंदवाना, शंकरसिंह, निखिलडे, धर्मचंद खैर, सरफराज शेख, राजेंद्र शर्मा, मंजू राजपूत, बटकी बाई आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखें। 


 मोहता पार्क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक निकाली रैली

मोहता पार्क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया। रैली में लगे जवाबदेही कानून बनाए जाने के बारे और जिला प्रशासन जवाबदेह बनो के नारे लगे।  

जिला प्रशासन एवं जिला कलक्टर के साथ हुई बैठक

जिला कलेक्टर चेतनराम देवड़ा की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, अन्य सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे तथा अभियान की ओर से निखिल डे, आर डी व्यास, श्यामलाल मेनारिया, सरफराज शेख, राजेंद्र शर्मा, मंजू राजपूत, बटकी बाई, मनीषा, याकूब मोहम्मद, डी एस पालीवाल आदि उपस्थित थे। जिला कलेक्टर ने लगभग 1.5 घंटे तक सभी को सुना और जो 1247 शिकायतें आईं उनको दर्ज  कर निश्चित समयसीमा में निपटारा करने का आश्वासन दिया। 


 कल जवाबदेही यात्रा डूंगरपुर जिला मुख्यालय

कल जवाबदेही यात्रा डूंगरपुर जिला मुख्यालय पहुंचेगी जहां शिकायत निवारण शिविर होगा, सभाएं होंगी और जिला प्रशासन के साथ बैठक होगी। 

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