अस्पतालों ने ठुकराया लेकिन परिजनों की सेवा ने बचा लिया भैरू लाल को !

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( डॉ गोविन्द मेघवंशी )
आईये चलते हैं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कांदा ग्राम में ,जहाँ अपने पिता को बचाने के लिए उनके बेटे राजेन्द्र मेघवंशी और दामाद रामस्वरूप मेघवंशी, पत्नी सीता देवी, अंकल रामप्रसाद मेघवंशी ने अपनी जान की परवाह किये बिना अपने परिजन को कोविड की संभावित मौत के मुँह से खींच लाने में सफलता प्राप्त की है ।

हुआ यह कि कांदा ग्राम के रहने वाले भैरू लाल मेघवंशी ( उम्र-50 वर्ष ) को 15 अप्रैल को हल्की बुखार,हाथ पैरों में दर्द होने की शिकायत हुई.फलत: उनको गाँव के ही एक मेल नर्स को दिखाया गया ,जिससे उन्होंने बुखार की टेबलेट ले ली,जिसे वे तीन दिन तक लेते रहे.18 अप्रैल को वापस बुखार आ गयी तो इंजेक्शन और ड्रिप लगा लिया,इस तरह तीन चार दिन और निकल गए. बाद में मेल नर्स अपनी शादी के कारण नही आ सका.

28 अप्रेल को वापस रोगी को उक्त मेल नर्स के पास ले जाया गया .तब तक भैरू लाल मेघवंशी की हालात काफी खस्ता हो चुकी थी ,वे बाथरूम इस्तेमाल करके जैसे ही बाहर आये तो उनकी श्वास बहुत तेज़ फूलने लग गई,कम्पाउंडर ने रोगी को थोड़ी देर बिठाया और सांस का इंजेक्शन लगा दिया,इससे वो रात जैसे तैसे गुजर गयी।


29 अप्रैल सुबह होते ही भैरू लाल मेघवंशी के लड़के और दामाद ने इन्हें रामस्नेही चिकित्सालय भीलवाड़ा में चैक करवाया तो उनमे कोविड के सारे लक्षण तो साफ थे ही ,ऑक्सीजन लेवल भी 72 आया, वहाँ के डॉक्टर्स ने गंभीर हालात भांपते हुये साफ मना कर दिया कि इन्हें यहाँ से ले जाओ, बेड खाली नही है।मजबूरन परिजन उन्हें भीलवाड़ा के ही एक दूसरे हॉस्पिटल अरिहंत में ले गए ,जहाँ जाते जाते ऑक्सीजन लेवल 53 आ गया,फिर थोड़ी देर बिठाया और एक्स-रे करवाया तब ऑक्सीजन लेवल 63 था. वहाँ भी कोई सुविधा नही मिली, वहाँ से ट्रीटमेंट लिखा के आ गये.अरिहंत हॉस्पिटल ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुये यह भी लिखवा लिया कि रोगी को कुछ भी होगा तो ज़िम्मेदारी परिजनों की होगी .

इसके बाद राजकीय महात्मा गांधी हॉस्पिटल और विजया राजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज भीलवाड़ा लेकर गये .जहाँ पर फेबिफलु की साढ़े चार गोली खिला दी गई ,लेकिन महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भी मना कर दिया .वहाँ भर्ती मरीजो की हालत देखकर भैरू लाल मेघवंशी के दामाद रामस्वरूप और बेटे राजेन्द्र तथा अन्य परिजनों ने निर्णय किया कि पापा को यहां नही रखेंगे भले कुछ भी हो जाये.उन्होंने घर पर ही बचाने के प्रयास करने की बात सोचकर कांदा जाने का निश्चय किया और चल पड़े .अभी सुवाना तक ही पहुंचे होंगे कि राम स्नेही चिकित्सालय से कॉल आ गया कि बेड खाली हो गया है ,आप रोगी को ला सकते हैं .पर सबने घर ही जाना ठीक समझा .

सीधे अपने फार्म हॉउस पहुँच गये।खेत पे आते ही रोगी को प्रोन पोजीशन में सुला दिया और फिर बनाया काढ़ा 3 लीटर पानी मे घटक द्रव्य डाल 1 लीटर रहा तब छान लिया और हर पन्द्रह मिनट में पिलाते रहे. ऑक्सिमीटर की व्यवस्था की गई. जब चैक किया तो लेवल 65 था.थोड़ी उम्मीद जगी . फिर दोनों बेटों ने भैरू लाल मेघवंशी की पीठ पर मसाज थेरेपी स्टार्ट की बिना ऑयल के और ऑक्सिमीटर ऊँगली पर लगा दिया और ऑक्सीजन लेवल देखते रहे.

परिजनों ने पाया कि काढ़ा पीने और मसाज करते रहने से ऑक्सीजन लेवल काफी बढ़ा इससे उनके बेटे राजेन्द्र और दामाद रामस्वरूप मे आत्मविश्वास जगा ,वे मसाज तीन घण्टे तक रेगुलर करते रहे। किसी को भी रोगी के पास नही आने दिया गया .30 अप्रैल को भाप देने की योजना बनायी. मशीन नही होने के कारण इन्होंने कुकर में एक नली लगा सिम्पल सादा पानी को गर्म कर मुँह पर भाप दी .इससे आराम मिला तो दिन में तीन से चार बार ये काम किया .इससे ऑक्सीजन लेवल सोते समय 90 तक आने लगा.फिर 1 मई से इन्होंने कुकर में थोड़ी सी बाम डाल कर भाप दी ये प्रोसेस रेगुलर चलता रहा.


डाइट प्लान में इन्होंने काढ़ा दिन में तीन बार , फ्रूट हर घण्टे में कुछ ना कुछ, निम्बू रस गर्म पानी मे, निम्बू नमक हल्दी डाल कर दिन में तीन से चार बार, हल्दी वाला दूध तीन टाइम,एक अंडा रात को सोते समय दिया .इस दिनचर्या के पालन करने के बाद 5 मई को आधी रोटी खिलायी गई और ऑक्सीजन लेवल आज 6 मई को सोते समय 94 और थोड़ा चलने पर 87 है।

रोगी की निरंतर सेवा में लगे रहे परिजनों राजेन्द्र मेघवंशी ,सीता देवी,राम प्रसाद , रामस्वरूप आदि ने भी अपने शरीर की इम्युनिटी बरकरार रखने के लिए काढ़ा रेगुलर पीना जारी रखा है। इस तरह परिवार जनों ने अस्पतालों द्वारा ठुकरा दिये गये रोगी को घर पर ही सेवा करके ठीक कर दिया ।

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