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डूंगरपुर पहुँची जवाबदेही यात्रा, रैली, सभा और जिला प्रशासन के साथ हुई मीटिंग

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6 महीने से ज्यादा आराम, जो अधिकारी-कर्मचारी नहीं करते काम, उन पर क्यूँ ना हो जुर्माने का प्रावधान – शंकर सिंह 

नेता और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए जवाबदेही क़ानून ज़रूरी है – रोत

जयपुर से शुरू हुई जवाबदेही यात्रा विभिन्न जिलों में हो कर आज ग्यारहवें दिन डूंगरपुर पहुँची, जहां रामरोटी अन्न क्षेत्र से रैली शुरू हुई, जो बस स्टेंड चौराहा पहुँच कर एक नुक्कड़ सभा में बदल गई, वहाँ से ज़िला कलेक्टर कार्यालय पहुँच कर समस्या समाधान शिविर में तब्दील हो गई.


सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने जवाबदेही क़ानून के मुख्य प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह क़ानूनों को लागू करवाने का क़ानून है, यह  सूचना का अधिकार क़ानून का अगला चरण है, उन्होंने न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता बताई. साथ में टीएसपी इलाक़े से सम्बंधित मुद्दों पर बात की। 


जिला कलेक्ट्रेट के सामने हुई सभा को सम्बोधित करते हुए मज़दूर किसान शक्ति संगठन के शंकर सिंह ने बताया कि सरकार के कर्मचारी साल के 365 दिनों में से 192  दिन तो बिना वेतन कटवाए अवकाश ले सकते हैं, इस तरह सिर्फ़ 173 कार्य दिवस ही बनते हैं दिन काम करते हैं। इन काम के दिनों में भी जो काम नहीं करते हैं, उनकी जवाबदेही तय करने के लिए ही जवाबदेही कानून है। उनको सरकार महंगाई भत्ता और बोनस अलग से देती है। जबकि केंद्र सरकार ने नरेगा में  इस साल सिर्फ 1 रुपया मजदूरी का बढ़ाया । राजस्थान सरकार के आय व्यय का ब्यौरा देते 90 हज़ार करोड़ इकट्ठे होते हैं और 85 हज़ार करोड़ तो कर्मचारियों के वेतन-पेंशन में ही चले  जाते हैं, जन हित में खर्च करने के लिए तो धन बचता ही नहीं है। 


लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने अनुसूचित जाति जनजाति की आबादी के अनुपात में बजट के आवंटन और क्रियान्वयन हेतु क़ानून बनाने की माँग की तथा कांकरीडूँगरी प्रकरण के केस वापस लेने की बात पुरज़ोर तरीक़े से उठाई.चौरासी विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजकुमार रोत ने कहा कि नरेगा में जाने वाले श्रमिकों को काम नहीं करने पर पैसा काट लिया जाता है, जबकि विधानसभा में सवाल नहीं उठाने वाले विधायक की कोई जवाबदेही नहीं तय होती है। अगर जवाबदेही का क़ानून होता तो कांकरीडूँगरी जैसी घटनाएँ ही नहीं होती, जो रोज़गार के लिए लड़ रहे थे, उनको 63 मुक़दमे झेलने पड़े और जेलों में ठूँस दिया.सभा को CPI(M) के कॉ. अमृत लाल कलाल, वेलाराम घोघरा आदि ने संबोधित किया। मनीषा फलेजा ने संचालन किया । 

94 शिकायतें दर्ज हुई 
शिकायत डेस्क पर 94 शिकायतें दर्ज की गई, भूमि के पट्टे , वनाधिकार, राशन, पेंशन, पालनहार स्कीम सम्बंधी शिकायतें आई है . ज़िला प्रशासन की तरफ़ से भी दो कार्मिक शिकायत डेस्क पर बैठे और उन्होंने भी लोगों की शिकायतें लिखने में सहयोग किया.


ज़िला प्रशासन के साथ हुई बैठक 
जवाबदेही यात्रा के दौरान आई शिकायतों और डूंगरपुर ज़िले से सम्बंधित अन्य समस्याओं को लेकर ज़िला कलेक्टर के साथ निखिल डे के नेतृत्व में बीस सामाजिक कार्यकर्ताओं की लगभग एक घंटे तक बैठक चली, जिसमें राशन, पेंशन, नरेगा, वनाधिकार, जल, जंगल, ज़मीन सहित विभिन्न मसलों पर चर्चा हुई जिसमें वागड़ मजदूर किसान संगठन, बनेश्वर निर्माण मजदूर संगठन, मुस्लिम महा सभा, विकलांग अधिकार मंच के प्रतिनिधि शमिल हुए । 


कल बाँसवाड़ा जाएगी यात्रा 
यात्रा कल ग्यारह बजे बाँसवाड़ा ज़िला मुख्यालय पहुँचेगी, वहाँ पर भी रैली, जन सभा और समस्या समाधान हेतु शिकायत डेस्क लगाई जाएगी और ज़िला प्रशासन के साथ बैठक होगी

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