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राजसमन्द पहुंची जवाबदेही यात्रा ,मजदूरों की तरह कर्मचारी, अधिकारी और जन प्रतिनिधियों काम नापने की मांग

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हर नागरिक के बहुत से सवाल है जवाबदेही को लेकर उनके जवाब किसी को देने होंगे जब तक कानून पास नहीं हो जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा – निखिल डे 

घुमंतुओं को पट्टे नहीं मिल रहे हैं उन्हें रहने की जगह नहीं मिल रहे है उसके लिए किसकी जवाबदेही है – पारस बंजारा


महिलाओं और पर हिंसा और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी है – शकुंतला पामेचा
 राजसमन्द – 23 दिसंबर-जवाबदेही यात्रा की शुरुआत लोकतंत्र शाला बड़ी का बाडिया में मजदूरों की एक सभा से हुई,जहां पर बड़ी संख्या में मजदूर इकट्ठा हुए और जवाबदेही यात्रा का स्वागत किया और जवाबदेही कानून का पूर्ण समर्थन किया।

 
 बाघाना चौराहे पर हुआ यात्रा का स्वागत और सभा
इसके बाद यात्रा कामलीघाट चौराहे से आगे बाघाना चौराहे पर पहुंची जहां पर राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के साथियों ने पुष्प वर्षा कर यात्रियों का स्वागत किया और यहां पर सभा हुई जिसमें मजदूरों ने अपनी समस्याएं रखी।

 
 पुरानी कलेक्ट्रेट में लगा शिकायत मेला और हुई सभा
राजसमंद जिला मुख्यालय पर पुरानी कलेक्ट्रेट में जवाबदेही यात्रा का मजमा लगा,जहां पर शिकायत मेला लगा जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक आए और उन्होंने अपनी शिकायतें दर्ज कराई और यहां पर सभा हुई जिसमें यात्रा के साथ चल रहे कलाकार साथियों जिसमें पप्पूलाल ने “जवाबदेही कोनी थारा राज में” गीत प्रस्तुत किया।


यहां पर सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह ने कहा कि जवाबदेही कानून सूचना के अधिकार का दूसरा भाग है। हमें सूचना तो मिल जाती है लेकिन उस पर कार्यवाही नहीं होती है। उन्होंने कहा कि इस कानून से सरकारी कर्मचारी, अधिकारी एवं नेता जवाबदेह बनेंगे। 


मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक निखिल डे ने कहा कि अब जवाबदेही कानून की मांग सब जगह से उठ रही है और हमारा ये संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक जवाबदेही कानून नहीं बन जाता।


सभा को पारस बंजारा ने संबोधित किया और कहा कि घुमंतू समुदाय वर्षों से रह रहा है,लेकिन आज तक उनको पट्टे नहीं मिले उनको गांव वाले भगाते हैं। ये किसकी जवाबदेही है कि इनको पट्टे मिले और ये अपने आवास बनाकर रह सकें।


राजस्थान महिला मंच से जुड़ी शकुंतला पामेचा ने कहा कि आज भी महिलाएं घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं और आज महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है महिलाएं आज हर जगह असुरक्षित महसूस करती हैं। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 


दलित संगठनों की ओर से भंवर मेघवंशी ने अनुसूचित जाति जन जाति  विशेष विकास निधि ( आवंटन, क्रियान्वयन एवं उपयोजनाएँ) अधिनियम बनाने की माँग की और लोगों से हाथ खड़े करवा कर समर्थन लिया

पुरानी कलेक्ट्रेट से नए कलेक्ट्रेट तक निकली रैली
सभा के बाद जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया और जवाबदेही कानून और अपने हक लेकर रहेंगे के नारे लगाए।


बरजाल से आई धापु देवी ने कहा कि नरेगा में भुगतान नपती के आधार पर होता है और सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के काम की कोई नपती नहीं है। जब तक इनके नपती की कोई व्यवस्था होगी तब तक हमें धक्के ही खाने पड़ेंगे इसलिए जवाबदेही कानून पास करवाना बहुत जरूरी है। 


 जिला कलेक्टर के साथ हुई बैठक की गई जवाबदेही की मांग
 जिला कलेक्टर अरविंद पोषवाला, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, श्रम कल्याण अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद थे, अभियान की ओर से निखिल डे, शकुंतला पामेचा, याकूब मोहम्मद, पारस बंजारा, भंवर मेघवंशी एवं अन्य साथी शामिल हुए। 


बैठक की शुरुआत सिलिकोसिस पीड़ितों के मुद्दे से हुए जिसमें पूर्व ऑफलाइन प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन किए जाने एवं सहायता राशि दिए जाने के साथ स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के लिए लंबी लाइन है तथा बोर्ड के स्तर पर भी मामले लंबित हैं। इस पर प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन किया जाएगा और सिलिकोसिस प्रभावी इलाकों में शिविर लगाए जायेंगे।

 
इसी के साथ महात्मा गांधी नरेगा में पंचायत समिति भीम की कालादेह, बिलियावास और जस्साखेड़ा में रसीद नहीं दिए जाने तथा केलवा पंचायत समिति में भी रसीद नहीं दिए जाए का मुद्दा उठाया गया जिस पर जिला कलेक्टर सभी जगहों पर रसीद दिए जाने हेतु निर्देश जारी किए जाएंगे। कालादेह में बेरोजगारी भत्ते वाले मामले में सकारात्मक की जाएगी। 


घुमंतुओं को पट्टे वाले मामले में कहा कि चारागाह की गाइडलाइन आते ही जारी करना शुरू कर दिया जायेगा और बाकी जमीन पर बात करके पट्टे जारी करवाए जायेंगे। 


इसी के साथ BOCW श्रमिक डायरी पर भी बात हुई उसके लिए भी विशेष शिविर लगाए जायेंगे। थड़ी ठेले वालों के मुद्दों पर बातचीत हुई और महिलाओं के मामलों में एफआईआर की प्रति ही नहीं मिल रही है ए एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है इस पर भी उन्होंने कहा कि मामले बताए जाने पर पुलिस से बातचीत कर ली जायेगी। 


 कल जवाबदेही यात्रा पाली जिला मुख्यालय पर
कल जवाबदेही यात्रा गौमती चौराहा, देसूरी होते हुये पाली जिला मुख्यालय पहुंचेगी,जहां पर शिकायत निवारण का शिविर होगा और जिला प्रशासन के साथ बैठक की जायेगी, रात्रि विश्राम बाली में होगा

क्या है जवाबदेही क़ानून और क्यों की जा रही है इसकी माँग ?
2018 में काँग्रेस के घोषणा पत्र में यह वायदा किया था जवाबदेही कानून लाएंगे. काँग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्य मंत्री ने राम लुभाया पूर्व आईएएस  अधिकारी के नेतृत्व में समिति बनाई, जिसने कानूनी मसोदा महीने में प्रस्तुत किया,लेकिन आज दिन तक वह कानून को विधान सभा के पटल में पेश नही किया


ज्ञात हो कि यह द्वितीय जवाबदेही  यात्रा 33 जिलों में जायेगी, इस  यात्रा का संयोजन सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान ( एस आर अभियान) कर रहा है जो लगभग 80 सामाजिक आंदोलनों, अभियानों व संगठनों का समूह है। यह भी ज्ञात रहे कि 2015-16 में एस आर अभियान द्वारा राजस्थान के सभी 33 ज़िलों में 100 दिन की पहली जावाबदेही यात्रा निकाली गयी थी।

यात्रा के दौरान अभियान द्वारा लगभग 10,000 शिकायतों का पंजीकरण किया गया जिन्हें राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर भी डाला गया था और उनके पीछा किया गया था। इसके बाद जयपुर में 22 दिन का जवाबदेही धरना लगाया गया और सरकार से तुरंत यह क़ानून पारित करने की माँग की गयी ताकि लाखों लोगों के मूलभूत अधिकारों के हो रहे उल्लंघन को रोका जा सके।

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