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घुमक्कड़ी ही जिनका शौक और पेशा है !

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कम ही लोग मिलेंगे जिन्होंने अपने शौक को ही पेशा बना लिया हो…अधिकतर लोग घर चलाने के लिए कुछ काम करते है लेकिन कोई ऐसा काम करे कि घर भी चल जाए और शौक भी पुरे हो जाये तो उन्हीं लोगों में से एक हैं भीलवाड़ा में रहने वाले घुमक्कड़ मित्र कमल रामवानी जी…

कमल रामवानी ‘सारांश’

अभी पिछले दिनों हिमाचल का सोलो ट्रिप करके लौटे थे तो उनके ट्रिप के अनुभव सुनने की इच्छा थी इसलिए उनके घर ही मिलने जाना हुआ …

3 घंटे तक चर्चाओं का दौर चला और चर्चा लम्बी चलना लाज़िमी ही था क्यों की जब दोनों तरफ घुमक्कड़ हों तो बातें भी कैसे ठहर सकती हैं …

कमल रामवानी जी बताते है कि पहले जूतों के व्यवसाय में हाथ हाजमाया, बिजनेस को बुलन्दी पर पंहुचाया और उससे पैसा भी कमाया लेकिन शायद मन में कहीं संतुष्टि नहीं थी ,बार बार लगता था की शौक है लिखने,पढने ,घुमने-फिरने,खाने-पीने का, शौक है कि खुद चक्कर लगाऊ दुनिया का और लोगों को जूते पहनाकर उनको दौड़ा रहा था, सब कुछ होकर भी कुछ अधूरापन लग रहा था क्यों कि घुमक्कड़ी वाला कीड़ा जो मन में था वो चैन नहीं लेने दे रहा था इसलिए एक दिन निर्णय कर लिया और इस बिजनेस को छोड़ आ गए घुमक्कड़ी का शौक पूरा करने और बन गए कमल रामवानी से कमल रामवानी “सारांश” ….. अभी ‘सारांश टूर एंड ट्रेवल एजेंसी’ चलाते है,खुद भी घूम रहे हैं और लोगों को भी घूमा रहे हैं …..

वैसे भी कईं लोग सिर्फ इसलिए जीवन से असंतुष्ट है कि उनके पास साईकिल है लेकिन बाइक नहीं,बाइक है लेकिन कार नहीं ,कार भी है लेकिन लग्जरी वाली नहीं, घर है लेकिन बंगला नहीं लेकिन क्या कोई सिर्फ इसलिए असंतुष्ट हो सकता है कि वो घुमक्कड़ी नहीं कर पा रहा है ? जी बिलकुल ऐसे ही हैं कमल रामवानी “सारांश” जो अपने स्थापित बड़े व्यवसाय को छोड़ घुमक्कड़ी को ही अपना व्यवसाय बना लिये …..

कमल जी बताते हैं अभी तक सिर्फ ग्रुप के साथ घूमा हूँ लेकिन कईं ऐसे घुमक्कड़ों के यात्रा वृतांत पढ़े और youtube पे वीडियो देखे जो अकेले ही पहाड़ों, बर्फीली वादियों, रेगिस्तानों और दुर्गम इलाकों की ख़ाक छानते हैं ..कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आये जो बहुत सस्ते में देश-विदेश घूम चुके थे..

लेकिन जैसे राहुल सांकृत्यायन ने कहा था कि “आप केवल फोटो देखकर हिमालय के देवदार के गहन वनों और बर्फ से लदे पहाड़ों के शिखर को अनुभव नहीं कर सकते और न ही यात्रा कथाओं से उस बूंद से भेंट हो सकती है जो सिर्फ एक घुमक्कड़ को प्राप्त होती है”

ठीक वैसे ही कमल जी भी उन सब यात्रा वृतान्तों को पढ़, सुन और देख कर चल पड़े अपने पहले सोलो ट्रिप पर हिमाचल ….. हिमाचल के इस ट्रिप पर रिवरडेल,घियाघी, सेंज वेली, मनु मंदिर,शांगढ,कसौल,शिमला टॉय ट्रेन,हिमालय क्वीन ट्रेन का सफ़र किया ….

अपने इस पहले सोलो ट्रिप के अनुभव सुनाते हुए कमल जी बताते हैं की इस ट्रिप ने इतना सिखाया की कैसे अपने मन के वहम को दूर रखते हुयें और तमाम खाने,पीने,सोने,उठने,बैठने की चिंताओं, अकेले सफ़र के खतरे के बेरियर्स को तोड़ते हुए हम बहुत सस्ते और कम सुविधाओं में भी घूम सकते है..

आज तक जिसने वेस्टर्न टॉयलेट का ही इस्तेमाल किया हो और अचानक उसे बिना दरवाजे, बिना लाइट के इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़े …. जो बिना नहाये बाहर नहीं निकलते हो उसको 2 दिन नहाने को ना मिले, जिसको आरामदायक जगह सोने की आदत हो और अचानक ये भी नहीं पता की आज सोने को मिलेगा भी या नहीं और सोने को मिल भी जाए तो ऐसी जगह जहाँ बल्ब तो दूर फोन चार्ज करना भी दूभर हो, खाना भी मोबाइल टोर्च की रोशनी में खाना हो और रात को सोते समय ये सोचकर नींद न आये कि सुबह इंडियन टॉयलेट में कैसे फ्रेश होऊँगा और तो और आपका जाने का प्लान शिमला हो, बस स्टॉप पर शिमला की बस का इन्तजार कर रहे हो और तभी किसी बस में बैठकर कसौल निकल जाओ तो यही है असल घुमक्कड़ी जहाँ पहले से कोई प्लान नहीं ,किसी सुविधा के लिए कोई चिंता नहीं’ बस ऐसे ही झोला उठाकर चल दिए…. 

वैसे भी सांकृत्यायन जी कहते हैं कि “घुमक्कड़ी के लिए चिन्ताहीन होना आवश्यक है और चिन्ताहीन होने के लिए घुमक्कड़ी भी आवश्यक है”…. दिशाहीन घुमक्कड़ी का अपना ही मज़ा है

इस ट्रिप के अनुभव से कमल जी बताते हैं की बहुत कम खर्च करके भी हम ढेरों जगह घूम सकते है,साथ ही कमल जी बताते हैं कि सोलो ट्रिप मतलब केवल अकेले ही नहीं हो, कम से कम आप जैसा ही कोई साथी जरुर साथ हो जो ऐसे ही घुमक्कड़,फक्कड़ स्वभाव का हो …. अकेले में कुछ भी इमरजेंसी हो सकती है,इसलिए बेहतर यही की एक साथी जरुर हो ….

अब कमल जी बताते हैं की वो हर महीने में 5 दिन अपना काम छोड़कर घुमक्कड़ी को देंगें…..

घूमने के साथ-साथ खाने पीने के बड़े शौक़ीन कमल जी जिन जगहों पर जाते है वहां की प्रसिद्ध खाने की चीजों और जगहों को जरुर ढूँढ निकालते है…. घुमक्कड़ी के साथ उनका मकसद खाने-पीने की नयी जगहों को भी लोगों के सामने लाना है और इसी लिए लगातार ब्लॉग (https://bit.ly/2X723IY ) और फेसबुक पर लिखने के साथ-साथ घुमक्कड़ी और खाने को डेडिकेटेड अपना एक youtube चैनल ‘Travelling  Saransh’  (https://bit.ly/2MrpYgt) भी शुरू किया है….. उनके फेसबुक पर लगातार घूमने,खाने पीने की जगहों और वहां के अनुभवों की पोस्टें मिल जाएँगी ….

कमल जी के ही शब्दों में “जब तक जीवन है घूमो फ़िरो आनंद करो…जीवन को काटो मत जीना शुरू करो…इंसान का जन्म शायद एक बार ही मिला है तभी तो कहा है कि ज़िन्दगी मिलेगी ना दोबारा “

सही कहते हैं कमल जी कि असली जीवन का आनंद घुमक्कड़ी में ही है ….

दार्शनिक ऑगस्टीन  ने सही कहा है कि “दुनिया एक किताब है और जो यात्रा नहीं करते वो उसका बस एक पन्ना ही पढ़ पाते हैं”  

(राकेश शर्मा)

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