रिजर्व सीटों पर आप बड़े जेंडर सेंसेटिव हो जाते है ?

केवल आरक्षित सीटों पर ही महिलाओं को प्रतिनिधित्व क्यों ?

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(भंवर मेघवंशी)


यह ट्रेंड अब साफ देखा जा सकता है कि विभिन्न राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट देने का कोटा महज आरक्षित सीटों पर अधिकाधिक महिला उम्मीदवारों को टिकट दे कर पूरा कर रहे है।

यह खतरा वे अनारक्षित सीटों पर नहीं उठाते है,इतने ही महिला समर्थक और लिंग संवेदी हो तो आरक्षित अनारक्षित सब प्रकार के स्थानों पर 33 प्रतिशत महिलाओं को दो टिकट ।

पर महिलाओं की किसे परवाह ? इसलिए सिर्फ लिप सर्विस की जा रही है कि हम महिलाओं के बड़े समर्थक हैं ,देखों हमने टिकट दिया है।

यह प्रयोग सिर्फ आरक्षित क्षेत्रों में ही क्यों ? यह तो कोटा में भी कोटा हो गया ,आरक्षण में भी आरक्षण !

महिला आरक्षण

इसके दो फायदे है ,दलित आदिवासी वर्ग के स्थापित नेतृत्व को राजनीतिक रूप से वनवास भेजना और दूसरा

दलित आदिवासी महिलाओं को मौका देने के नाम पर सिर्फ एक बार टिकट दे कर उन्हें सिर्फ नमूने के रूप में इस्तेमाल करना । बाद में दुबारा मौका नहीं देना,ताकि वे स्वतन्त्र रूप बतौर नेता उभर कर उन्हें चुनोती न दे सके ।

इसलिए इस बार सीधा राजनीतिक दलों से पूछना होगा कि महिलाओं को अधिकाधिक भागीदारी देने का उनका रोड मैप क्या है ?

क्यों नहीं इस बार सभी अनारक्षित सीटों पर 33 फ़ीसदी टिकटें औरतों को ही दे दी जाएं ?

भंवर मेघवंशी

( संपादक – शून्यकाल )

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