आम जन का मीडिया
Women's Sarpanchs shared their experiences

महिला सरपंचों ने साझा किए अपने अनुभव

पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण में मीडिया की भूमिका को लेकर संवाद

जयपुर ,20 दिसंबर, साल 2015 में प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों में शिक्षा की अनिवार्यता योग्यता का नियम लागू किया। इस कारण प्रदेश में कई पढ़ी लिखी महिलाएं सरपंच बनीं। इनमें कई ऐसी महिलाएं भी चुनी गईं जो पहली बार सरपंच बनी हैं। ऐसी ही कुछ महिला सरपंच आज जयपुर में मीडिया से मुखातिब हुईं। मौका था द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान की ओर से आयोजित मीडिया संवाद का.’पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस मीडिया संवाद में प्रदेश के भीलवाड़ा, जयपुर, सिरोही, बारां, राजसमंद व टोंक जिलों से 10 ब्लॉक से 28 महिला सरपंचों ने शिरकत की।

इन महिला सरपंचों ने अपने तीन साल के सरपंच पद के अनुभवों को मीडिया के साथ साझा किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल विवाह, समेकित बाल विवाह सेवाएं पंचायतीराज, स्थानीय स्वशासन के मुद्दों पर किए कार्यों के अनुभवों को बांटा। इन महिला सरपंचों के अनुभवों से पता चलता है कि ये सभी महिलाएं अपनी पंचायतों में निर्माण कार्यों तक ही सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, विशेषकर महिलाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियांवयन में रुचि ले रही है। कोई पंचायत में हो रहे अतिक्रमण को हटा रही है तो कोई बालिकाओं विशेषकर आदिवासी बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ रही है।

सिरोही जिले के रेवदर ब्लॉक के रायपुर पंचायत की सरपंच गीता राव ने कहा कि अपने पिछड़े गांव को मैं अक्सर देखती थी और सोचती थी कि किसी दिन मैं गांव की सरपंच बन गई तो अपने गांव में विकास करवाऊंगी। वर्ष 2015 के पंचायतीराज चुनावों में मुझे यह मौका मिला। पंचायत में गईं तो मैंने बिना घूंघट के बैठक की अध्यक्षता की। मैं राजपूत परिवार से ताल्लुक रखती हूं इस कारण गांववालों ने कहा कि तुम बिना घूंघट के कैसे पंचायत में बैठ सकती हो। इस बात से मेरे परिवार वाले भी खफा हो गए। मेरे पति को भी काफी भला बुरा कहा कि वो मुझे समझाए,पर मैं अपनी बात पर अड़ी रही और बिना घूंघट में ही पंचायत में बैठना शुरू किया। गीता ने बताया कि उन्होंने अपनी पंचायत में 1 करोड़ 40 लाख रुपए का बजट पास करवाकर पुल का निर्माण करवाया। पुरानी पंचायत के भवन को सुधराकर किशोरी संदर्भ केेंद्र बनवाया ताकि किशोरियां वहां आ सके। उन्होंने बताया कि मेरी पंचायत में लड़कियों को उनके परिवार वाले परीक्षा देने गांव से बाहर नहीं भेज रहे थे तो मैं उन्हें अपने साथ लेकर गई और परीक्षा दिलवाई।

बारां जिले के शाहाबाद की सरपंच शारदा ने बताया कि सहरिया समुदाय की मैं पहली महिला हूं जो अपनी पंचायत में पहली बार सरपंच बनी हूं। जब मैं सरपंच बनीं तो पंचायत के दबंग व प्रभावशाली लोग मुझे ताने मारते। कहते तू सहरिया महिला क्या पंचायत पर राज करेंगी। मैंने भी उन्हें कहा कि सहरिया क्या होते हैं, ये मैं आपको बता भी दूंगी। मैंने अपने साथ महिलाओं को लिया और अपना चुनाव प्रचार किया और जीती भी। मैंने अपने क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा। साथ ही सहरिया समुदाय की लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा।

राजसमंद जिले की खमनोर ब्लॉक की कालीवास पंचायत की सरपंच बसंती गमेती ने बताया कि मेरी पंचायत के गांव में आजादी के इतने सालों बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। करीब 250 लोगों की आबादी वाले इस गांव में मेरा घर भी शामिल था। मेरे से पहले के सरपंच ने इस संदर्भ में कोई काम नहीं किया। इस कारण मुझे गांव में बिजली लाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा,पर मैंने बिजली लाकर ही दम लिया। सिरोही जिले के पिंडवाड़ा ब्लॉक की भीमाना ग्राम पंचायत की सरपंच मीरा देवी ने कहा कि हमारे गांव में एक नाला बना है। बरसात के दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस नाले की वजह से मुझे भी कई बार पंचायत में जाने में दिक्कतें होती थी.स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेषानी होती। मैंने इस नाले पर पुल निर्माण के लिए 3 करोड़ 60 लाख रुपए का बजट पास करवाया और नाले पर पुल बनवाया। आज गांववालों को इस समस्या से समाधान हुआ है। अपने कुशल नेतृत्व की वजह से विधायक मद से मीरा इतना बजट लाने में सफल हुई।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़, अपर महानिदेशक, पत्र सूचना कार्यालय , जयपुर ने कहा कि आपकी सफलताएं, आपके विकास के कार्यों को कैसे प्रचार-प्रचार मिले इसके लिए आपको मीडिया की जरूरत पड़ती है। पर आप किसी पर निर्भर रहने की बजाय अपने संसाधन स्वयं तलाशे कि आप अपने इन सफल प्रयासों को कैसे प्रचारित कर सकती हैं। आप अपने कार्यों में नवाचार पैदा करो ताकि मीडिया आपके पास खुद पहुंचे। आप अपने आप को हमेशा अपडेट रखे। आप न केवल स्वयं सशक्त बनो बल्कि अपने गांव को भी सशक्त बनाओ। हर जाति, समूह व वर्ग को साथ लेकर अपनी पंचायत के विकास की बात सोचें। मुख्य वक्ता के तौर पर भागीदारी निभाते हुए डीएनए की ब्यूरो चीफ और राजनैतिक संपादक संगीता प्रणवेंद्र ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकि के इस दौर में आप सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात को पहुंचा सकती है। आपकी खबरों को भले ही टीवी चैनलों में कम स्थान मिलता हो पर आज भी अखबारों की दुनिया में आपकी इन सफलतम कहानियों के प्रकाषित होने की गुजाइश अधिक है पर इसके लिए भी आपको अपने रोजमर्रा के कार्यों की बजाय लीक से हटकर कार्य करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार अमृता मौर्य ने कहा कि आप महिला सरपंच जिन परिस्थितियों से निकल कर काम कर रही हैं वो हमारे काम से भी कहीं ज्यादा है। आप अपने संघर्ष के बलबूते लड़ती हैं। आप अपने तरीकों से अपने नए माध्यम बना सकती हैं आप अपने इलाकों के छोटे समाचार पत्रों व पत्रकारों का साथ ले और अपनी बात को मीडिया तक पहुचाए।

शून्यकाल के संपादक भंवर मेघवंशी ने कहा कि एक दौर था जब मीडिया में केवल सरपंचों से जुड़ी नाकारात्मक खबरें ही आती थीं पर अब वह दौर पीछे छूट गया है। आज मीडिया में महिला सरपंचों की सफलताओं की कहानियां आती हैं जो उनके संघर्ष को दर्शाती है। द हंगर प्रोजेक्ट के कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र श्रीमाली ने मंच का संचालन करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर जानकारी दी।

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