सोशल मीडिया के माध्यम से संगठित हुई महिलाएं

#FightAgainstRape हैशटैग के तहत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन

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कठुआ में एक नाबालिग की बलात्कार के बाद हत्या और बलात्कारियों के समर्थन में सिविल सोसायटी के एक हिस्से के सड़क पर आने से देश भर की न्यायप्रिय जनता चिंतित है. इसी तरह यूपी के उन्नाव में बलात्कार की शिकार नाबालिक लड़की के पिता की जेल में हत्या और विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने में टालमटोल ने भी लोगों को झकझोरा है. ऐसी घटनाएं तमाम राज्यों में हो रही हैं और प्रशासन की ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं.

इससे चिंतित होकर सोशल मीडिया एक्टिविस्ट गीता यथार्थ ने जब #FightAgainstRape हैशटैग शुरू किया और लोगों का आह्वान किया कि सड़कों पर उतरकर इन स्त्री विरोधी और मानव विरोधी प्रवृत्तियों का विरोध करें, तो लोग स्वत:स्फूर्त तरीके से सड़कों पर आ गए. यह एक गैर राजनीतिक आयोजन था और तमाम विचारधाराओं के लोग इसमें आए.

ऐसा ही एक प्रदर्शन दिल्ली के कनॉट प्लेस में 14 अप्रैल को हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. ये लोग शाम से ही कनॉट प्लेस में जुटने लगे और नारे लगाए. उनकी मुख्य मांग थी कि बलात्कार के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से जांच हो और इनका निबटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो. बलात्कारियों के समर्थन में निकलने वाले जुलूसों में तिरंगे के इस्तेमाल पर भी रोक लगनी चाहिए. हर क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की गारंटी करने की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने की.

शाम ढलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने बलात्कार पीड़ित की स्मृति में मोमबत्तियां जलाईं और सड़क पर मार्च निकाला. इस मौके पर महिला एक्टिविस्ट वंदना राग, सावित्रीबाई फुले की कविताओं की अनुवादक अनिता भारती, फुलेवादी कार्यकर्ता इंदिरा सैनी ने भाषण दिया. तमाम वक्ताओं ने महिलाओं से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की.

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