तीस्ता सेतलवाड़ और जावेद आनंद को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

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तीस्ता सेतलवाड़ और जावेद आनंद जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को झूठे केसों में फ़सा कर उन्हें किसी भी तरह जेल में डालने के गुजरात पुलिस के लगातार प्रयास से CJP स्तब्ध है और त्रस्त भी. हालाँकि बॉम्बे हाई कोर्ट के पारगमन ज़मानत दिए जाने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज़मानत की अवधि मई 31 तक बढ़ाने के बावजूद, सत्र न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम ज़मानत को नामंज़ूर करना न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि इस वजह से उनकी जान को भी खतरा हो सकता है.

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं @TeestaSetalvad और जावेद आनंद के अधिकार और आज़ादी खतरे में हैं. आइये इस अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाएं #जंगजारी @cjpindia @sabrangindia https://cjp.org.in/gujarat-police-teesta-javed/

क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

तीस्ता सेतलवाड़ एक पत्रकार और शिक्षाविद् होने के साथ-साथ सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस की सचिव भी हैं और खोज तथा सबरंग की संस्थापक हैं. उनके पति जावेद आनंद, जो खुद एक पत्रकार हैं, न केवल CJP के पदाधिकारी हैं, बल्कि उन्होंने तीस्ता सेतलवाद के साथ सबरंग की स्थापना भी की है. साथ ही वह ‘इंडियन मुस्लिम फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी‘ के संस्थापक सदस्य भी हैं.

2002 में गुजरात में भड़के मुसलिम विरोधी दंगों में इस दंपति ने गुजरात पुलिस के एक भाग के आपराधिक आचरण का पर्दाफाश किया. तब से ही उनके खिलाफ एक ज़हरीला और बदले की मंशा से प्रेरित अभियान शुरू कर दिया गया था. दोनों ने इस दौरान काफी ऐसे शक्तिशाली नेताओं की पोल खोली जिनके अति दक्षिणपंथी संगठनों से गहरे संबंध थे.

हालाँकि तीस्ता सेतलवाड़ 2004 से इस प्रकार प्रताड़ित की जा रहीं हैं, 2015 में उनके पति जावेद आनंद को भी इस बवंडर में खींच लिए गया. जैसे-जैसे नफरत का दौर बढ़ता गया. जो बातें पहले गांधीनगर से निर्धारित की जा रही थी, अब वही नई दिल्ली से व्यवस्थित रूप से की जाने लगी. गुजरात पुलिस, गृह मंत्रालय और CBI, सभी को इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर तैनात कर दिया गया है.

बेबुनियाद आरोप, बेतुकी रणनीतियां

खोज की मानव संसाधन मंत्रालय वाली परियोजना 2010 में शुरू हुई और 2013 में समाप्त हो गयी. जनवरी 2014 में हमारे बैंक अकाउंट एक दुसरे झूठे केस के कारण ज़ब्त हो गए. कथित गबन का सबूत बैंक अकाउंट में है. अगर वही बैंक अकाउंट ज़ब्त हो गए हैं, तो सेतलवाड़ द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़ कैसे संभव है? यह पुलिस द्वारा उनको हिरासत में लिए जाने की महज़ एक चाल है. हवालात में होने वाली पूछताछ सिर्फ पूछताछ तक नहीं सीमित रहेगी और यह एक प्रकार से यातनाओं और यहाँ तक कि मौत का भी निमंत्रण है.

गौरतलब है कि सेतलवाड़ और आनंद ने कभी भी कुछ छिपाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने अपने ख़िलाफ़ सारे आरोपों का सारे सबूतों के साथ जवाब दिया है. उन्होंने अपने खातों की पूरी जानकारी जांच एजेंसियों को दी है.उन्होंने एक-एक जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग किया है और क्राइम ब्रांच के मांगे हुए सारे दस्तावेज़ उनको दिए हैं.सीजेपी और सबरंग सेतलवाड़ और आनंद के खिलाफ लगे सभी झूठे आरोपों का खंडन करते हैं.यह सभी आरोप गलत, बेबुनियाद और सत्य से परे हैं.

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