सुधा भारद्वाज की गिरफ्तारी क्यों ?

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….और आपातकाल किसको कहते है ?
– भंवर मेघवंशी
मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की जा रही है ,देश मे इमरजेंसी से बदतर हालात बनाये जा चुके है । जो भी सत्तारूढ़ दल से असहमत है या राज्य के दमन के खिलाफ है,गरीब की बात करते है ,आम जनता के मुद्दों पर संघर्ष करते है ,ऐसे तमाम जन हितैषी लोगों को फंसाने के लिये एक नया जाल बुना गया है ,जिसका नाम है -शहरी नक्सल ।
शहरी नक्सल की अवधारणा निर्मित ही इसलिये की गई है ताकि जनता के पैरोकारों को शिकार बनाया जा सके ।
शुरुआत भीमा कोरेगांव से हो चुकी है  ,अब छतीसगढ पीयूसीएल की महासचिव, ट्रेड यूनियनिस्ट एडवोकेट सुधा भारद्वाज को दिल्ली से ,झारखंड की स्टेन स्वामी, हेदराबाद से वरावर राव, महाराष्ट्र से अरुण फेरेरा, वर्नन गोंसाल्वेस और दिल्ली से ही गौतम नौलखा के निवास पर अलसुबह से ही छापा मार कर पुलिस ने हिरासत में लिया है।
जानकारी के अनुसार इन सभी पर पुलिस ने  153A, 505, 117, 120B IPC धारा 13,16,17,18,18b, 20, 38,39,40 UAPA धारा लगाई है।
सुधा भारद्वाज अमेरिका में जन्मी ,लंदन में पढ़ी ,कानपुर आई आई टी की टॉपर रही ,वकील बनी और आदिवासियों के मध्य विगत 35 साल से काम कर रही है .
ये सभी लोग। सरकार की जनविरोधी, मजदूर विरोधी, पर्यावरण विरोधी नीतियों के खिलाफ जनता के लिए लगातार संघर्षरत है, जल,जंगल,जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्षरत जनता को पर्यावरणविदों, अधिवक्ताओं, सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके डरावना माहौल बनाया जा रहा है।
इनके निरन्तर बोलने,लिखने और संघर्षरत रहने सेे समय समय पर सरकार का कॉरपोरेट हितैषी चेहरा बेनकाब होते रहा है। इसलिए सरकार उन्हें फर्जी मामलों में फंसाकर कर गिरफ्तार किया है, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
मैं उपरोक्त सभी गिरफ्तार किए गए लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग करता हूँ ।
( संपादक- शून्यकाल डॉटकॉम )

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