आम जन का मीडिया
Why police stopped the peace marches of the Left?

पुलिस ने वामदलों के शांति मार्च को क्यों रोका ?

उदयपुर, 21 दिसम्बर। वामदलों, पी.यू.सी.एल. और लोकतांत्रिक अधिकार एवं सद्भावना मंच की ओर से गुरूवार को टाउन हाॅल से निकलने वाले शांति एवं सद्भावना मार्च को राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस प्रशासन ने रोक दिया।

बताया गया कि वामदलों का एक प्रतिनिधि मण्डल शुक्रवार को उदयपुर जिला कलेक्टर से मिल प्रशासन एवं पुलिस को बिना राजनैतिक दबाव के निष्पक्ष कार्यवाही करने का आग्रह कर उदयपुर में अमन चेन भाईचारे के संदेश को आम जनता तक पहुंचाने के लिए 21 दिसम्बर को शांति मार्च निकालने की स्वीकृति देने का आग्रह किया, जिस पर जिला कलेक्टर ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने में सहमति दी, लेकिन उसके बाद पुलिस प्रशासन ने राजनैतिक दबाव के चलते बुधवार को सोशियल मीडिया से यह मैसेज वायरल करवाया कि शांति मार्च को निरस्त कर दिया गया है, जिससे उदयपुर की आम जनता इस शांति मार्च में भाग ना ले सके। उसके बावजूद वामदलों, पीयूसीएल और लोकतांत्रिक अधिकार एवं सद्भावना मंच के करीब 100 कार्यकर्ता टाउन हाॅल पर प्रातः 11.00 बजे शांति मार्च निकालने के लिए इकट्ठे हो गये तो वहां भारी पुलिस जाब्ते ने इन कार्यकर्ताओं को रैली के रूप में टाउन हाॅल से बाहर निकलने से रोक लिया। उस समय शांति मार्च में भाग लेने उपस्थित हुए कार्यकर्ता ‘भारत मां के चार सिपाही – हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई’ ‘मन्दिर मस्जिद गिरजाघर में बांट दिया भगवान को – धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इंसान को”नफरत नहीं अधिकार चाहिए – शिक्षा एवं रोजगार चाहिए’ ‘राजनीति में धर्म का हस्तक्षेप बंद करो’ भीड़तंत्र के खिलाफ लोकतंत्र के लिए आगे आओ, अमन की रक्षा कौन करेगा-हम करेंगे, अंग्रेजो की बांटो और राज करो की नीति मत अपनाओ, साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद, संविधान जिन्दाबार आदि नारे लगा रहे थे।

इस अवसर पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजवादी चिंतक हिम्मत सेठ ने कहा कि उदयपुर का जिला प्रशासन 14 दिसम्बर को शहर में साम्प्रदायिक व असामाजिक तत्वों को धारा 144 लगने के बावजूद रोक नहीं पाया और उदयपुर के न्यायालय परिसर के मुख्य गेट पर तिरंगे की जगह भगवा झण्डा लहराने दिया, जिससे कानून एवं संविधान पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हुए हैं। इससे साबित होता है कि उदयपुर का प्रशासन एवं पुलिस राजनैतिक दबाव के चलते धार्मिक उन्माद, नफरत एवं हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता है और अपनी ताकत का इस्तेमाल अमनपसंद लोगों के खिलाफ करता है।

सभा को सम्बोधित करते हुए माकपा जिला सचिव मोहनलाल खोखावत ने कहा कि भाजपा के किसी नेता ने 6 दिसम्बर को हुई हत्या की और 14 दिसम्बर को उन्मादी तत्वों द्वारा कोर्ट चैराहे पर की गई घटना की निन्दा नहीं की, इससे साबित होता है कि भाजपा के मंत्री एवं नेता अपने राजनेतिक हितों की पूर्ति के लिए उन्माद, नफरत एवं हिंसा फैला रहे हैं।

सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा (माले) के सौरभ नरूका ने कहा कि हम भगत सिंह एवं डाॅ. अम्बेडकर के विचारों का देश बनाना चाहते हैं, लेकिन साम्प्रदायिक सत्ताधारी ताकतें गोलवलकर व गोडसे के नफरत भरे विचारों का देश बनाना चाहते हैं, जो देश की शांतिप्रिय जनता को मंजूर नहीं होगा।

सभा को सम्बोधित करते हुए माकपा शहर सचिव व पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने कहा कि आज पुलिस प्रशासन ने शांति एवं सद्भावना मार्च को रोक कर संविधान व लोकतंत्र के विरूद्ध कार्यवाही की है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने दबाव के चलते उदयपुर में दहशत का माहौल बनाये रखना चाहते हैं, क्योंकि इससे सत्ता की सारी नाकामियां ढक जाती है।

सभा को भाकपा (माले) के राज्य कमेटी सदस्य शंकरलाल चैधरी, जिला सचिव डाॅ. चन्द्रदेव ओला, सलूम्बर से गौतमलाल मीणा, पीयूसीएल के अश्विनी पालीवाल, माकपा के प्रताप सिंह देवड़ा, गुमान सिंह राव, भेरूलाल बैरवा, मुनव्वर खां, पार्षद राजेन्द्र वसीटा, दामोदर कुमावत, निजाम मोहम्मद, भरत सेन, शमशेर खां, अशफाक मोहम्मद, जनवादी मजदूर यूनियन के डी.एस.पालीवाल, एसएफआई के गणेशलाल रोत आदि ने भी सम्बोधित किया।

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