प्रत्येक भारतीय खुश क्यों नहीं है ?

(बी एल बौद्ध )

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प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को भारतवर्ष में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया जाता है और इस अवसर पर आजादी के लिए अपने प्राणों को बलिदान करने वाले शहीदों को याद किया जाता है एवं एक दूसरे को मिठाई खिलाकर मुबारकबाद दिया जाता है जो कि अच्छी परम्परा है और इस परम्परा को निभाते हुए मेरी ओर से भी आप सबको स्वतंत्रता दिवस पर ढ़ेर सारी बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।

अब बात करते हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रत्येक भारतीय खुश क्यों नहीं है ? इस प्रश्न का जवाब देने से पहले आप सभी से कुछ प्रश्नों का जवाब जानना चाहता हूँ:-

1- आजाद भारत में अपने घर पर अपनी मन मर्जी का भोजन बनाकर खाने मात्र से किसी को मौत के घाट उतार दिया जाता हो तो क्या उसका परिवार स्वतन्त्रता दिवस के दिन खुश होगा ?

2- आजाद भारत में अपने मन पसंद के जूता पहनने मात्र से किसी को जाति के आधार पर मारा पीटा जाता हो तो क्या वह आजादी के दिन खुश होगा ?

3- आजाद भारत में महिलाओं को अपनी मन पसंद के कपड़े पहनने मात्र से उन्हें न्याय दिलाने की बजाय बलात्कार की घटनाओं की वजह बता दिया जाता हो,तो क्या वे आजादी के दिन खुश होंगी ?

4- आजाद भारत में सरकार की ओर से एक दूल्हे को घोड़ी पर बैठने की अनुमति इसलिए नहीं दी जाती है कि SC समाज का दूल्हा घोड़ी पर चढ़ने से शांति भंग हो जाएगी तो क्या वह दूल्हा आजादी के दिन खुश होगा ?

5- आजाद भारत में डॉक्टरी पढ़ने वाले विद्यार्थियों को जानबूझकर परीक्षा में फैल कर दिया जाता है क्योंकि कि वे SC, ST समाज से आते हैं, क्या ऐसे विद्यार्थी आजादी के दिन खुश होंगे ?

6- आजाद भारत में जाति के कारण मन्दिर में प्रवेश करने पर मारा पीटा जाता है और बेइज्जत करके भगा दिया जाता है तो क्या बेइज्जत हुए लोग आजादी के दिन खुश होंगे ?

7- आजाद भारत में संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा फैलाने मात्र से हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकाल दिया जाता है और केंद्रीय मंत्री तक छात्रों के पीछे पड़ जाते हैं जिससें पी एच डी करने वाले होनहार छात्र रोहित वेमुला को अपने प्राणों का बलिदान तक देना पड़ा था क्या रोहित वेमुला की माँ आजादी के दिन खुश होंगे ?

8- आजाद भारत में अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने मात्र से पुलिस की मौजूदगी में २ अप्रैल को निहत्थे युवाओं को ऊंची जाति वालों द्वारा गोलियां चलाकर मौत के घाट उतार दिया जाता है तो क्या उनके परिवार आजादी के दिन खुश होंगे ?

9- आजाद भारत में मात्र एक पशु विशेष को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेजाने मात्र से किसी धर्म विशेष के व्यक्तियों को मौत के घाट उतार दिया जाता हो तो क्या उनके परिवार आजादी के दिन खुश होंगे ?

10- आजाद भारत में मृत पशुओं का चमड़ा उधेड़कर अपनी रोजी रोटी कमाने वाले लोगों को रस्सियों से बांधकर मारा पीटा जाता हो अथवा हत्या कर दी जाती हो तो क्या उनके परिवार आजादी के दिन खुश होंगे ?

11- आजाद भारत में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ ही वर्षों में करीब पांच लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं तो क्या उन किसानों के आश्रित आजादी के दिन खुश होंगे ?

12- आजाद भारत में बालिकाओं का सामूहिक रूप से योन शोषण किया जा रहा है और बड़े बड़े सफेदपोश इस अपराध में शामिल हैं लेकिन सरकारों द्वारा इन अपराधियों को बचाया जा रहा है ऐसे में क्या ये बालिकाएं आजादी के दिन खुश रहेंगी ?

13- आजाद भारत में करोड़ों शिक्षित बेरोजगार दर दर की ठोकरें खा रहे हैं उनका भविष्य चौपट हो गया है क्या ये लोग आजादी की खुशी मनाएंगे ?

14- आजाद भारत में सच्चाई सामने लाने वाले गौरी लंकेश जैसे पत्रकारों को मौत के घाट उतारा जा रहा है एवं सच्चाई बोलने वाले टी वी चैनल्स के सम्पादकों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है ऐसे में क्या वे आजादी की खुशी मनाएंगे ?

15- आजाद भारत में हजारों चोर डाकू और गेंगस्टर खुलेआम घूम रहे हैं लेकिन अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद पर रासुका लगाकर जेल में डाल रखा है क्योंकि वह SC समाज के युवाओं की लड़ाई लड़ रहा था तो क्या उसका परिवार और उसके संगठन के लोग आजादी की खुशी मनाएंगे ?

16- आजाद भारत में टी वी चैनलों के माध्यम से ढोंग पाखंड और अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसके चलते देश की राजधानी दिल्ली जैसी जगह पर भी ग्यारह लोग एक साथ मोक्ष प्राप्ति के चक्कर में आत्महत्या कर लेते हैं तो क्या उनके रिश्तेदार आजादी की खुशी मनाएंगे ?

17- आजाद भारत में मंत्रियों के दोस्त हजारों करोड़ रुपये हड़पकर विदेशों में भगे चले जा रहे हैं और उनके चलते हजारों बैंक कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है क्या इन कर्मचारियों के घरों में आजादी की खुशी मन पायेगी ?

18- आजाद भारत के आंकड़े बता रहे हैं कि इस मंहगाई के दौर में भी SC समाज के 60 प्रतिशत लोग केवल चार से पांच हजार से भी कम रुपयों में पूरे महीने में अपने परिवार को जैसे तैसे करके केवल जिंदा रख पा रहे हैं जिनमें से अधिकतर लोगों के बच्चे या तो स्कूल ही नहीं जाते हैं और कुछ लोगों के जाते भी हैं तो सड़ा हुआ दलिया खिचड़ी खाकर चले आते हैं इनको आजादी और गुलामी में फर्क तक मालूम नहीं है तो क्या ऐसे में वे आजादी की खुशी मनाएंगे ?

19- आजाद भारत में सरकार के द्वारा प्रति वर्ष हजारों स्कूलों को बंद किया जा रहा है और शराब की हजारों नयी दुकानें खोली जा रही हैं जिससे करोड़ों लोगों का जीवन बर्बाद किया जा रहा है तो ऐसे में क्या वे लोग आजादी की खुशी मनाएंगे ?

20- आजाद भारत में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की बजाय ई वी एम के माध्यम से वोटों का घपला किया जा रहा है तो ऐसे में वोटर दुखी भी हैं और गुस्से में भी हैं तो दुखी लोग क्या आजादी की खुशी मनाएंगे ?

21- आजाद भारत में गरीब लोगों को अपने परिवार के सदस्य की डैड बॉडी को घर तक लेकर जाने के लिए एम्बुलेंस तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है और डैड बॉडी को बीस किलोमीटर तक अपने हाथों एवं कंधे पर ढोकर लेजाना पड़ता है तो क्या ऐसे गरीब लोग आजादी की खुशी मनाएंगे ?

22- आजाद भारत में देश की संसद के सामने पुलिस की मौजूदगी में भारत के संविधान को जलादिया जाता है और संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को मुर्दाबाद के नारे लगाकर अपमानित किया गया है जिससे करोड़ों लोग आक्रोशित होकर पूरे देश में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वे गुस्से में भी हैं और दुखी भी हैं ।

केंद्र सरकार की आंखों के सामने देश के संविधान को जला देने के बाद आजादी की खुशी मनाने का कोई तुक ही नहीं बचा है।

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस आजादी का दिन जरूर है और सभी देशवासियों का मन भी इस दिन खुशी मनाने के लिए आतुर रहता है लेकिन सरकार की गलत नीतियों के चलते लोगों की बर्बादी के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लग रहा है, लोग दुखी हैं, मायूस हैं, भयभीत हैं, बेरोजगार हैं, अशिक्षित हैं, अंधविश्वासी हैं लेकिन सरकारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है बल्कि सरकारों की नीति बनगई है कि झूठी भाषणबाजी करते रहो, फर्जी आंकड़े बताते रहो, गरीब जनता को सताते रहो, शराब पिलाते रहो, डराने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराते रहो, जमकर भृष्टाचार करते रहो चाहे किसान मजदूर गरीब आत्महत्या करते रहो।आरक्षण खत्म कर देंगे संविधान को बदल देंगे, मंदिर वहीं बना देंगे बोलकर सवर्णों को गुमराह करते रहो।

यह एक सच्चाई है कि स्वतंत्रता दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए खुशी का दिन तो है लेकिन प्रत्येक भारतीय स्वतंत्रता दिवस के दिन खुश नहीं है।

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