मांडलगढ़ से इस बार कोई भील उम्मीदवार क्यों नहीं ?

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– भंवर मेघवंशी

विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष….

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 48 प्रतिशत मतदाता अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के है ।

यह इलाका विजयसिंह पथिक के किसान आंदोलन का है,यहां नानक भील के संघर्ष की भले ही इतिहास ने उपेक्षा की हो,लेकिन सबसे ज्यादा संख्या में वोट भील समुदाय के है ।

मांडलगढ़ में भील मतदाता 50 हजार से ज्यादा है ,लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने आज तक इस समुदाय को टिकट देने के बारे में नहीं सोचा ,यहां तक कि बसपा ने भी नहीं ।

जो समुदाय 15 हजार है ,उसके सदस्य को भाजपा का टिकट मिला और कांग्रेस ने 35 हजार वाले समाज को बागडोर यह कहते हुए सौंपी कि वो सबसे बड़े मतदाता समूह का प्रतिनिधित्व करते है ।

इस बार दलित आदिवासी एवं घुमन्तू अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) ने कमर कस ली है कि मांडलगढ़ की सीट आदिवासी समुदाय के लिये मांगी जायेगी ,अगर कोई दल टिकट नहीं देगा तो आदिवासी समाज का एक आज़ाद उम्मीदवार उतारा जायेगा ।

आखिर वोट हमारा राज तुम्हारा कब तक चलेगा ? कब तक आदिवासी समाज को उनके हक से वंचित करोगे ? बोलो कांग्रेसियो क्या कहते हो ? भाजपाईयों बताओ ,दोगे क्या किसी भील को टिकट ? शायद बसपा तो दे ही दे ?

आज ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के मौके पर किसान आंदोलन की धरती बिजौलिया मांडलगढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों के आदिवासी और दलित युवाओं ने यह मांग उठाकर राजनीतिक दलों को सकते में डाल दिया है !

सही किया ना ?

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