सब चुप क्यों है…बेबस क्यों है ?

सरदार पटेल की मूर्ति !

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 (प्रो. विवेक कुमार)

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vivek kumar

मूर्ति किसकी है यह महत्त्वपूर्ण नही है; मूर्ति लगा कौन रहा है यह ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है.अगर सवर्ण समाज के वर्चस्व का कोई नेता मूर्ति लगाएगा तो उसे मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवी महिमा मंडित करेगे. टीवी एंकर उस मूर्ति का महत्व रेखांकित करेंगे जैसे मूर्ति तो फ्री में आई है. ज़मीन कैसे और किससे अधिग्रहित की गयी या पारिवर्ण का कितना नुकसान हुआ

कितने पेड़ कटे किसी पर भी कोई बहस नही होगी……यही तो है भारतीयों का दोहरा मापदंड.

मुझे याद है जब बहनजी ने बहुजन समाज सुधारको की मूर्ति लगवाई तो अर्नब, राजदीप, आदि हिन्दी एवं अँग्रेज़ी टीवी पर कोहराम मचा देते थे….और कहते थे की कर दाताओं का पैसा खराब हो रहा है I अब सब चुप क्यों है. कोई यह क्यों नही बताता की तीन हज़ार करोड़ में ग़रीबों के लिए कितने अस्पताल बन जाते ? कितने स्कूल बन जाते ? कितने कारखाने लग जाते ? मूर्ति लगाने के कार्यक्रम पर अख़बारों में दिए गये विज्ञापनों पर हुए खर्च रुपयों से कितने भूखे लोगों को रोटी मिल जाती? कितने बेघर लोगों के लिए घर बन जाते ? आदि …आदि…पर समझ में नही आ रहा है की हमारा मीडिया एवं बुद्धिजीवी इस द्रष्टिकोण से बहस क्यों नही कर रहे है ? आप सब को समझना होगा की जो बहुजन समाज के लोग मा. बहनजी के समय मूर्तियों के विषय में प्रश्न पूछ रहे थे, वे प्रश्न उनके नही बल्कि सवर्ण वर्चस्व वाली मीडिया एवं राजनैतिक पार्टियों के थे. एवं विश्वविद्यालय के बुद्धिजीवियों के थे; जो की बहुजनो के लिए सवर्णो का एजेंडा बहुजन को कंफ्यूज करने के लिए कर रहे थे I और आज भी बहुजन आंदोलन के साथ ऐसा होता है. जरा सोचिए कहीं आप दूसरों के प्रश्न बहुजनों से तो नही पूछ रहे है? नही तो आज आप गुजरात में लगी मूर्ति के विषय में भी वही सब प्रश्न पूछते जो उस समय उ.प्र. में लगी हुई मूर्तियों के बारे में पूछते थे.

(ये लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार है )

लेखक –प्रो. विवेक कुमार 

(लेखक जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के चेयरपर्सन हैं)

 

(फोटो क्रेडिट-इन्टरनेट)

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