मीना जनजाति पर हिंदू एक्ट क्यों लागू नहीं होते?

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राजस्थान हाई कोर्ट ने पिछले दिनों एक प्रकरण का निस्तारण करते हुए स्पष्ट आदेश दिये हैं कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के प्रावधान मीना जाति पर लागू नहीं होंगे। इसके ठीक विपरीत मीना जाति के अधिकतर राजनेता और उच्च पदस्थ अधिकारी भी हिंदुत्व, हिंदू धर्म और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे हिंदू संगठनों के लिये काम करते देखे जा सकते हैं। अत: हाई कोर्ट के निर्णय के कारण जहां एक ओर हिंदू समुदाय में मीना जनजाति को लेकर संदेह पैदा हो गया है, वहीं दूसरी ओर खुद को हिंदू मानने वाले मीना समुदाय के लोगों में भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर इस बारे में गर्मागरम चर्चाओं का दौर जारी है।

मीणा समुदाय सहित वंचित समुदायों के हितों के लिये कार्यरत हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ का इस बारे में कहना है कि – संविधान लागू होने से पहले भारत के आदिवासियों की जनगणना हिंदूओं के रूप में नहीं करके, पृथक से आदिवासी के रूप में की जाती थी, क्योंकि आदिवासियों के पूर्वज मूलत: कभी भी हिंदू नहीं थे।

डॉ. ‘निरंकुश’ आगे बताते हैं कि यही वजह है कि संविधान लागू होने के बाद संसद द्वारा बनाये गये हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 तथा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 2 की उप धारा 1 और हिन्दू अप्राप्तवयता संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उप धारा 1 में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि ये सभी हिंदू अधिनियम केवल हिंदुओं पर ही लागू होंगे। इन अधिनियमों की उक्त उप धाराओं के तहत स्पष्टत: वीरशैव, लिंगायत, ब्रह्मसमाज, प्रार्थना समाज, आर्यसमाज, बौद्ध, जैन, सिक्ख सम्प्रदायों अथवा धर्मों के अनुयाइयों को हिंदू माना गया है। जबकि इसके ठीक विपरीत हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 तथा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 धारा 2 की उप धारा 2 और हिन्दू अप्राप्तवयता संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उप धारा 2 में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि ये सभी हिंदू अधिनियम भारत की अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे। जिसका सीधा और साफ मतलब है कि आदिवासी/जनजातियां हिंदू नहीं हैं।

डॉ. ‘निरंकुश’ आगे कहना है कि इसी कारण अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल राजस्थान की मीना जनजाति सहित किसी भी जनजाति पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता है। यही वजह है कि मीना जनजाति सहित किसी भी जनजाति के वैवाहिक मामलों में हिंदू कानूनों के तहत कोर्ट को किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने या आदेश जारी करने का वैधानिक हक नहीं है।

डॉ. ‘निरंकुश’ से यह पूछे जाने पर कि मीना जाति के जो लोग आदिवासी परम्पराओं को छोड़कर, हिंदू रीति से विवाह करते हैं, क्या उनके जनजाति की सूची में बने रहने पर कानूनी तौर पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं, डॉ. ‘निरंकुश’ कहते हैं कि हां ऐसा खतरा हो सकता है। बल्कि कुछ संगठन इस तरह की आवाज भी उठाने लगे हैं। अत: आदिवासियों के वर्तमान वंशज मीनाओं को इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है।

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