मनुवादियों के झाडू लगाने से वाल्मिकी समाज परेशान क्यों ?

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– डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल

राजस्थान के निकायों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती के सामान्य वर्ग (मनुवादी) के लोगों ने भी निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करते हुए (सफाई करने का अनुभव प्रमाणपत्र के साथ) आवेदन किया था। और कई व्यक्तियों को सफाई कर्मचारी के पद पर सरकार ने नियुक्ति भी दी. सफाई कर्मचारी के दायित्वों के अंतर्गत वे लोग रोड़, गली, मोहल्लों में सफाई कार्य कर रहे हैं। बस यही परेशानी हो गई वाल्मिकी समाज को.

गत कुछ दिनों में वाल्मिकी समाज के लोग सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा सफाई कार्य करते हुए विडियो बनाकर बात करते हुए कि अरे तुम लोग झाडू लगा रहे हो तुम्हारे घर वाले रिश्तेदार समाज वाले क्या कहेंगे.
यह परेशानी वाल्मिकी समाज को क्यों है, वो लोग झाडू लगा रहे हैं तो लगाने दो, उनकी चिंता क्यों ?

1- जब हम कहते थे कि ‘मोहल्ले में झाडू लगाकर दिखाओ’ वो लगा रहे हैं ?
2- वाल्मिकी समाज का व्यक्ति पढ लिख कर शिक्षक बन रहा है तो कोई आपत्ति कर रहा है ? कोई कह रहा है कि पढ़ाने का काम तो हम सदियों से कर रहे हैं, पढ़ाने का अनुभव हमारे पास है.
3- सामान्य वर्ग का सफाई कर्मचारी यदि झाड़ू लगाने का काम नहीं करके कुछ और काम करता है तो इसके लिए भी दोषी कौन है,
सफाई कार्य अनुभव प्रमाण पत्र किसने दिया ?

झाड़ू लगाने का काम हम ही करेंगे हम सदियों से करते आ रहे हैं, तो यही बात सामने वाला भी तो आपसे कह सकता है कि ‘पढ़ाने का काम हम ही करेंगे’.
आप सोचिए अब आपके पास यह भी नहीं बचा कि “झाडू तुम लोग लगाकर दिखाओ” वो झाडू लगा रहे हैं.
यह प्रश्न:- क्या हम जन्मजात झाडू पकड़े ही रहना चाहते हैं ?

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