दिशाहीन क्यों हो रहे है बहुजन समाज के युवा ?

- बी एल बौद्ध

378

बहुजन समाज के युवाओं में मिशन के प्रति जोश और जुनून तो दिख रहा है लेकिन वे दिशाहीन होते जा रहे हैं ? आजकल एक बहुत ही अच्छी बात यह देखने को मिल रही है कि जहाँ पर भी जुल्म, अत्याचार, भेदभाव या महा पुरुषों के अपमान की घटनाएं घटती हैं उनका विरोध करने के लिए आज का युवा सीना तानकर वहां पहुंच रहा है यह बहुत बड़ी बात है इससे यह जाहिर होता है कि आज का युवा संघर्ष करने को बिलकुल तैयार है।

बाबा साहेब अंबेडकर ने भी अपने सन्देश में संघर्ष करने की बात कही थी लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा था कि संघर्ष केवल युवा वर्ग को ही करना है।बाबा साहेब अंबेडकर तो सबसे पहले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को झकझोरते थे।आज का युवा जागरूक तो है लेकिन साथ में बेरोजगार भी है और बेरोजगार युवाओं की कुछ मजबूरियां होती हैं लेकिन जो लोग रोजगार पा चुके हैं वे संघर्ष से बहुत दूर जा चुके हैं, सरकारी कर्मचारी कहते हैं कि हम लोग सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं ये बिलकुल सही बात है लेकिन उसके लिए रणनीति तो तैयार कर सकते हैं, कोई भी आंदोलन करने में धन की जरूरत पड़ती है उसमें सहयोग कर सकते हैं विचारों का आदान प्रदान करना पड़ता है इसलिए युवाओं को अपने विचारों से मार्गदर्शन दे सकते हैं।

हम यह जानना चाहते हैं कि कितने अधिकारी और कर्मचारी हैं जो आज युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं या फिर कोई रणनीति तैयार कर रहे हैं या युवाओं की आर्थिक मदद करते हैं, सरकारी कर्मचारियों को ये सब करने के लिए कौन मना करता है,कौन कहता है कि आप लोग धरना प्रदर्शन करो, लेकिन जब युवा इतना कर रहे हैं तो हम सबका फर्ज बनता है कि हम भी किसी भी तरीके से संघर्ष में अपनी भूमिका अदा करें।

आज हमारे युवाओं में जोश और जुनून तो काफी है लेकिन आज का युवा दिशाहीन दिखाई दे रहा है,संघर्ष करने की उनके पास रणनीति नहीं है जिसके चलते रोज उन पर धड़ाधड़ मुकदमे दर्ज हो रहे हैं और समाज उनका साथ नहीं दे पा रहा है।अभी कुछ ताजा घटनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है जो राजस्थान प्रदेश में घटित हुई हैं।

पहली घटना सीकर जिले में गोरधनपुरा गाँव की है जहां 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ब्राह्मण समाज के अध्यापक ने बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर को नहीं रखने दिया यानी कि ब्राह्मण अध्यापक ने बाबा साहेब अंबेडकर का सीधा सीधा अपमान किया और उस अध्यापक को सजा दिलाने के लिए हमारे युवा सड़कों पर उतर चुके हैं जिसके कारण उन पर दो दो जगह मुकदमे दर्ज हो चुके हैं जिसमें एक तो स्कूल प्रशासन ने राजकार्य में बाधा उत्पन्न करने का दर्ज कराया है तो दूसरा सीकर रैली के दौरान सड़क जाम करने पर जिला प्रशासन ने दर्ज कराया है और बड़े अफसोस की बात है कि गोरधनपुरा गांव के लोग इन युवाओं का बिलकुल भी साथ नहीं दे रहे हैं।

दूसरा मामला भी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान स्कूल में दिये जा रहे सामूहिक भोज को SC समाज के विद्यार्थियों द्वारा परोसने से रोकने संबंधित है जो कि जयपुर जिले की फागी तहसील अंतर्गत दोरसा गाँव का है वहाँ पर भी उस गाँव के लोग संघर्ष कर रहे युवाओं के साथ नहीं हैं बल्कि युवाओं के विरोध में उतर आए हैं.जहां पर भी देखो युवा अकेले पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी वजह से आज का युवा दिशाहीन दिखाई दे रहा है इसलिये हम सब इस गम्भीर मसले पर विचार करें और हमारे युवाओं का मार्गदर्शन करें और उनको विश्वास दिलाएं की आप आगे बढ़ो हम सब तुम्हारे साथ हैं । आज हमारी महिलाएं कोई आन्दोलन नहीं कर रही हैं जबकि क्षत्राणियों को तलवारों के साथ आन्दोलन करते हुए पूरे देश ने देखा है।

हमारे किसान और मजदूर भी संघर्ष से कोसों दूर हैं क्योंकि उनके लिए तो पापी पेट का सवाल है, भूखे पेट कोई भी संघर्ष नहीं होता है।कुछ मिशनरी लोग हैं जो कि स्वेच्छिक सेवा निवृत्त होकर या सरकारी मुलाजिम होते हुए भी काफी चिंतन मनन करते हैं और युवाओं के साथ खड़े नजर आते हैं।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत की आजादी का आन्दोलन 90 वर्षों तक चला था और आज फिर उसी आजादी के लिए संघर्ष शुरू हो चुका है जो कि एक दिन में या कुछ वर्षों में कामयाबी हासिल होने वाली नहीं है और ये संघर्ष अकेले युवाओं का संघर्ष नहीं है इसमें हम सबको अपने स्तर पर भूमिका निभानी होगी।इसके लिए बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाई गई ठोस रणनीति पर अमल करना होगा यानी कि इसके लिए समाज को जागरूक और शिक्षित करना पड़ेगा, संगठित करना होगा और संविधान के दायरे में रहकर संघर्ष करना होगा। 1857 से लेकर 1947 तक जो आजादी की जंग लड़ी गई थी उसमें भी नरम दल, गर्म दल, हिन्द सेवा दल इत्यादि ने अपने अपने तरीके से काम किया था,आज उसी प्रकार हमें निम्नलिखित विंग बनाकर संघर्ष करना होगा।

1, भारतीय संविधान घर घर पहुंचाओ अभियान।

2, बहुजन समाज के महापुरुषों की विचारधारा घर घर पहुंचाना फर्ज हमारा।

3, हमारा टारगेट हर युवा और युवती हो ग्रेजुएट।

4, निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाओ,शिक्षा बढ़ाओ।

5, कर्ज मुक्त समाज बनाओ, समाज की लाज बचाओ।

6, न कोई झंझट न कोई खर्चा,
दरी बिछाओ शुरू करो ज्ञान चर्चा।

7, हर महीने की 14 तारीख को सायंकाल 5 बजे से 9 बजे तक मिशनरी भजन, कविता, गीत संगीत के माध्यम से ’14 की शाम बाबा साहेब के नाम’ अभियान।

इसप्रकार अनेकों तरीकों से हमें संघर्ष करना होगा और इनमें कर्मचारी व अधिकारी ज्यादा से ज्यादा अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
ध्यान रहे की संघर्ष का मतलब केवल धरना प्रदर्शन ही नहीं होता है।सबसे बड़ा संघर्ष अपने आप से करना होगा यानी कि नशे का त्याग करना होगा, अपने घमंड और गुस्से को छोड़ना पड़ेगा,अपने को समाज से जोड़ना पड़ेगा।समाज का कोई गुमराह व्यक्ति यदि टूटे हुए जूतों की माला भी पहना देता है तो फूलों की माला समझकर उसे माफ करना होगा,अपने मन को अंदर से साफ करना होगा।

आओ मिलकर कदम बढ़ाएं-बाबा साहेब अंबेडकर के मिशन को घर घर पंहुचाएं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.