हिन्दू राष्ट्र के लिए अपने हाथ गंदे क्यों कर रहे है दलित ?

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गोआ में 100 हिन्दुवादी संगठनों के सम्मलेन में भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के बजाय हिन्दू राष्ट्र बनाने की प्रबल मांग की गयी है, देश भर में जगह-जगह पर हिन्दू राष्ट्र के फलां-फलां शहर में आपका स्वागत है, जैसे बोर्ड दृष्टिगोचर होते है.

आज केन्द्र में जो सत्तासीन जमात है वह नागपुरी है, नागपुर को इस देश का चरित्र हिन्दुत्ववादी करने की वैसे भी बड़ी जल्दी है, हर संभव कोशिश है कि जितना जल्दी हो,इस राष्ट्र को हिन्दु राष्ट्र बना दिया जाये.

देखने में आ रहा है कि संघ समुदाय ने हिन्दू राष्ट्र के हरावल दस्ते में भूतपूर्व शूद्रों व अछूतों तथा वर्तमान पिछड़ों व दलितों की बड़े पैमाने पर भर्ती की है, ये अजा,जजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की सेना बिना सिर का इस्तेमाल किये नागपुरी आकाओं के इशारे पर अपने हाथ पाँव चला रहे है .

राजस्थान में हाल ही में कुछ साम्प्रदायिक व जातिवादी कुकृत्यों में दलितों की शर्मनाक भागीदारी उजागर हुयी है . चुरू जिले के तारानगर में राजकुमार सहारण नामक युवक को प्रेम करने की निर्मम सज़ा दलितों द्वारा दी गयी, जातिवाद से सर्वाधिक पीड़ित दलित समुदाय का यह घनघोर निन्दनीय जातिवादी हिंसक कृत्य था, अच्छा हुआ आरोपी दरिन्दे पकडे गए .

दूसरी घटना नागोर जिले के श्री बालाजी थाना क्षेत्र के अलाय कस्बे में एक विक्षिप्त महिला को जबरन जय श्रीराम, जय बालाजी जैसे धार्मिक नारे लगवाये, बर्बरतापूर्वक पीटा और अपनी इस मर्दानगी (?) का विडियो बनाकर वायरल किया . इस कृत्य के आरोपी भी श्रवणराम और प्रकाशराम दोनों ही दलित है .

तीसरी घटना दक्षिण राजस्थान की है जहाँ पर भाकपा (माले) से जुड़े कामरेड जफ़र हुसैन की सफाई कर्मचारी समुदाय के दलितों ने पीट पीट कर हत्या कर दी .कामरेड जफ़र ने महताब शाह कच्ची बस्ती में सफाई कर्मियों द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौच जाती औरतों का पीछा करने तथा उनकी शौच के वक़्त की फ़ोटो लेने का विरोध किया, जिसकी कीमत उन्हें जान देकर चुकानी पड़ी . इस हत्या में नगर पालिका चेयरमेन अशोक जैन को छोड़कर शेंष सभी दलित ही आरोपी है . यह मामला राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी का विषय बना हुआ है .

बांसवाडा में हाल ही में हुए साम्प्रदायिक घटनाक्रम की बात हो अथवा भीलवाडा में हो रही साम्प्रदायिक मुठभेड़ें, हर जगह उसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ दलित व आदिवासियों का इस्तेमाल तथा उनकी सुनिश्चित भागीदारी शर्मनाक स्तर तक पंहुच चुकी है .

गुजरात में 2002 में हुए अल्पसंख्यको के एकतरफा कत्लेआम में भी दलित आदिवासियों की भारी मौजूदगी और भूमिका रही थी, राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के हर हिस्से में दलित युवा जातिवादी और साम्प्रदायिक गतिविधियों में बड़े पैमाने पर शिरकत कर रहे हैं .उनकी यह साम्प्रदायिक भागीदारी हिन्दु राष्ट्र की तरफ बढ़ते भारतीय गणतंत्र की चाल को और तेज ही करेगा लेकिन इस हिन्दू राष्ट्र का फायदा किसे होगा ?

सोचना पड़ेगा कि कल इस नागपुरी हिन्दु राष्ट्र में इन दलितों का स्थान क्या होगा ? क्या वे शीर्ष पर होंगे ? बराबरी पर होंगे अथवा वहां होंगे जहाँ इनके पुरखे थे ? क्या गले में हंडिया और कमर पर झाड़ू लटकाए लोग नए अंदाज़ में दिखेंगे ? इस बार गले में टाई और पीठ पर शायद लेपटॉप बंधा होगा , पर इनके सिर में वे भूषा भर देंगे, न सोचने देंगे और ना ही बोलने देंगे .

इन्तजार कीजिये , हिन्दू राष्ट्र के गुलामों की नयी पौध तैयार हो रही है …!

भंवर मेघवंशी

(संपादक-शून्यकाल)

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