बाबा साहेब अंबेडकर की अंतिम इच्छा क्या थी ?

- बी एल बौद्ध

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वैसे तो जीवन में इच्छाओं को पूरा नहीं किया जा सकता है लेकिन जो लायक औलादें होती हैं.वे अपने माता पिता,गुरू अथवा महापुरुष की अंतिम इच्छा को जरूर पूरा करने का प्रयास करती हैं।बाबा साहेब अंबेडकर के पुत्र की जिस दिन मृत्यु हुई थी,उसी दिन बाबा साहेब को गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन रवाना होना था,लोगों ने बाबा साहेब अंबेडकर से कहा कि-आज आपके पुत्र की मृत्यु हुई है,आज आपके लिए शोक दिवस है,इसलिए लन्दन की यात्रा को रद्द कर दिया जाना चाहिए. इस पर बाबा साहेब अंबेडकर ने अपने रिश्तेदारों को जवाब दिया कि आज मेरा एक पुत्र मरा है लेकिन यदि मैं आज लंदन के लिए रवाना नहीं हुआ तो मेरे करोड़ों पुत्र मारे जाएंगे इसलिए मैं एक पुत्र का शोक मनाने के लिए करोड़ो पुत्रों की बलि नहीं चढ़ा सकता हूँ और बाबा साहेब अंबेडकर अपनी पत्नी को रोते बिलखते छोड़कर हमें अधिकार दिलाने के लिए उसी दिन लंदन के लिए निकल पड़े।

उस महान बाबा साहेब की अंतिम इच्छा क्या थी एवं उसे हम लोग कैसे पूरा कर सकते हैं.यदि हम लोग अपने को लायक समझते हैं तो जरूर इस पर विचार करना चाहिए।बाबा साहेब अंबेडकर की अंतिम इच्छा के बारे में जब चर्चा करते हैं तो कोई कहता है कि वे समाज को राजा बनाना चाहते थे,दूसरा कहता है कि वे समाज में अधिक से अधिक आईएएस, आईपीएस,जज, डॉक्टर, इंजीनियर एवं वकील बनाना चाहते थे, तीसरा कहता है कि वे भारत को बौद्धमय बनाना चाहते थे।लेकिन वास्तव में बाबा साहेब की अंतिम इच्छा थी कि मेरे समाज के सभी लोग अच्छे आदमी बनें।वैसे तो कोई भी व्यक्ति अपने को अच्छा ही समझता है लेकिन बाबा साहेब की नजरों में अच्छा आदमी उसे ही कहा जाता है जिसमें निम्नलिखित पांच गुण पाये जाते हैं:-

1- बिना किसी ठोस कारण के लड़ाई झगड़ा नहीं करता हो।

2- बिना अनुमति के किसी की कोई वस्तु नहीं लेता हो या चोरी नहीं करता हो।

3-व्याभिचार नहीं करता हो अथवा अनैतिक सम्बंध नहीं बनाता हो।

4-झूठ नहीं बोलता हो या बेवजह फालतू की बकवास नहीं करता हो।

5- कच्ची पक्की शराब या किसी भी प्रकार का कोई नशा नहीं करता हो।

यदि बहुजन समाज का कोई भी व्यक्ति बाबा साहेब अंबेडकर की अंतिम इच्छा पूरी करना चाहता है,तो अपने जीवन को इन पांच गुणों के अनुसार ढालते हुए अच्छा आदमी बनकर दिखाये।

यदि आपमें उपरोक्त 5 गुण नहीं हैं तो बेशक आप मंत्री, आईएएस, आईपीएस, जज, डॉक्टर, इंजीनियर,वकील या अन्य कुछ भी बन जाओ, बाबा साहेब अंबेडकर की नजरों में आप अच्छे आदमी नहीं हैं।

बाबा साहेब ने अच्छे आदमी का यह पैमाना तथागत बुद्ध से लिया था और 14 अक्टूबर 1956 विजय दशमी को नागपुर में अपने स्वयं के द्वारा निर्धारित की गई 22 प्रतिज्ञाओं में भी इस पैमाने को समाहित किया था।

यदि आप अच्छे आदमी से भी बढ़कर बहुत ज्यादा अच्छे आदमी बनना चाहते हो तो बाबा साहेब अंबेडकर की पूरी 22 प्रतिज्ञाएं अपने जीवन में अपना सकते हैं।

बहुजन समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बाबा साहेब अंबेडकर की अंतिम इच्छा पर जरूर ध्यान देना चाहिए और पांच गुणों के पंचशील को अपने जीवन में उतारकर अच्छा आदमी बनने का प्रयास करना चाहिए।

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