समता सैनिक दल (बाबा साहेब अंबेडकर की फौज) के स्वर्णिम इतिहास पर हम सबको गर्व है !

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– प्रदेश उपाध्यक्ष
समता सैनिक दल
राजस्थान प्रदेश.

बाबा साहेब अंबेडकर की फौज,समता सैनिक दल के इतिहास को जानना एवं समझना बहुत जरूरी है ।
बात उस वक्त की है जब बाबा साहेब अंबेडकर अमेरिका और लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत वापिस आकर अपने आपमें चिंतन और मनन कर रहे थे कि अब मुझे क्या करना चाहिए ?
गहन सोच विचार के बाद निर्णय लेते हुए बाबा साहेब ने अपना लक्ष्य निर्धारित किया कि सदियों से भारत में जातियों के आधार पर जो असमानता फैली हुई है उसको मैं खत्म करके रहूँगा एवं केवल खत्म ही नहीं करूँगा बल्कि असमानता को समता में बदलकर रहूँगा ।

अपना लक्ष्य निर्धारित करने के बाद बाबा साहेब ने अपने लक्ष्य को पूरा करने की योजना बनाना शुरू कर दिया ।
बाबा साहेब अम्बेडकर जब अपनी योजना बना रहे थे उस वक्त अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग लड़ी जा रही थी जिसमें गांधीजी एवं सुभाषचंद्र बोस कॉंग्रेस के माध्यम से अपनी बात अंग्रेजों तक पहुंचा रहे थे तो दूसरी तरफ मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग के माध्यम से लड़ रहे थे ।

बाबा साहेब अंबेडकर को भी स्थिति भांपते हुए देर नहीं लगी इसलिए उन्होंने भी सोच लिया कि अंग्रेजों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मुझे भी अपनी फौज खड़ी करनी पड़ेगी
लेकिन मेरी लड़ाई तो गोरे अंग्रेजों से भी ज्यादा आर्यों द्वारा स्थापित जातीय असमानता को मिटाकर समता स्थापित करने की है इसलिए मुझे एक ऐसी फौज खड़ी करनी होगी जो सामाजिक समता स्थापित करने में मेरी मददगार साबित हो, इसके लिए बाबा साहेब ने कई दिनों तक गम्भीररूप से सोच विचार किया और अंत में २४ सितंबर १९२४ को अपनी स्वयं की एक फौज खड़ी करने की घोषणा की एवं अपनी इस फौज का नाम समता सैनिक दल रखा गया ।

इसके तुरंत बाद ही बाबा साहेब अंबेडकर ने समता सैनिक दल के लिए भर्ती कमांडर नियुक्त किए एवं उन कमांडर्स ने हजारों युवाओं को समता सैनिक दल में भर्ती किया व बाबा साहेब अंबेडकर के दिशानिर्देशानुसार उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया गया ।

प्रशिक्षण के लिए सभी भीम सैनिकों को प्रातः करीब साढ़े चार बजे उठकर नित्यकर्म के बाद पांच बजे ट्रेनिंग ग्राउंड में एकत्रित होकर थोड़ा दौड़ लगाने के बाद शारीरक व्यायाम करवाया जाता था और उसके बाद उनको मिशन के बारे में कैडर दिया जाता था ।

बाबा साहेब की फौज समता सैनिक दल के बारे में चारों ओर चर्चाएं शुरू हो गई और जब मनुवादियों तक यह खबर पहुंची तो उन्होंने भी समता सैनिक दल को टक्कर देने के लिए बाबा साहेब के प्रारूप की नकल करते हुए सन १९२५ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) नामक एक फौज की स्थापना कर डाली ।

अनुमान यह कि यदि बाबा साहेब अंबेडकर समता सैनिक दल नामक संगठन नहीं बनाते तो उन्हें मनुवादी लोग शोषित समाज का नेता नहीं बनने देते एवं वे नेता नहीं बन पाते तो उन्हें गोलमेज सम्मेलन में शामिल नहीं किया जाता तथा गोलमेज सम्मेलन में शामिल नहीं किया जाता तो न बाबा साहेब के द्वारा संविधान लिखा जाता और न शोषित समाज को समता के अधिकार मिलते एवं युवा अवस्था में ही मनुवादी लोग बाबा साहेब की हत्या भी कर डालते,लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में आजकल कमांडो तैनात रहते हैं उसी प्रकार बाबा साहेब अंबेडकर के साथ समता सैनिक दल के कमांडों हर वक्त साये की तरह उनकी सुरक्षा में तैनात रहते थे साथ ही बाबा साहेब अंबेडकर की सभाओं में जो गांवों से लोग चलकर आते थे उन्हें सुरक्षित लाना और सुरक्षित वापिस उनके घरों तक पहुंचाने का काम भी समता सैनिक दल किया करती थी इसके अलावा बाबा साहेब की सभाओं को असामाजिक तत्वों से बचाने की जिम्मेदारी भी भीम सैनिक संभालते थे ।

महाड़ सत्याग्रह आंदोलन हो या फिर कालाराम मंदिर प्रवेश की लड़ाई हो इनकी सफलता का श्रेय स्वयं बाबा साहेब ने समता सैनिक दल को दिया था।

भीम सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए वर्ष में अनेक मौकों पर बाबा साहेब अंबेडकर समता सैनिक दल की परेड का निरीक्षण किया करते थे व भीम सैनिकों को मंच से संबोधित करते थे साथ ही मार्चपास्ट की सलामी भी लेते थे ।

समता सैनिक दल के इतिहास के साथ एक बात और जुड़ी हुई है कि बाबा हरिदास जी ने समता सैनिक दल के भीम सैनिकों को ही सबसे पहले जय भीम का नारा दिया था जो कि आज भारत के अलावा पूरी दुनिया में गूंज उठा है ।

शीशे की तरह साफ दिखाई दे रहा है कि बाबा साहेब अंबेडकर का इतिहास हजारों वर्षों तक कायम रहेगा और जब तक बाबा साहेब अंबेडकर का इतिहास कायम रहेगा तब तक समता सैनिक दल का इतिहास भी साथ में जुड़ा रहेगा कि आज जो भी अधिकार शोषित समाज को मिले हुए हैं उनके पीछे समता सैनिक दल के हजारों भीम सैनिकों की मेहनत भी छुपी हुई है ।

बाबा साहेब अंबेडकर के समता सैनिक दल की नकल करके मनुवादियों ने जो आर एस एस नामक संगठन बनाया था उसका भारत में पूरे साधन और संसाधनों पर राज है दूसरी तरफ बाबा साहेब अंबेडकर का समता सैनिक दल आज अपने परिचय का मोहताज है क्योंकि हम सभी लोगों ने इस दल के महत्व को ठीक से समझने का प्रयास ही नहीं किया और न सच्चे मन से इसके लिए मेहनत की।
एक कहावत है कि जागो तभी सवेरा और आज बाबा साहेब का समाज जाग चुका है अब बाबा साहेब अंबेडकर के समता सैनिक दलको परिचय का मोहताज नहीं रहने देंगे व भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों तक समता सैनिक दल को पहुंचा देंगे।

बहुत से लोगों का कहना है कि हम बाबा साहेब अंबेडकर के इस संगठन से जुड़ना तो चाहते हैं लेकिन वर्तमान में इसको चलाने वाले लोग ठीक नहीं हैं अधिकतर कमाण्डर झूठे हैं ठग हैं, घपलेबाज हैं,नाटकबाज हैं और भीड़ दिखाकर अपनी टिकट का जुगाड़ करने वाले धोखेबाज हैं इन आरोपों के अलावा भी अन्य कई तरह के आरोप लगाते रहते हैं लेकिन इन सबके जवाब में हमारा यही कहना है कि आप व्यक्तियों से मत जुड़ो बल्कि *बाबा साहेब अंबेडकर के संगठन समता सैनिक दल से जुड़ो।*
मान लिया कि इस संगठन को चलाने वाले अधिकतर तो नहीं लेकिन कुछ लोग नालायक हो भी सकते हैं लेकिन उनकी नालायकी उस दिन बिलकुल खत्म हो जायेगी जिस दिन बहुत से अच्छे लायक लोग समता सैनिक दल में शामिल हो जायेंगे ।

जिस प्रकार प्रकाश के आते ही अंधेरा गायब हो जाता है उसी प्रकार समता सैनिक दल में अच्छे लोग आते ही बुरे लोग या तो सुधर जाएंगे या फिर समता सैनिक दल को छोडछाड़कर भागते हुए नजर आएंगे ।

बाबा साहेब अंबेडकर किसी भी व्यक्ति विशेष के नहीं हैं बल्कि वे तो हम सबके हैं इसलिए उनका बनाया हुआ संगठन समता सैनिक दल भी हम सबका है इस दल का किसी के नाम पर ठेका नहीं छूटा हुआ है इसलिए बेझिझक होकर समता सैनिक दल से जुड़िए ।

समय की मांग है कि बाबा साहेब अंबेडकर के समता सैनिक दल को मजबूत करें और उस संगठन को पटखनी देने का प्रयास करें जो इस दल की नकल करके बादमें बना लेकिन अपने स्तर पर वह बहुत बड़ा है और शोषित समाज का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर सामने खड़ा है ।

इस दल में जुड़ने के लिए आपको किसी से भी लाइसेंस प्राप्त करने की जरूरत नहीं है आप यदि इस दल में शामिल होना चाहते हैं तो अभी से अपने आपको समता सैनिक दल का सदस्य मान लें एवं यदि आप शराब पीते हैं तो उसे छोड़ने का प्रयास करें साथ ही अपने चरित्र पर किसी भी प्रकार का दाग नहीं लगने दें और समाज हित में काम करना शुरू कर दें। औपचारिकताएं पूरी करने के लिए
राजस्थान में निम्नलिखित मोबाइल नम्बरों पर संपर्क करें;-
9784593748, 9413542524, 9887803254, 9784877122, 8239812751, 7239963778, 9461342146, 9549455623, 7073111432, 9828772724, 7742642947, 9414914392, 8003856855, 9461156033

राजस्थान प्रदेश में गठित की गई नयी कार्यकारिणी.

बाबा साहेब के सामाजिक संगठन समता सैनिक दल को हर घर तक पहुंचाने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं चिंतन शिविर के दौरान राजस्थान प्रदेश में पाँच अगस्त रविवार को जयपुर अम्बेडकर भवन में नयी कार्यकारिणी गठित की गई है जिसमें राष्ट्रिय अध्यक्ष माननीय उम्मेद सिंह गौतम के द्वारा करीब ३५ भीम सैनिकों को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया गया जिसमें वरिष्ठ एवं अनुभवी भीम सैनिक बी एल बुगालिया जी को प्रदेश अध्यक्ष एवं बी एल बौद्ध को वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है तथा इसके अलावा बालकृष्ण जी वर्मा, एच पी बौद्ध, गजानंद सरावता,कानाराम जी बौद्ध,भैरुंलाल जी नाम,हवा सिंह जी बौद्ध को भी प्रदेश कार्यकारिणी में लिया गया है एवं तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ओ पी बौद्ध को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल कर लिया गया है साथ ही नवरत्न गोसांईवाल को प्रदेश सचिव एवं मीडिया प्रभारी बनाया गया है।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भंते कश्यप आंनद,बौद्ध साहित्य क्रांति के विद्वान डॉ एम एल परिहार, राष्ट्रीय महासचिव रघुनाथ बौद्ध,राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ जसपाल सिंह गौतम,उत्तर प्रदेश महासचिव प्रताप सिंह,राष्ट्रिय सचिव एवं महिला विंग प्रभारी कमला बुगालिया,महिला कमाण्डर बबली गौतम, द्रोपदी गौतम एवं ललिता भारती सहित विभिन्न जिलों के जिला कमांडर्स एवं सैकड़ों भीम सैनिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान जयपुर जिले के लिए जिला कमाण्डर राजेश मीणा को नियुक्ति दी गई।

कार्यक्रम का सफल संचालन विनय बौद्ध उर्फ रामावतार जी बौद्ध ने किया ।
नयी कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए पूरे राजस्थान प्रदेश में दल को मजबूती के साथ खड़ा करेंगे इसके लिए सभी भीम सैनिकों से अपील की जाती है कि अधिक से अधिक संख्या में बाबा साहेब अंबेडकर के समता सैनिक दल में भर्ती होने का कष्ट करें.

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