त्याग व समर्पण के ‘भगवानजी’ को वापस लाने की जिद्द ..!

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( शौकत अली खान )
कल अखबारों की कतरनें अपने-अपने ख्वाबों से भरी हुई थी, व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त होने में लगी हुई थी,स्कूल की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां खत्म हो चुकी थी हर और तबादलों का दौर नजर आ रहा है कोई अपने घर के नजदीक की स्कूल में तबादला करवाना चाहता है तो कोई चहेती स्कूल में …
इस बीच एक हेडलाइन गुरु-शिष्य के अगाध शिक्षण प्रेम को लेकर थी,एक बार तो देखकर बड़ा अच्छा लगा, चरमराई शिक्षण के लगे घाव भर गए लेकिन लाखों में एक उदाहरण…??
तमिलनाडु राज्य में तिरुवल्लुर जिले के वेल्लिग्राम स्थित सरकारी हाईस्कूल में, जहां एक शिक्षक के तबादले से बच्चे काफी दुखी हो गए हैं। दरअसल हाल ही में एक 28 वर्षीय अंग्रेजी शिक्षक जी भगवान जी का तबादला दूसरे इलाके के सरकारी स्कूल में कर दिया गया है।
स्कूल में जब ये खबर फैली तो बच्चे इतने दुखी हो गए कि उन्होंने जी भगवान को स्कूल में ही रोक लिया और उनसे लिपटकर रोने लगे। बच्चे इस कदर परेशान हुए कि वो जी भगवान जी का तबादला रोकने के लिए स्कूल में ही धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी उनका भरपूर साथ दिया। आखिरकार बच्चों के इस प्रदर्शन से सरकार का दिल पसीज गया और उसने भगवान जी का तबादला 10 दिनों के लिए रोक दिया।  छात्रों का कहना है कि जी भगवान शिक्षा के महत्व को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और वह उन्हें काफी सपोर्ट भी करते हैं।
देश के भविष्य निर्माताओं के लिए भगवान जी रॉल मॉडल है शिक्षक वर्ग में इस भाव की जरूरत है आज भी और तब तक भी जब तक देश अव्वल साक्षर – व्यवस्थामय राष्ट्र नही बन जाता। गुरुजनों को आज व्यक्तिगतहित को दरकिनार कर विद्यार्थी हित की परिकल्पना करनी होगी
निःसन्देह ! यहाँ से कमाई हुई दौलत उस ठहरे हुए शहंशाह या धनवान से कई गुना बेहतर है जो शोषण से तरबतर हो जाती है। बच्चे भगवान को रूप होते है अपने उस्ताद के लिए आँसू टपकना बेहतर जिंदगानी का नजरिया है इससे कई गुना बेहतर एक समपर्ण ,त्याग और मेहनत की पराकाष्ठा है।
“जिन के किरदार से आती हो सदाक़त की महक
उन की तदरीस से पत्थर भी पिघल सकते हैं।”
“भगवान” जी अनन्त शुभकामनाएं …..

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