स्वयं तुलसीदास जी उस दौर में ‘आधार’ की महत्ता का बखान कर चुके हैं !

आधार कार्ड की अनिवार्यता पर व्यंग्य !

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(नारायण बारेठ)


आधार !
इसका माहत्म्य समझो। 
स्वयं तुलसीदास जी ने उस दौर में आधार की महत्ता का बखान किया था। 
रामायण में वे कहते है ‘ कलियुग केवल नाम आधारा सुमिर सुमिर न उतरहि पारा ‘ / कलियुग में वे ही सुखी होंगे जिनके पास आधार है। 
राजनीति भिन्न क्षेत्र है। बाकि सब जगह ‘आधार’ से ही जीवन सुखी होगा। हॉस्पिटल ,बैंक ,नौकरी -व्यापार ,ट्रैन -बस में यात्रा या सरकारी योजना का लाभ उठाना हो ,आधार ही सुख देगा। छोटे लोगो के लिए आधार बहुत जरूरी है। आटा लेना है तो आधार का डाटा ही काम आएगा।जिसने आधार का मर्म नहीं समझा ,वो घाटे में रहा।कुछ को तो जान भी गवानी पड़ी है। रोजमर्रा के जीवन में आधार ही मदद करेगा।
समाज में कुछ बड़े लोग है ,कुछ छोटे।छोटे लोगो की दुनिया भारत है ,बड़े लोग इंडिया में रहते है।बड़े लोग है। वे पद,ओहदा ,तमगा ,इनाम इकराम बिना किसी आधार के ले सकते है।वे बगैर किसी ‘आधार’ के किसी भी क्षेत्र में चुनाव लड़ सकते है। उन्हें आधार से छूट है। वे किसी भी क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते है। कोई भी उन्हें पार्टी टिकट दे सकती है। वे बिना किसी आधार के जीत भी जाते है।
इसीलिए तुलसी दास जी ने आम अवाम को अपनी इस चोपाई से हिम्मत और हौसला दिया है।देश, काल ,अवस्था ,विधि विधान कोई भी ,आम आदमी के लिए यही नाम आधार भव सागर पार करवाएगा। अभी रोजमर्रा के चीजों के भाव बढ़ रहे है। उस ‘भाव सागर ‘में भी शायद मदद मिले। भाव से परेशान नहीं चाहिए।भगवान् भाव का भूखा है। इसीलिए बाजार में चीजों का भाव बढ़ता रहता है।
सादर

(वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ जी की फेसबुक वाल से साभार)

 

फोटो क्रेडिट- इन्टरनेट

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