बहुत कर ली राजनीति, अब सेवा करना चाहता हूँ !

राजनैतिक पार्टियों द्वारा जिलाध्यक्षों को चुनाव नहीं लड़वाने पर व्यंग्य !

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(नारायण बारेठ)

बहुत कर ली राजनीति
अब सेवा करना चाहता हूँ !
यह सुनते ही बैठक में सब को सांप सूंघ गया। हालाँकि सांप खुद बैठकों में जाने से डरते है।पर मुहावरा है।
भाई साहब ने जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।पिछली बार कार्यकर्ताओ ने उनके त्याग पत्र को लेकर काफी बावेला मचाया था। पर तब टस से मस नहीं हुए। इस बार खुद ने त्याग की मिसाल पेश की। वो भी चुनाव से पहले।
राजस्थान में दोनों पार्टियों के अस्सी जिला अध्यक्ष है। इनमें से 58 टिकट मांग रहे है। इनमे से एक पार्टी ने तो पहले ही ऐलान कर दिया था कि जिला अध्यक्ष को टिकट नहीं मिलेगा। इसके बाद से भाई साहब का मन खिन्न था।
कहने लगे ‘अब जनता की सेवा करना चाहता हु ‘ . प्रमुख जी बोले ‘बहुत अच्छा। समझ गया। वैसे ही न जैसे स्व नानाजी देशमुख सब कुछ छोड़ कर चित्रकूट में धरातल पर जनता के सेवा करने चले गए थे।’ नहीं सर ,कुछ अलग ढंग से।
अच्छा अच्छा ,आप कच्ची बस्ती में गरीब बच्चो की शिक्षा पर काम करना चाहते है। नहीं भाई साहब। तो फिर अस अम अस हॉस्पिटल मे लावारिस मरीजों की खिदमत के बारे में सोच रहें होंगे। नहीं भाई साहब।तो क्या वृद्धावस्था आश्रम में बुजुर्गो की सेवा करने का निर्णय लिया होगा। नहीं भाई साहब !
वे थोड़ा संकुचाते हुए बोले ‘मैं आपकी ही तरह मंत्री विधायक बन कर सेवा करना चाहता हूँ।भाई साहब ,विश्वास कीजिये मेरे पास कुछ भी नहीं है। एक मकान है ,कुछ दुकाने है और बड़ा बेटा थोड़ा जमीनों का काम करता है ,छोटा बेटा अमेरिका में पढ़ रहा है। वो भी अपने दम पर। मैने तो खाली डोनेशन दिया है।
फिर कहने लगे ‘ सर ,आपको क्या बताऊ ,न कोई पेट्रोल पंप है ,न गैस एजेंसी ,न कोई माइंस है ,टोल का ठेका लिया था पर उसमे कानूनी उलझन आ गई।
यह सुन कर भाई साहब को खुद के बीते दिन याद आ गए।
ऐसे ही शुरुवात की थी।आज सब कुछ है। बुजुर्ग यूँ ही नही कहते कि सेवा का मेवा मीठा होता है/ उभरते हुए एक युवा नेता ने कहा ‘भाई साहब ने तो घर फूक कर तमाशा देखा है। दूसरे ने इसमें संशोधन किया ,घर नहीं घरों को।क्योंकि आज जहाँ शॉपिंग माल खड़ा है न , उस कच्ची बस्ती में कई घर थे।
नेताजी ने आशीर्वाद देने से पहले पूछा -जीत जायेगा न !
सर , महंत साथ है ,मौलवी साथ है,ठेकेदार साथ है ,चैनल साथ है ,अख़बार साथ है ,फिर पब्लिक भी साथ हो ही जाती है।
भाई साहब ने ‘विजयी भव’ कह कर बात खत्म कर दी।
सादर 

(वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ जी की फेसबुक वाल से साभार )

 

खबर स्त्रोत-(राजस्थान पत्रिका) 

फोटो स्त्रोत- इन्टरनेट

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