आम जन का मीडिया
Today's need is a big coalition!

आज की जरुरत है महागठबंधन !

– भंवर मेघवंशी
देश के वर्तमान हालात के मद्देनजर फासीवादी , मनुवादी दक्षिणपंथी संविधान विरोधी ताकतों को चुनौती देने के लिए धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों में यकीन रखने वाले तमाम समूहों के महागठबंधन की आज महत्ती आवश्यकता प्रतीत हो रही है।
राजनीतिक परिदृश्य में ऐसा होता दिखाई भी पड़ रहा है , लेकिन यह गठबंधन महज़ चुनावी न हो , सिर्फ सियासत तक सीमित न रहें बल्कि राजनीति से इतर क्षेत्रों में भी ऐसे ही महागठबंधन पर विचार करना चाहिए।
मेरा स्पष्ट मानना है कि हमे समस्त असहमतियों, विरोधाभासों और मतभेदों के बावजूद एकजुट होकर हमारे लोकतंत्र, संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं और मूल्यों की रक्षा हेतु एक राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ना चाहिए , जिसके तहत देशभर के धर्मनिरपेक्ष, प्रोग्रेसिव, उदारवादी  राजनीतिक सामाजिक  समूहों, व्यक्तियों,संगठनों, आंदोलनों, अभियानों व राजनीतिक दलों को मजबूती से हाथ मिलाना होगा ।
यह समय अकेले लड़ने का नहीं है, यह समय अंतर्विरोधों और असहमतियों की खाईयां चौड़ी करने का नहीं  , सत्ता प्रतिष्ठान पर काबिज़ शक्तियां बेहद व्यवस्थित रूप से आम जन के अरमानों ,अभीप्साओं और  उनकी आवाज़ों को कुचल रहे हैं।
जो मुखर है ,वो मारे जा रहे हैं, जो मुखालफत में है उनके लिए जेलों के दरवाजे खोल दिए गए हैं। विरोध का हर स्वर अब घोषित राष्ट्रद्रोह है , अधिकार की मांग नक्सलवाद बताई जा रही है, जनतांत्रिक लड़ाइयों को देश विरोधी उपद्रव की संज्ञा मिल चुकी है।
अभूतपूर्व हालात हैं, राष्ट्रवाद , विकास, स्वच्छता के आवरण तले गरीबों, वंचितों और हाशिये के तबकों को चिरगुलाम बनाने का काम निर्बाध जारी है ।
ऐसे विकट विकराल वक़्त में समविचारी लोगों , समूहों, संगठनों और दलों का एक साथ आना बहुत जरूरी है , इसके लिए अश्पृश्यता के भाव को त्याग कर एक वास्तविक महागठबंधन बनाने का धरातलीय काम विभिन्न इलाकों के युवाओं के साथ जल्द ही शुरू हो रहा है , यह विशुद्ध राजनीतिक प्रकृति का काम है ,जो चुनावी राजनीति को भी प्रभावित करेगा और लोक राजनीति को भी ।
आईये , राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक  हर क्षेत्र में एक ‘महागठबंधन’ बनाते हैं !

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