आम जन का मीडिया
Today is the fiftieth birthday of Heer ji! Congratulations!

आज हीर जी का पचासवाँ जन्मदिन है .

हीर जी :ड्राइविंग से दलित आंदोलन तक का बेमिसाल सफर

भीलवाड़ा जिले के करेड़ा कस्बे के नजदीकी रेह गांव के निवासी हीरालाल बलाई ,जिन्हें प्यार से सभी साथी हीरजी के नाम से पुकारते है। अत्यंत सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि के परिवार में पैदा हुये। गरीबी को बहुत नजदीक से देखा और भोगा भी। परिवार की स्थितियां ऐसी न थी कि उन्हें दसवीं से आगे पढ़ने दिया जाता,इसलिए मैट्रिक के बाद पढ़ाई सिर्फ सपना बन कर रह गई।

फिर शुरू हुआ मेहनत मजदूरी का दौर। उन्होंने दर्जनों कामों में अपना हुनर आजमाया। हमाली की ,रिक्शा खींचा, मिल में मजदूरी की ,खेती की और अन्ततः ट्रक पर खलासी का काम करते करते उन्होंने ड्राइविंग सीख ली।वे ट्रक ड्राइवर बन गए।कुछ साल भीलवाड़ा डेयरी के लिए दुग्ध संग्रहण की गाड़ी चलाई ,फिर एक सरदार जी के यहाँ नौकरी कर ली।बाद में किसी और के यहाँ भी गाड़ी चलाई और अंत में खुद ही एक गाड़ी ले ली ,जिसे किराये पर चलाना शुरू कर दिया।

पुरानी फिल्मों और क्रिकेट के दीवाने हीरजी अमिताभ बच्चन के फैन है,छोटे से लेकर बड़ों तक हर कोई उन्हें हीरा मामा जी कहता है ,इस तरह वो जगत मामा बन गये ।

सन 2007 में हम लोग भीलवाड़ा जिले के रायपुर ब्लॉक में सगरेव गांव में हुए दलित अत्याचार के मामले में आंदोलित थे। हमने वहां पर दलित मानव अधिकार सम्मलेन आयोजित करने का ऐलान किया तथा उसकी तैयारी हेतु गांव गांव की यात्रा करने की योजना बनाई। हमें 5-7 दिन के लिए एक गाड़ी चाहिये थी।हमें किसी ने हीरजी और उनकी गाड़ी के बारे में बताया।हमारे एक साथी ने उनसे बात की।हीरजी ने अपनी कईं शर्तों के बाद साथ आने की बात कही।हमारी तरफ से सारी शर्तें मान ली गयी ,तब वे गाड़ी ले कर आ गए।

शर्तों के साथ सफर पर निकले हीरजी सात दिन हमारे साथ रहे और फिर बिना किसी शर्त के हमारे ही हो कर रह गए।उन्हें एक हफ्ते में बाबा साहब का मिशन समझ में आ गया।इस बरस उन्हें हमारे साथ आये सात साल पूरे हो गये।

इस दौरान हीरजी और मैंने राजस्थान ,गुजरात ,दिल्ली ,मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र एवं उत्तरप्रदेश के कई इलाकों की मिल कर खाक छानी ।हम लगभग साढ़े तीन लाख किलोमीटर का सफर हीरजी की गाड़ी से अब तक कर चुके है। आज भी वो उसी उत्साह के साथ भागदौड़ में लगे रहते है।

ये हीरजी ही है जिनकी बदौलत मैं हर जगह रात या दिन की परवाह किये पंहुचता हूँ।अक्सर हीरजी 24 हावर्स मेरे साथ होते है।ऐसा कईं कईं दिनों और महीनों तक चलता रहता है।

मेरे कार्यक्रम बनाने से लेकर कार्यक्रम स्थल तक पंहुचने का इंतज़ाम हीरजी बखूबी अकेले ही करते है। विभिन्न गांवों के रास्ते खोजने में वे गूगल मैप को भी मात देते प्रतीत होते है ।जन संपर्क करने में उन्हें गजब महारत हासिल है। लोगों के बारे में जानकारी रखने के मामले में वे साक्षात् एनसाइक्लोपीडिया ही है।

मेरे चाय ,नाश्ते ,खाने ,सोने की आदतों से लेकर मैं क्या पहनूंगा ,उसके कपड़ों तक का चयन कई बरसों से वही करते है।सभा- सम्मेलनों ,धरना -प्रदर्शनों के दौरान मंच तक डायरी पंहुचाने से लेकर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी एवं साहित्य के विपणन तक के दर्जनों कामों की ज़िम्मेदारी का बखूबी निर्वहन हीरजी स्वयं ही करते है।हीरजी एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संपूर्ण संस्था के रूप में काम करते है।

बरसों से वे साये की तरह मेरे साथ बने हुए है। इतने सालों में हमने कभी उनके मेहनताने का हिसाब नहीं किया ,एक व्यक्ति जो दर्जनों व्यक्तियों का काम करता हो ,उसे तनख्वाह देने का दुस्साहस मुझमे कतई नहीं है।वे कभी भी नौकरी करने मेरे साथ आये ही नहीं ।उन्होंने बाबा साहब के मिशन और मेरे काम की भावना को समझा तथा एक जीवनव्रती कर्मयोगी की भांति साथ आ गए। फिर कभी मुड़ कर नहीं देखा, कभी स्वार्थ आड़े नहीं आने दिया।

हर परिस्थिति में साथ बने रहने का भीम संकल्प हीरजी का एक सर्वप्रमुख गुण बन गया ।इस बीच हजारों लोग साथ आये। सैंकड़ों लोग वापस चले गए। दर्जनों गद्दारी पर उतर आये। निंदा करने लगे , गालियां देने लगे ,मारने की धमकियाँ भेजने लगे, विरोधी खेमे बनाने लगे ,जूठे आरोप लगाने लगे और दुष्प्रचार करके चरित्र हनन तक करने की साज़िशों तक में शामिल हो गए,मगर तब भी हीरजी अविचलित रहे और हर हाल में साथ देने को प्रतिबद्ध बने रहे।

ऐसी भी नोबत कई बार आयी जब कोई पैसा जेब में नहीं बचा ,तब भी हीरजी चट्टान की तरह अटूट रह कर हौंसला बढ़ाते रहे कि -यह वक़्त भी बीत जायेगा ,बस आप तो बाबा साहब का काम करते रहिए। कितनी ही बार उन्होंने लोगों से मेरे लिए खुद उधार लिया,ब्याज चुकाया ,पर कारवां को ठप्प नहीं होने दिया ।

इस घनघोर स्वार्थ के युग में कौन अपनी जिंदगी इस तरह उत्सर्ग करता है। यह बाबा साहब के मिशन की ही ताकत है कि हीरजी जैसे साथी अपना संपूर्ण जीवन लगा देते है ,बिना किसी प्रचार ,प्रसिद्धि और पद की लालसा के। इतिहास ऐसे ही साथियों के रक्त और स्वेद कणों के बूते रचता है।ऐसे ही अनाम भीमसैनिकों की श्रम शक्ति के चलते ही कारवां मंजिल की तरफ आगे बढ़ता है।

आज जब मैं जयपुर में बैठ कर यह लिख रहा हूँ ,तब 49 वर्षीय हीरजी मिशन की दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को ठीक कराने के लिए भीलवाड़ा के एक गैराज में लगे हुए है ,ताकि जल्द से जल्द हमारी स्थगित यात्राओं को पुनः प्रारम्भ किया जा सके।

हीरजी के साथ इन बीते तकरीबन आठ सालों में मैंने लाखों किलोमीटर की दूरी को तय किया है। उनका बाबा साहब के मिशन के प्रति बेशर्त समर्पण बहुत उम्मीद जगाता है।मुझे उनका त्याग अभिभूत किये देता है और निरन्तर काम करने को प्रेरित करता है। उनके जैसे ही कर्मठ साथियों की ऊर्जा से यह कारवां आगे बढ़ते रहता है ,बढ़ते रहता है और बढ़ते ही रहता है।

– भंवर मेघवंशी
( स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता ,भीलवाड़ा )

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