आम जन का मीडिया
Today is Baba Saheb's Nirvana Day!

आज बाबा साहब का निर्वाण दिवस है !

– रक्षित परमार

आज बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का निर्वाण दिवस है । उस महामानव के कदमों को स्पर्श करते हुए सादर नमन । हम सब अनुयायियों के लिए यह दिन दरअसल भावुकता से लबरेज है । समानता के प्रखर पुरोधा और सामाजिक शोषण के वास्तविक मुक्तिदाता ने अपने परिवार के सुख को कभी भी सर्वोपरी नहीं माना , देश और समाज को वे अपने करीबी मानते ही नहीं रहे बल्कि जो कर्तव्य उन्होंने महसूस किये उन्हें समय रहते पूरे भी किये , सच तो यह है कि हम आज उनके योगदान का एक प्रतिशत भी फर्ज और कर्ज अदा नहीं कर पा रहे है। शायद हमें उनकी पारिवारिक भावनाओं से कोई गहरा वास्ता नहीं रहा  ।

आज सामाजिक क्रांति का सूत्रपात होना यकीनन अनिवार्य सा हो गया है क्योंकि अब परिवार का दायरा चारदीवारी से बाहर विस्तृत रूप ले चूका है , यानि जो लोग परिवार के ही कल्याण को समाज और देश का कल्याण समझ रहे है उन्हें यह समझना होगा कि परिवार का विस्तृत रूप समाज ही होता है , जिसका हम हिस्सा होते है । बाबा साहब ने सामाजिक बदलाव और उत्थान के लिए अपनी सोच में दूरगामी परिणामों को हमेशा ध्यान में रखकर तमाम कार्य किये तभी आज हम सीना तान के स्वाभिमानी होने का दम्भ पाल खडे है मगर सही मायने में उनकी ही मनोभिलाषाओं का ही ये मूर्त रूप है ।
आज तमाम बौधिसत्वों और अम्बेडकरवादी समर्थकों को अपने शिक्षित होने के कर्ज अदा करने के लिए दूरदर्शिता अपने दिमाग में संजोयने की आवश्यकता है । बाबा साहब ने समाज के लिए अपनी मानसिक,  शैक्षिक , शारीरिक , पारिवारिक और आर्थिक ताकत झोक दी जिससे वो इस दुनिया में बदलाव के सबसे महानतम पुरोधा के रूप में स्थापित हो सके । डॉ. अम्बेडकर ने एक कुव्यवस्था को ऐसा जोरदार हथौडा मारा जिसने सदियों से संस्कृति , संस्कार , उच्च कुल के वंशजों और पवित्रता के नाम पर फैलाये अन्याय को ही बिखेर कर रख दिया । अमूक जानवरों की भांति करोडो इंसान जो इस देश के मूलनिवासी रहे , जिन्होंने बिना छल कपट के समानता और सहनशीलता को अपना धर्म मान रखा हो , जिनके लिए लडाई एक अभिशाप की भांति हो , उन्हें डॉ. अम्बेडकर ने ही सामाजिक , मानसिक , शारीरिक , आर्थिक ,और राजनैतिक गुलामी की बैडियों को तोड फेंकने में  सबसे ज्यादा भूमिका अदा की । दरअसल वो सबसे पहली और अत्यधिक गहराई में धंसने वाली ईंट बन कर मानवता के नाते  एक बुलंद आवाज प्रदान वाले मसीहा बन कर उभरे और करोडो लोगों की जिंदगी को बदल कर रख दिया ।
आज हम सिर्फ उनके निर्वाण दिवस पर ही उन्हें स्मरण कर रहे है तो ये महामानव के साथ , उनके त्याग के साथ , उनके समर्पण भाव के साथ एकमात्र छलावा है । हम आज भी कई सामाजिक कुप्रथाओं का समर्थन करते है जिनके डॉ. अम्बेडकर घौर विरोधी रहे थे । आज उनके नाम पर वोटबैंक की राजनीति कर दलितों के नाम पर रोटियां सेंकने वालों की तादाद लगातार बढती ही जा रही है । समाज को तरह -तरह से दिग्भ्रमित करने में कही कोई कसर नहीं छोड रहे है लोग , उन्हें हम अम्बेडकर समर्थकों को करारा जवाब देना होगा क्योंकि हमारी भावनाओं , हमारे अधिकारों और हमारे संसाधनों और हमारे स्वयं के दम पर ही स्वयं हमारा , बच्चों का और हमारी समाज का ही जब सत्ता में होंगे तब ये जम कर शोषण करेंगे या उसका कारण बनेंगे ।
आज सामाजिक समरसता और सामाजिक विकास के नाम पर लोगों को बर्गलाने वाले राजनीतिक व्यापारी कम नहीं है । होश में रह कर अपने मत का सदुपयोग करना हमें हरहाल में सीखना होगा क्योंकि हमारे द्वारा दिया गया गलत वोट हमारी ही बर्बादी की वजह बन सकता है । आज वोटिंग प्रणाली में निरंतर सेंधमारी बढती ही जा रही है तो हमें जागरूक नागरिक होकर चुनाव आयोग पर दवाब बनाने हेतु आगे आना चाहिए क्योंकि यही से हम अपने लोकतंत्र को बचाने की कोशिश में अपने कुछ कदम आगे बढा सकेंगे । एकता की सीख अगर कही से सीखनी है तो वो है हमारे अनपढ आदिवासी भाई  जिन्हें किसी समय में शोषणकारी तत्वों ने जंगलों में खदेड दिया था , मगर आज भी हमारे आदिवासी भाई अपने समूह के प्रति जो एकजूटता दिखाते है ऐसी हमें एकता  कही पर भी देखने को नहीं मिलती है ।
बाबा साहब के अनुसार समाज का मतलब एक जाति कदापि नहीं है बल्कि समाज का वह दबा हुआ व्यक्ति या तबका है जिसे ताकतवर ताकतों ने अपने जुल्मों से गुलामी की झंजीरों से जकड रखा है । जो चाहते है स्वच्छंद मन से अपने व्यक्तित्व का विकास करें मगर शाषक और शोषक वर्ग का नेतृत्व करने वाले लोग कभी भी हमें आगे बढते हुए नहीं देख सकेंगे क्योंकि उनका तो पतन निश्चित है अगर हमने अपने वजूद को पहचान लिया तो । अपवाद स्वरूप कुछ लोग डॉ. अम्बेडकर को सच्चे मन से स्वीकार करते है तो हमें उन्हें गलत नहीं समझना चाहिए बल्कि साथ लेना चाहिए ।  अन्याय करने वाले से ज्यादा अन्याय को सहन करने वाला है गुनाहगार है इसलिए अब वैचारिक परिवर्तन लाया जाए ताकि डॉ . अम्बेडकर की मंशाओं को मूर्त रूप दिया जा सके , उनके सपनों को एक बार पुन: जीवंत बनाने का प्रयास किया जाए .

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