इन नफरती हवाओं को रोकना होगा

205

ये सांप्रदायिक व जातिवाद की भयावहता एक राष्ट्र अखन्ड राष्ट्र के हमारे प्राथमिक उद्देश्य की प्राप्ति की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बने हुए है.हमारी देश्भक्ति की पहचान विश्वभर में है, राष्ट्रवाद की हमारी विचारधारा अतुल्य है ,हम विश्व को मानवता सिखाने का माद्दा रखते है ,सबसे बड़े शराणागत राष्ट्र के रुप में हम विश्व का पथ प्रदर्शित कर प्रेम व अपनत्व सिखाते है.लेकिन जब वस्तुस्थिति से रुबरू होते है तो हम इस बात को स्वीकारने को मजबूर हो जाते है कि भले ही हम विश्व पटल पर शांतिप्रिय राष्ट्र के रुप में उभर रहे है ,पर आन्तरिक रुप से गृहयुद्ध के दौर से गुजर रहे है और यह युद्ध जाति और धर्म के नाम पर लड़ा जा रहा है.ये जातियता व धार्मिकता की अतिवादी सोच बिना एक पल सोचे हमे हथियार उठाने को बेबस कर देती है और हिंसा की उत्कठां लिए हम चल पड़ते है उस रास्ते पर जो खुन से लथपथ है और जिसकी मंजिल भयावह व निर्मम हत्याओ के रुप में होती है.

हम ये समझ नही पा रहे है कि हम क्या करने जा रहे ? हम क्युं एक पल भी नही सोचते कि जिस खुन के हम प्यासे है वो खुन अपने ही भाईयों का है . धार्मिकता व जातियता की उन्मादी सोच राष्ट्रवाद की हमारी संकल्पना को दफ़न कर रही है.भीड़ का यह उग्र व हिंसक रुप तबाही का मंजर दिखाती है,भीड़ का ना कोई चेहरा होता है और ना ही नाम,बस इसमे खुन और सिर्फ खुन बहता है.किसलिए हो रहा है ये सब ! दुनिया के तमाम धर्म मानव कल्याण व प्रेम के पक्षधर है ,फ़िर धर्म के नाम पर इतनी नफरत क्युं ! अगर सामाजिक सद्भावना हमारे समाज की विलक्षण विशेषता है तो फिर जाति के नाम पर ये जहर क्युं .

राष्ट्र के लिए खतरा बन चुकी इस लाइलाज सी लगने वाली बीमारी का इलाज ढूँढना ही होगा . समस्याओं के निराकरण से पहले जरुरी है की उसके कारणो को जाना जा सकें, इसीलिए जरुरी है इस पर गहन मंथन करने की कि वो कौनसे कारक है जो इन नफरतो को हवा देते है .

इस तरह की घटनाओ को अंजाम देने में राजनीति सबसे आगे है,जिस “फूट डालो व राज करो” की नीति का उपयोग अँग्रेजो ने हमारी राष्ट्रीय एकता व अस्मिता को तोड़ने में किया ,उसी नीति को भारत के तमाम राजनैतिक दल सरंक्षित रखे हुए है तथा इसका उपयोग अपनी राजनैतिक मंछाओ को पूर्ण करने में कर रहे है.आज राजनिति सत्ता प्राप्ति के लक्ष्य के इर्द गिर्द घुमती है तथा चुनावो में अपनी जीत के लिए जाति व धर्म का बेधड़क उपयोग किया जाता है.वोट पाने के लिए धार्मिक भावनाओ को इस कदर भड़काया जाता है कि ये हिंसक रुप ग्रहण कर लेता है,मंदिर-मस्जिद को मुद्दा बनाकर उस पर राजनैतिक रोटियां सेंकी जा रही है ,भगवान व अल्लाह के नाम पर नफरते फैला कर सांप्रदायिक माहौल सिर्फ इसीलिए बनाया जा रहा है ताकि इसका चुनावी फ़ायदा उठाया जा सके.जाति के नाम पर तो चुनाव लड़ना व वोट पाना आम बात हो गयी है,किसी क्षेत्र विशेष में किसी जाति का समर्थन या विरोध सिर्फ इस आधार पर किया जाता है कि उसका चुनावी फायदा क्या होगा.इसके लिए कोई एक नही बल्कि तमाम दल किसी ना किसी रुप में जिम्मेदार है.

जातिवाद व साम्प्रदायिकता फैलाने में सोशल मिडिया उतना ही जिम्मेदार है.तकनीक के साथ दुनिया में इंटरनेट के आगमन ने लोगो के जीवन में कई बदलाव लाए है.इसके बहुत से सकारात्मक प्रभाव भी पड़े ,लेकिन अगर सांप्रदायिकता की बात करें तो नफरते व अफवाहे फैलाने में यह कतई पीछे नही है.आजकल फेसबूक व वाट्सअप पर अफ़वाहो व नफरत भरी पोस्टो की बाढ सी आ गयी है ! कुछ लोग सोशल मिडिया का इस्तेमाल सिर्फ समाज में जहर फैलाने के लिए करते है और पूरे यकिन के साथ कह सकते है की ऐसे लोग विवेकहीन व असवेन्दनशील होते है, जैसा की उनकी भाषा में भी झलकता है.ना जाने ऐसे लोग क्या साबित करने की कोशिश में रहते है ! इस तरह की अफ़वाहो का व्यापक असर पड़ता है और इनके पीछे लोगो की कतार मरने मारने पर उतारू हो जाती है.

भारतीय युवा पीढी की विवेकहीनता भी इसके लिए जिम्मेदार है.हम युवा सही गलत का फ़ैसला नही कर पा रहे है,सिर्फ बहकावे में आकर हम अपनी उर्जा गलत जगह नष्ट कर रहे है.इस मायने में देश का युवा राष्ट्र होना ही बड़ा अभिशाप नजर आता है और भी कई ऐसे कारक है जो सांप्रदायिक व जातिय वैमनस्य फैलाने में हिस्सेदार है.ऐसे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कारणो में अशिक्षा ,बेरोजगारी, निर्धनता,बहुजन व अल्पसंख्यक उपेक्षा, विभाजनकारी विचारो का प्रचार, धर्म व जाति के नाम पर एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़, राष्ट्रविरोधी गतिविधियां आदि.

अब वक्त आ गया है की विभाजनकारी माहौल को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी पहल की जाए.एकता व अंखडता के स्वपन को साकार करने के लिए देश के प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा.राजनैतिक दुष्प्रचार पर विराम लगाना होगा,धर्म व जाति के नाम पर हिंसा फैलाने वालो को हतोत्साहित करना होगा,भारतीय युवाओं को विवेक का इस्तेमाल कर अपनी पुरी ताकत राष्ट्रहित में एकता में लगानी होगी,सोशल मिडिया को लेकर नये नियामक बनाने होंगे जिससे गलत लोगों को रोका जा सकें ,अशिक्षा व बेरोजगारी हटाने को लेकर व्यापक कदम उठाने होंगेऔर ये काम सिर्फ सरकार या किसी इक्का दुक्का संस्थाओं द्वारा नही बल्कि इसके लिए भारत के हर एक नागरिक को आगे आना होगा ! राष्ट्रप्रेम व एकता की विश्वभर में मिसाल पेश करनी होगी !

-जितेन्द्र के परमार
रानीवाड़ा ( जालोर)

Leave A Reply

Your email address will not be published.