मेरी जिंदगी में कट्टरपंथी तत्वों के लिये कोई जगह नहीं है !

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समकालीन भारत में कईं कट्टरपंथी तंजीमें सक्रिय है ,वे विचारधारा के नाम पर काम करती है ,उनके उद्देश्य बड़े पवित्र होते है ,मगर लक्ष्य उतने ही अपवित्र है ,कहते कुछ है ,करते कुछ है ,इनके सिद्धांत और व्यवहार के फर्क को आसानी से देखा जा सकता है ,ये समाज की तकलीफ में कहीं नजर नहीं आते ,व्यापक समाज जब आंदोलित रहता है ,तब ये सुषुप्त रहते है ,जो भी नया नेतृत्व उभरता है ,उसे गाली देते है ,बेहूदा शब्दावली में बात करना ,हर किसी को चमचे ,भड़वे आदि इत्यादि कहना इनकी आदत होती है,हाल ही में 2 अप्रेल को हुये भारत बंद के दौरान ये बिलों में घुसे हुये थे ,बाद में जब पुलिस धरपकड़ चली तो ये बिल्कुल ही अंतर्ध्यान हो गये ,यहाँ तक कि सोशल मीडिया तक से भाग छूटे .

वैसे बातें बड़ी क्रान्तिकारी करते है ,लोगों के दिमाग में भूसा भरने में इनको महारत हासिल है ,अच्छे भले इन्सान को कुढ़मगज बना कर अपना प्रचारक बना लेते है ,इन्होने प्रचारक पद्धति एक जाने माने हिंदूवादी कट्टरपंथी समूहों से आयातित की हुई है .इनके मुखिया परम पूज्य भामनजी है ,पूरा समुदाय भले ही अनसेफ हो पर इनका बाम एकदम सेफ है , खुद के लोगों में बड़े विचारक माने जाते है ,इनके पास लगभग 15 की संख्या में जलेबीनुमा भाषण है ,घुमा घुमा कर वही भाषण लगाते रहते है , उनके चेले चपाटे जो लगभग ‘बंदबुद्धि ‘ होते हैं ,उनके विचारों को संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव आम्बेडकर के विचारों से भी बड़ा मानते हैं।
इस जमात के लोगों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पक्की नस्लवादी विचारधारा से संचालित होते है और जाति आधारित घृणा को खुलेआम बढ़ावा देते हैं । कहने के लिए ये स्वयं को ब्राह्मणवाद का विरोधी कहते है ,मगर ब्राह्मणवाद का विरोध करते करते ये खुद भी पक्के ब्राह्मणवादी हो चुकेे है ।

इस जमात से जुड़े प्रचारक लोगो का ब्रेनवाश करते रहते हैं ,उनको इतना कट्टर बना देते हैं कि इनका ‘बन्दबुद्धि’ समर्थक तालिबान और आईएसआईएस जैसी तंजीमों के समर्थकों जैसा हो जाता हैं । एक बार कोई इनके जाल में फंसा तो वह बमुश्किल ही इनसे छूट पाता है ।

इस जमात के मुखिया , इसके ब्रेनवॉश किये गए प्रचारक और इनके बन्द बुद्धि समर्थक सामान्य शिष्टाचार भी फॉलो नहीं करते , ये लोग सड़क छाप गाली गलौज और टपोरी टाइप भाषा इस्तेमाल करते हैं ,जो इनके छिछले , सतही और अवैज्ञानिक विचारों पर सवाल कर दे , उंनको वे गद्दार , पालतू तीतर , ब्राह्मणों का गुलाम , मिशन विरोधी जैसे कितने ही विशेषणों से नवाजने लगते हैं , दरअसल इनका मूल चरित्र पुरोहितवादी होता है ,ये पाप मोचन के सर्टिफिकेट बांटते हैं , मतलब यह कि जो इनके जाल में नहीं फंसता , वह कौम का दुश्मन करार दिया जाता है।

मूल शब्द से इनको बड़ा लगाव है , मूलतः ये मूल तत्ववादी होते है ,मूली नामक कंदमूल सा प्रभाव छोड़ते है , जिस तरह मूली के परांठे खा कर लोग अपान वायु छोड़कर प्रदूषण फैलाते हैं ,वैसे ही यह मूल तत्ववादी कट्टरपंथी जमात अपनी अधकचरी वैचारिक सड़ांध से कमजोर दिमाग लोगों को जकड़ लेते है और मानसिक प्रदूषण फैलाते रहते है ।

बाबा साहब की जय कहने में शर्माते है ,मूल की जय बोलते है, बाबा साहब के संविधान को ठेंगे पर रखते हैं, उसमें वर्णित बातों के ख़िलाफ़ काम करते है ,पक्के मनुवादी और नस्ली विचार रखते हैं। हमारा संविधान जाति, वंश , नस्ल, धर्म ‘के आधार पर भेदभाव और नफरत को सख्त अस्वीकार करता है , कानून जातीय घृणा और सामुदायिक वैमनस्य फैलाने की इजाजत नहीं देता है, मगर मूल तत्ववादी जमात खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए किसी को मूलवासी तो किसी को कुछ और कहती हैं ,जाति के आधार पर चिन्हित करके लोगो को भड़काती है ।

आजकल ये मूल तत्ववादी तबका मुझे ब्राह्मणवादी साबित करने में जुटा हुआ है । पता चला है कि मूल तत्ववाद के मूलाचार्य पंडित भामन जी के चंगु मंगू टाइप के अंध समर्थक सोशल मीडिया पर मेरे और शून्यकाल के खिलाफ जहर उगल रहे है, उंनको शून्यकाल ब्राह्मणी गपोड़ों की परिकल्पना लगता है। उनको मेरे सभी समुदायों के मित्र होने पर कड़ी आपत्ति है ,उनकी महान समझ यह है कि आपको जाति के आधार पर मित्रता और शत्रुता करनी चाहिए, मतलब यह कि किसी से मिलते ही उसकी जाति पूछनी चाहिए ,फिर उससे उसका जाति प्रमाण पत्र मांगना चाहिए , जाति का पता चलने पर उनके साथ क्या व्यवहार किया जाना है ,यह तय करना चाहिए । ऐसे घनघोर जाति वादी है ये मूल जमाती !

रही बात मेरी तो मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं बुद्ध,फुले,कबीर और बाबा साहब के मानवतावादी विचारों को मानता हूँ,लोगों के साथ जाति,धर्म,लिंग,नस्ल के आधार पर भेद और नफरत के सख्त खिलाफ हूँ । मेरा भारत के संविधान पर पूरा यक़ीन है,मैं स्वयं को प्रथमतः और अन्तिमत भारतीय मानता हूँ,मेरे देश का राष्ट्रध्वज तिरंगा ही मेरा ध्वज है और संविधान मेरा धर्मग्रंथ है,मैं किसी भी तरह की कट्टरपंथी,नस्लवादी,नफ़रत फैलाने वाली विचारधारा में यकीन नहीं करता,मुझे इंसानियत और भाईचारे,स्वतंत्रता और समता के मूल्यों में यकीन है,मैं किसी व्यक्ति या जमात का भक्त बनने में यकीन नहीं करता और न ही किसी फ़ण्डामेंटलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ना मुझे गवारा है ।

आज देश मे जातीय युध्द के जो हालात है,उसके लिए ज़िम्मेदार तमाम संघी,कुसंघी,मुसंघी,बहुसंघी लोगों को मैं हजारों हज़ार लानत भेजता हूँ । मुझे किसी से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए,कम से कम उन लोगों से तो कतई नहीं जो हद दर्जे के बदतमीज लोग है.मेरे सब समुदायों ,धर्मों और देशों में दोस्त हैं और रहेंगे,मुझसे किसी किस्म का जातीय और नस्लीय विचार तथा व्यवहार की उम्मीद मत कीजिये ।

अगर आप किसी कट्टरपंथी मूलतत्ववादी जमात से प्रेरित है और लोगों के साथ जाति के आधार पर घृणा और भेदभाव करते हैं तो आपसे मेरा कोई रिश्ता नहीं है,आप मुझे छोड़ दीजिए,एक सामान्य इंसान के रूप में जीने के लिए मुझे आपकी कोई जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को आज से यह खुली छूट दी जाती है कि वो मुझे पानी पी पी कर गालियां दें,मुझ से कोई संबंध नहीं रखें,मुझे किसी आयोजन में नहीं बुलाएं,यहां तक कि मुझे सोशल मीडिया पर भी अनफ्रेंड और ब्लॉक कर दें,क्योंकि मेरी जिंदगी में कट्टरपंथी तत्वों के लिये कोई जगह नहीं है।

– भंवर मेघवंशी
( संपादक – शून्यकाल )

1 Comment
  1. हंसराज कबीर says

    हम समतावादी हैं और भारतीय संविधान में हमारी आस्था है ,

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