आम जन का मीडिया
Their job is to remove Ambedkar Mission!

इनका काम अम्बेडकर मिशन को पलीता लगाना है !

– जितेन्द्र विसारिया 
बिना लाग लपेट के सुनिए … कुछ साल पहले इनको  ‘भोले बाबा’ के नाम से जाना जाता था, अब यह साकार विश्व हरि बन चुके हैं। इस संस्कारी नाम पर ध्यान दीजिए, ज़नाब दलित समाज में ही पैदा हुए हैं और इनका मुख्य काम प्रकारांतर से बाबा साहेब और उनके दलितोद्धार आंदोलन को पलीता लगाना है। तमाम बाबाओं की तरह इनके भी अब लाखों में अनुयायी हैं। यह सीधे-सीधे न सही, थोड़े घुमा फिराकर संघ,आर एस एस और हिंदुत्व को दलितों-पिछड़ों में जिंदा बनाये रखने का बखूबी काम कर रहे हैं ।
    वर्तमान सरकार भी पर्दे के पीछे उनकी खूब सेवा में लगी है। जहाँ जाते हैं, बड़े-बड़े पंडाल उपलब्ध कराए जाते हैं। सुविधाएँ दी जाती हैं, नाम जन सहयोग का लिया जाता है। जो सरकार अपनी बात रखने के लिए आने वाली जनता से, रामलीला मैदान और जंतर-मंतर जैसे विरोध प्रदर्शन के मंच छीन चुकी है। वह इन भोले बाबा के सत्संग के लिए, स्टेडियम और उसके आसपास की ज़मीन उपलब्ध करा रही है। नगर निगम उसे सफ़ाचट चिकना करके दे रहा है।
        यदि किसी को भरोसा न हो, तो कोई आकर भिंड जिला स्टेडियम को इस समय देख सकता है ! कॉलेजों के परिसर उसके निवास स्थान बन रहे हैं ! यह सब सरकार और प्रशासन के सहयोग के बिना संभव नहीं और यह सब इसलिए किया जा रहा है कि दलित-पिछड़े, बाबा साहेब के शिक्षा, संगठन और संघर्ष के मार्ग को त्यागकर, हिंदुत्व के बाड़े की भेड़ ही बने रहें। वे भूमि और संपत्ति के समान बंटवारें ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद के विरुद्ध चलने वाले जन आंदोलनों में कभी खड़े न हो सकें।
         …..  और सबसे बड़ा आश्चर्य यह कि इसमें पढ़ा-लिखा मध्यमवर्गीय दलित ही सबसे ज्यादा बढ़-चढ़कर है ! जिन हरामजादों ने बाबा साहेब द्वारा प्रदत्त की गईं आरक्षण इत्यादि की सुविधाओं का भरपूर उपयोग किया, अब वही धूर्त विश्वहरियों की गोद में जा बैठ रहा है ! इन नमक हरामों को पता नहीं कि यह विश्वहरि और भोले बाबा तब कहाँ थे ? जब तुम्हें स्कूलों में पढ़ने नहीं दिया जाता था ? शिक्षा और सम्पत्ति के अधिकार से वंचित  किया गया था ? तमाम तरह की वर्जनाएँ तुम्हारे ऊपर लदी हुई थीं ? तुम्हें कोई मनुष्य तक मानने को तैयार नहीं था ? तुम्हें इन जहालतों से किसने उबरने के मौके दिया ? अब तुम किसी लायक हुए, तो अब उस मसीहा से पीठ ही फेर ली .
पर याद रहे यदि इसी तरह इन ढोंगी भोले बाबाओं और विश्व हरियों के चक्कर में पड़े रहे, तो वो दिन दूर नहीं कि तुम्हें इन्हीं मक्कारों के सहारे, उसी प्राचीन मनुवादी अधोगति में न पहुँचा दिया गया, तो कहना ! वो तुम्हारी जाति का हुआ, तो क्या हुआ ?

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