ये जगत मामा है !

- गणपत मेघवाल ,नाडसर

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ये है जगत मामा , जिनका नाम शायद आपने भी सुना होगा। आज दुनिया जहाँ पल – पल पैसे के पीछे दोड रही है , वहीँ जगत मामा हर पल पैसे को पानी की तरह बहा रहे है। उन्हें पैसा बाँटने की धुन सी है। सिर पर दुधिया रंग का साफा, खाकी रंग में फटी सी धोती , खाक में नोटों से भरा थेला दबाये जगत मामा जब लाठी के सहारे दोडते से चलते है तो किसी गरीब से कम नही लगते , लेकिन दिल के वे बहुत अमीर व प्यार के सागर से भरे है। चेहरे पर पड़ी झुर्रिया व सफ़ेद बाल उनके बुढ़ापे की कहानी कहते है लेकिन मामा जिस स्कूल में दाखिल हो जाते है , उसकी मानो काया ही पलट जाती है।

85 वर्षीय जगत मामा जायल, जिला नागौर के पूर्णराम गोदारा है। जगत मामा की दिनचर्या अलसुबह शुरू होती है और देर शाम जहाँ कही आसरा मिल जाये वहीँ रुक जाती है। मामा अचानक किसी स्कूल में जा पहुचते है और बच्चों के बीच ऐसे चेहरे पहचानने की कोशिश करते है जो आगे जाकर कुछ बन सके , फिर उन्हें अपनी मर्जी से नकद इनाम देते है। पिछले 70 साल में मामा बच्चो को 100 ,500 ,1000 के कड़क नोटों के रूप में तकरीबन 4 करोड़ रुपये बाँट चुके है। कभी – कभी स्कूली खेल कूद प्रतियोगिता में हलवा पूरी भी बनावा देते है। प्रवेश फीस से लेकर किताबे , स्टेशनरी , बैग व छात्रवर्ती तक की व्यवस्था कर मामा अब तक हजारो लडको को स्कूल से जोड़ चुके है। गाँव-गाँव स्कूलों में फिरते रहने के कारण मामा ने शादी भी नही की। अपनी 300 बीघा जमीन भी मामा ने गाँव की स्कूल, ट्रस्ट व गौशाला को दान दे दी।

बच्चो में निस्वार्थ प्यार बाँटने वाला यह शख्स हर किसी छोटे-बड़े को ‘भानिया’ कहता है और लोग इन्हें बच्चे से लेकर बूढ़े तक ”जगतमामा ” ही कहते है।

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