संविधान सम्मान यात्रा का सातवाँ दिन,दिखा किसानों का सरकार के खिलाफ आक्रोश !

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बालागुढ़ा गाँव, राजस्थान :आज सुबह संविधान सम्मान यात्रा को मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथियों ने जोशीले गीतों के साथ देवगढ़, राजस्थान से रवाना किया। यात्रा के साथियों ने डूंगरपुर में वनाधिकार और पेसा कानून के अमल के लिए आन्दोलनरत आदिवासियों का समर्थन करते हुए उनकी लड़ाई में साथ खड़े रहने की बात रखी और बालागुढ़ा गाँव,मंदसौर के लिए रवाना हुए।

संविधान सम्मान यात्रा का आज सातवें दिन बालागुढ़ा गाँव में अमृतरामपाटीदार, दिलीप पाटीदार (बूढ़ागाँव)ने किया। यात्रा में आज प्रसिद्द नर्मदा बचाओ आन्दोलन और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय की मेधा पाटकर भी जुड़ी। सभा में मारे गए अभिषेक के माता-पिता, अमृतराम आये।

मंदसौर में पिछले वर्ष 6 जून 2017 को पिपलियामंडी में फसल, दूध, सब्जी, व फलों के उचित मूल्य के लिए संघर्षरत किसानों पर गोलियाँ चलाई जिसमें 6 लोगों की पुलिस में गोली मारकर हत्या और कई घायल हुए थे। बहुत सारे किसानों को जबरन FIR दर्ज कर जेल में डाल दिया गया था। और अब एक साल बाद जस्टिसजेके जैन आयोग ने सभी पुलिस जवानों को फर्जी रूप से क्लीनचीट देकर फिर से किसानों के ऊपर हो रहे अत्याचार के साथ अन्याय किया है। भीड़ को तितरबितर करने और पुलिस बल का गोलियाँ चलाना जीवन रक्षा के रूप में न्यायसंगत और नितांत आवश्यक बताना सरासर किसानों के संघर्ष और उनके वाजिब माँगों के साथ अन्याय और अनदेखी है।

आयोग खुद मानती है कि जिला प्रशासन को संवादहीनता के कारण उनकी माँगों और समस्याओं की जानकारी नहीं थी और उन्हें जानने का भी प्रयास नहीं किया।वहीँ किसानों ने आन्दोलन के शुरुआत में ही अपनी मांग जगजाहिर कर दी थी ये पूरा देश जानता है तो कैसे पुलिस प्रशासन निर्दोष साबित हो सकती है। रिपोर्ट में पुलिस के नियमों के पालन नहीं करने का भी उल्लेख है तो आखिर कैसे उनको क्लीनचीट मिल जाती है?

सभा की शुरुआत में अमृतराम जी ने घटना का पूरा विवरण दिया और पुलिस कार्यवाही के बारे में बताया। यात्रा की ओर से भूपेंद्र सिंह रावत ने बात आगे बढाते हुए कहा कि सरकार ने किसानों के साथ सिर्फ वादा खिलाफी ही नहीं की है बल्कि उन्हें धोखा दिया है और दमन का रास्ता अपनाया है।MSP बढ़ाने का ढोंग करने वाली सरकार किसानों की मेहनत का सही दाम देना ही नहीं चाहती इसलिए बार-बार गलत फार्मूला से MSP बढ़ाने का ढोंग करती है। आज भी स्वामीनाथन आयोग द्वारा प्रस्तावित MSP धरातल पर लागू होने की राह देख रहा है।

प्रफुल्ल पाटीदार ने कहा कि स्थिति इतनी ख़राब है कि उन्हें लहसुन की फसल फेंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है, लहसुन का भाव जमीन छू रहा है।MSP की बात तो सिर्फ कागजों में होती है। गौ माता के नाम पर आतंक तो खूब हो रहा है, अगर इनको गौ माता की इतनी ही फिक्र होती तो गौशाला जो अधिकतर दबंगों के कब्जे में होती है और भ्रष्टाचार का केंद्र होता है, उसके बजाये दूध का दाम बढ़ा कर किसान जो सदियों से गौ माता की सेवा करते आये हैं, उन्हें बोल सकते थे सेवा करने को।

इस किसानों की हत्यारी सरकार को बदलनी जरुरी हो गयी है।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मेधा पाटकर ने कहा कि किसानों के साथ सिर्फ छलावा हो रहा है, मध्य प्रदेश में पंचायतों और ग्राम सभाओं की संवैधानिक अधिकार छीन लिए गए हैं। मध्य प्रदेश दुग्ध व्यवसाय डेयरीकोआपरेटिव में भी समस्याओं का अम्बार लगा है।

बालागुढ़ा की सभा के बाद यात्रा रतलाम के लिए निकली और रास्ते में दो जगह झारवा और धोधार गाँव में लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और यात्रा के समर्थन में संविधान बचाने की लड़ाई और अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प लेकर आगे के लिए रवाना किया।

मधुरेश कुमार ने सरदार सरोवर बाँध के लाभों पर बात रखते हुए कहा कि जो पानी किसानों को पहुँचाने के लिए नर्मदा घाटी से लाखों लोगों का विस्थापन किया गया वो आज किसानों को ना जाकर कॉर्पोरेट को जा रहा हैं। लाखों लीटर पानी हर सेकंड उद्योगों को सस्ते दामों पर गुजरात दे रही है। क्या इसलिए लोगों को विस्थापित किया गया था? आज ना सिर्फ मध्य प्रदेश, बल्कि गुजरात भी बेहाल है सरदार सरोवर बाँध के छलावे से।

गुजरात से कृष्णकांत ने बुलेट ट्रेन के बारे में बताते हुए इसे देश के लिए मुंगेरीलाल के सपनों जैसा बताया और कहा कि यह लोगों की सिर्फ जमीन नहीं लूटेगा बल्कि उनके मेहनत के कमाए पैसे और सरकारी खजाने, जो कल्याणकारी योजनाओं में लग सकते हैं, को भी खाली कर देगा और देश को क़र्ज़ के अन्धकार में धकेल देगा।

उत्तराखंड में बाँधों के खिलाफ संघर्षरत विमल भाई ने बताया, कि सरकार सिर्फ योजनाओं की घोषणा और उसके मद में आये पैसों का बंदरबांट कर रही है।नमामिगंगे का नारा देकर सरकार में आई सरकार के पास कोई जवाब नहीं है तो सांप्रदायिक दंगे और हिन्दू खतरे में हैं जैसी बेतुकी बाते फैला कर देश का ध्यान भटका रही है। आज गंगा का एक बूँद भी पहले से साफ़ नहीं हुए है, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी सरकार को कोई शर्म नहीं है।

ग्रीन नोबेल, 2017 से सम्मानित प्रफुल्लासामंतरा ने बताया कि 73वां और 74वां संसोधनअभी तक क्रियान्वित नहीं हो पाया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, जो पर्यावरणीय मुद्दों पर एक आखिरी उम्मीद होती थी, उसपर भी हमले हो रहे हैं। सरकारी रूप से उसे लोगों से दूर करने की कोशिश की जा रही है ऐसा प्रस्तावित संसोधन में साफ़ दिखाई देता है। सुप्रीम कोर्ट भी देश में न्याय व्यवस्था की रक्षा करने में आज असमर्थ दिखाई देती है।

तेलंगाना की मीरा संघमित्रा ने इसी सन्दर्भ में बताया कि आज तो एकजुट होकर आन्दोलन करने के खिलाफ भी सरकारी दमन आतंकी रूप ले चुका है। पूरे देश में आन्दोलन को देश विरोधी घोषित कर दमन करने की राजनीति, लोगों के हकों में काम करने वालों को जेल में बंद करने के सरकारी रूख से ना सिर्फ हमारी अधिकार ख़त्म हो रहे है बल्कि संविधान की स्वतंत्रता भी खतरे में है।

मेधा पाटकर ने बात रखते हुए कहा कि आज जो भी लोग संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें ना सिर्फ कानूनी उल्लंघनों का सामना करना पड़ रहा है बल्कि संवैधानिक अधिकारों का हनन भी देख रहे हैं। किसानों के इतने संघर्ष के बाद भी किसानों की कर्ज मुक्ति की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। कॉर्पोरेट के वहीँ लाखों करोड़ों के कर्ज बैंकों के खातों से हटाये जा रहे हैं। लगातार हर रोज आत्महत्याएं हो रही है और कोई कुछ नहीं कर रहा है।

आर्थिक विकास की दिशा और दशा दोनों गलत है।MSP बढ़ाने की घोषणा भी किसानों की पूरी लागत का डेढ़ गुना दाम देती कहीं दिख नहीं रही है। दूध का दाम नहीं मिलता, जानवरों के चारागाह कॉर्पोरेट के हवाले किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण में भी 2013 के कानून की अनदेखी जारी है। किसानी घाटे का सौदा बनाकर किसानों को जमीन बेचने के लिए बाध्य किया जा रहा है। आज देश में औद्योगिक कॉरिडोर में देश की लगभग आधी जमीन प्रभावित होने वाली है।

ग्राम पंचायतों के अधिकार, नियोजन, विकास के काम और यहाँ तक कि मनरेगा के काम के ऊपर भी लोगों का कोई नियंत्रण नहीं है। ये कैसा ग्राम स्वराज्य है?

30 नवम्बर को हम सभी दिल्ली में किसानों के समर्थन में पहुँच रहे हैं आप सभी से भी अपील है। भगवती लाल पाटीदार पर धारा 307 के तहत केस दर्ज है अभी तक जमानत नहीं मिली है, एक वर्ष से ज्यादा हो गया है। लगभग 57 लोगों पर मुक़दमे दर्ज है।

यहाँ से यात्रा मध्य प्रदेश में आगे बढ़ते हुए बदनावर,महू के लिए कल रवाना होगी।यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों से मेधा पाटकर (नर्मदा बचाओ आन्दोलन, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय),ग्रीन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रफुल्लासामंतरा (लोक शक्ति अभियान, ओड़िशा), मीरा संघमित्रा (एनएपीएम, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश), डॉ. सुनीलम (किसान संघर्ष समिति, मध्य प्रदेश), सिस्टरसीलिया, सिस्टरजसिन (एनएपीएम, कर्नाटका), सुरेश राठौर, महेंद्र,योगिराज (मनरेगा मज़दूर यूनियन, पूर्वांचलकिसान यूनियन, उत्तर प्रदेश), जगन्नाथ, मोहनलाल (संगतिन किसान मज़दूर यूनियन, उत्तर प्रदेश), जितेन्द्रपासवान, फूल कुमारी (जन जागरण शक्ति संगठन, बिहार), नवीन मिश्रा, राजेश (सेंचुरी मिल संघर्ष, सत्राती, खरगोन, मध्य प्रदेश), कमला यादव, रोहित,सौरव (नर्मदा बचाओ आन्दोलन), कृष्णकांत (पर्यावरण सुरक्षा समिति, गुजरात), भूपेंद्र सिंह रावत (जन संघर्ष वाहिनी, दिल्ली), सुहास कोल्हेकर (एनएपीएम, महाराष्ट्र), सुनीता रानी, विमला(राष्ट्रीय घरेलू कामगार यूनियन, दिल्ली), विमल भाई (माटूजनसंगठन, उत्तराखंड), राजू विश्वकर्मा (एनएपीएम, झारखण्ड), मधुरेश कुमार (एनएपीएम दिल्ली), ऋषिपालमलिक (भारतीय किसान मज़दूर संयुक्त यूनियन), संजय नाजरे, अभिषेक (कोल्हापुर, महाराष्ट्र), आर्यमान जैन,आर्यन (दिल्ली), अक्षित (गुहार), देबांजिनी, रिम्पी,पल्लब (डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी, असम), हिमशी सिंह, उमा (एनएपीएम, दिल्ली) जुडें।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन, मध्य प्रदेश से मुकेश भगोरिया, भागीराम भाई, भगवती बहन, के साथ 10 लोगों की टीम आज यात्रा के साथ पहले से जुड़े साथियों के साथ जुड़ी और पूरे मध्य प्रदेश में संविधान सम्मान यात्रा के साथ अलग-अलग जगह नर्मदा की सच्चाई रखेंगी।

ज्यादा जानकारी के लिए सम्पर्क करें 9971058735, 9867348307.

यात्रा की पूरी जानकारी वेबसाइट www.samvidhanyatra.wordpress.com और National Alliance of People’s Movements (@NAPMIndia) फेसबुक पेज पर उपलब्ध है.

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