दशकों की बादशाहत का कारुणिक अंत

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दशकों की बादशाहत का कारुणिक अंत के साथ खत्म हुआ सफर.

विश्वविजेता, अजेय और महानतम धावक उसेन बोल्ट ने दशकों तक ट्रैक पर राज किया है. वह जब भी ट्रैक पर आया नए रिकार्ड गढ़ गया. हर दौड़ एक इतिहास होती गयी. उसके कारनामे बुलंदियों पर थे. उसकी दौड़ें हमे ट्रैक से जोड़ती रही और ट्रेक पर उसकी मौजूदगी मात्र ही विजेता होने का आभास कराने लगी. उसकी फर्राटेदार दौड़े हमारी धड़कनों से संवाद करती और उसके साथ ही कदमताल करने लगती.

इस करिश्माई धावक की अंतिम दौड़ को देखने के लिए हर कोई बेचैन, बेसब्र और उत्तेजित हो रहा था. दर्शकों को केवल लंदन स्टेडियम तक ही सीमित नही कर सकते है बल्कि अब हर देश मे उनके चाहने वाले थे. बोल्ट विश्व की धरोहर बन चुके थे. यह उनके विश्व पटल पर अपनी धमक का ही परिणाम था कि हर कोई अपने देश को जीतते देखना चाहता था लेकिन उनके हाथों में तख्तियां बोल्ट की थी. उनके अद्भुत करियर के गरिमामयी अंत को देखना चाहता था. उनको आदर्श विदाई देना चाहता था.

शुरुआत भी उसी अंदाज से थी महान धावक एक बार फिर उड़ने को तैयार था, चीते सी फुर्ती से फर्राटा भरा, हर कोई उस उड़ान में शामिल हो चुका था. तभी कुछ ऐसा हुआ जो विस्मयकारी, विचित्र, भयानक और अकल्पनीय था. अजेय योद्धा लड़खड़ाया और बिलबिलाकर बिखर गया. जो कोहनी जब भी झुकी उसका इशारा हमेशा विजित उंगलियों की तरफ ही होती थी आज वो बोल्ट को सहारा दे रही थी. आंखों में लक्ष्य था और मन मे बेबसी. बोल्ट की हताशा ने दर्शकों को उड़ान से जमीन में दे पटका, सब ने नम आंखों से बोल्ट को बिदाई दी. नियति को शायद यही मंजूर था.

सफर का अंत भले ही कारुणिक हो गया हो पर आप हमारे प्रेरणास्रोत हमेशा रहोगे. लाखों दिलों की धड़कनों को अपनी गति से नियंत्रित करने वाले महान धावक आप अग्रणी थे और अग्रणी ही रहोगे. आज आपकी गाथा इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गयी. विस्मय, आश्चर्य और रोमांच से भर देने वाले महानतम धावक की ट्रैक पर कमी सदा महसूस होती रहेगी.

– भीमव्रत प्रताप सिंह

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