आम जन का मीडिया
The end of an era in the literary world by the death of Naval

नवल के निधन से साहित्य जगत में एक युग का अंत

- सुरेश खटनावलिया

जोधपुर। दलित साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मशहूर साहित्यकार व दलित चिंतक चंदनमल नवल का गुरुवार सुबह करीब 10.30 बजे निधन हो गया। नवल लंग्स में संक्रमण व निमोनिया से पीड़ित थे। इसके चलते उन्हें करीब 15 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तब से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। वे 72 वर्ष के थे। शाम को उनकी शव यात्रा निवास स्थान नागोरी गेट जटिया कॉलोनी जोधपुर से निकली। कागा श्मशान घाट में पुत्रों ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनके पीछे पत्नी, दो पुत्र व दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार है।

चंदनमल नवल का जन्म 28 अप्रैल 1946 को राजस्थान के जोधपुर जिले की लूनी तहसील के सतलाना ग्राम के एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने गांव व जोधपुर में शिक्षा प्राप्त की। बचपन तथा युवावस्था में दलित होने के कारण उनको अत्यधिक सामाजिक और आर्थिक कष्ट झेलने पड़े,जिससे उनके साहित्य में दलित चिंतन मुखर हुआ और उन्हें दलितों के उत्थान के लिए काम करने को प्रेरित किया।

नवल का मानना था कि दलितों के द्वारा लिखा जाने वाला साहित्य ही केवल दलित साहित्य है। इसके पीछे उनका तर्क था कि दलित की पीड़ा केवल दलित ही समझ सकता है। उनकी शोध पुस्तक ‘ मारवाड़ का शहीद राजाराम’ साहित्य जगत में बहुत चर्चित हुई थी तथा इसे दलित साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसमें उन्होंने मेहरानगढ़ की नींव में चुनवाये गई राजाराम मेघवाल उर्फ राजिया के बलिदान के पीछे की सच्चाई को परत दर परत उजागर कर जोधपुर राजघराने को स्पष्टीकरण देने को मजबूर कर दिया था।

उन्होंने हर स्तर पर दलितों पर हो रहे भेदभाव व अत्याचार का व्यापक वर्णन कर दलित एवं वंचित वर्ग की समस्याओं पर गंभीर बहस खड़ी की। उन्होंने ‘रैगर जाति, इतिहास व संस्कृति’ पुस्तक से रैगर जाति की उत्पत्ति व संस्कृति का शानदार शोधपरख विश्लेषण किया। इनके अतिरिक्त उन्होंने ‘गरीबों के मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर’, ‘अनंत विभूति गोपालराम महाराज’ सहित कई पुस्तको का सृजन किया।

उन्हें साहित्य तथा दलित समाज के लिए किये गये कार्यों के लिए डॉ.अम्बेडकर राष्ट्रीय सम्मान, पुलिस विषयों पर लेखन के लिए गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, डॉ. अम्बेडकर विशिष्ट सेवा पुरस्कार सहित कई सम्मान से नवाजा गया। वे बतौर राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृति के बाद भी वे लेखन के माध्यम से दलितों , वंचितों व रैगरों में चेतना का संचार करते रहे। ऐसे महान व्यक्त्वि का इस तरह चले जाना रैगर समाज ही नहीं अपितु दलित व वंचित तबके के लिए बहुत बड़ा आघात है। उन्होंने अपना एक रहनुमा खो दिया है।इधर, नवल के निधन से साहित्य जगत में भी शोक की लहर है। साहित्यकारों ने इसे साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति व एक युग का अंत बताया है।

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