आम जन का मीडिया
The country is suffering a mistake of J P

जे पी की एक गलती की सज़ा आज देश भुगत रहा है !

लोक नायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर मुझे उनसे जुड़ा एक संस्मरण याद आता है । प्रभावती जी के निधन के बाद उनका जी इस संसार से उचट गया  और उन्होंने मेरे फादर को कहा कि  सुंदर लाल , मेरे लिए एक कुटिया यहीं कहीं हिमालय में बना दे । शेष जीवन यहीं शांति से काटूंगा ।
यह शायद 1972 – 73 की बात होगी । इस निमित्त उन्होंने मेरे पिता को कुछ पैसे भी शायद कहीं से लाकर दिए । कुछ धन इधर उधर से जुगाड़ कर उनके लिए उत्तरकाशी में गंगा तीरे  एक छोटा भवन बना दिया गया । जेपी  उसमे रहने भी लगे  पर उनका चित्त अशांत रहता था । कहते हैं कि मनुष्य इस जन्म में अपनी मूल प्रवृत्ति नहीं छोड़ता , इसी लिए वैराग्य होने पर भी कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए उकसाया । वह जानते थे कि इसकी वितृष्णा क्षणिक है । यह जोगी बन कर जंगल को भी जाएगा , तो इसकी शिकारी वृत्ति पुनः जागेगी  और यह निरीह खग मृग को मारेगा , अतः उचित यही है कि इससे कौरव मरवाये जाएं ।
 जेपी भी चूंकि मूलतः राजनेता थे ,तो उन्हें सन्यास क्यो कर सुहाता ? अस्तु , कुछ ही दिन उपरांत जेपी को तार मिला कि बिहार के भूदान कार्यकर्ताओं को नक्सलियों ने गर्दन काटने की धमकी दी है ,जेपी व्याकुल हो गए और फिर आने का वादा कर बिहार चले गए । वह फिर कभी न लौटे,अपितु तानाशाह हो चुकी इंदिरा गांधी के विरुद्ध जेहाद छेड़ दिया ।
उस पुनीत कार्य मे उन्हें यश मिला ,लेकिन इंदिरा विरोध की आतुरता में उन्होंने त्याज्य संघियों से भी हाथ मिला लिया । इससे संघियों को लोक मान्यता मिली और हिंसा तथा घृणा का जो व्यापार वे अब तक चोरी छुपे करते थे , अब खुलेआम  करने लगे । यह महानायक जय प्रकाश की एक हिमालय जैसी  बड़ी  भूल  थी , जिसकी कीमत राष्ट्र आज चुका रहा है ।
– राजीव नयन बहुगुणा
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार है )

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