आरक्षण व प्रमोशन की अंधी दौड़ दलितों को बर्बाद कर देगी !

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(डॉ. एम.एल.परिहार)


आरक्षण व प्रमोशन की अंधी दौड़ हमें बर्बाद कर देगी

ज्यादा नहीं सिर्फ पांच साल बाद ही देख लेना, सरकारी दफ्तरों में दलित चपरासी से लेकर डायरेक्टर तक के नामों की तख्तियां गायब हो जाएंगी। क्योंकि बाबासाहेब की बदौलत सुख भोग रहे लगभग सारे सरकारी मुलाजिम रिटायर हो जाएंगे। गिने चुने बचेंगे।

जातिवादी व शोषणकारी व्यवस्था के पोषक लोग एक साजिश के तहत पब्लिक सेक्टर का बहुत तेजी से प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं लेकिन हम लगभग मृत पड़े आरक्षण व प्रमोशन को सिर्फ बचाने में ही सारी ऊर्जा लगा रहे हैं। ऐसा कर भावी पीढियों का हम बड़ा नुकसान कर रहे हैं।
आखिर दस साल बाद हम कौनसे रिजर्वेशन या प्रमोशन के बांस की बांसुरी को बजा पाएंगे। सवर्ण हम पर दोहरा वार कर रहा हैं, एक तरफ हमारी सुविधाओं को खत्म कर रहा है तो दूसरी ओर हमारी कोलोनी में ही किराना की शॉप खोलकर करोडपति हो रहा हैं और हम कभी न मिलने वाली छोटी सी सरकारी नौकरी, बीपीएल, राशनकार्ड, सब्सिडी और सस्ती चीनी चावल के पीछे बर्बाद हो रहे हैं।
एक भोली टिटहरी भी तेज आंधी तुफान की भनक लगते ही घौंसले से अपने नन्हे बच्चों को टीले की ऊंचाई पर सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर लेती है।

लेकिन हमें ऐसा क्यों नहीं सुझ रहा हैं ? बहुजनों के लिए आये भारी संकट के इस दौर में हम अपनी आर्थिक समृद्धि के लिए प्राइवेट सेक्टर के विशाल मैदान में क्यों नहीं कूद रहे हैं? आखिर बर्बादी की कौनसी घड़ी का इंतजार कर रहे हैं?

जय भीम..जय भारत..जय संविधान

(साभार-डॉ.एम.एल.परिहार)

 

(फोटो क्रेडिट-dailyhunt)

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