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अम्बेडकर छात्रावास भवन के मालिक ने शराब पीकर बच्चों के साथ की मारपीट !

– किशन मेघवाल ,जोधपुर 
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में व्याप्त अंधेरगर्दी का खामियाजा निर्दोष विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, विभाग की लापरवाही से जोधपुर का एक अम्बेडकर छात्रावास  (जिसका नाम विभाग के रिकोर्ड में अम्बेडकर छात्रावास नागौरी गेट हैं) फुटबॉल बन गया है, यह करीब बारह वर्षों तक इसी विभाग के कार्यालय के आधे हिस्से में चलता रहा परंतु दो साल पहले इसे भगत की कोठी क्षेत्र में चल रहे नवजीवन छात्रावास के साथ शिफ्ट कर दिया गया,दो सत्र वहां निकाले। इस साल इस छात्रावास के बच्चों को उठाकर बाॅबे मोटर्स चौराहे के पास किराये के मकान में पटक दिया ,विभाग ने जो भवन किराये पर लिया उसमें पहले से ही सतगुरु नाम से एक नीजि छात्रावास संचालित हो रहा है, इसी भवन के बहुत छोटे छोटे ग्यारह कमरे विभाग ने लेकर नौ कमरों में छात्रों एवं दो कमरों में कार्यालय और रसोई को शिफ्ट कर दिया,बच्चों की साइकिलें बाहर रोड़ पर ही खड़ी रहती है । पच्चास सीट वाले छात्रावास में 35 छात्रों को प्रवेश दिया गया है ।
दलित शोषण मुक्ति मंच ,राजस्थान  के प्रदेश संयोजक किशन मेघवाल ने विभाग की घोर लापरवाही की कड़ी निंदा हुए छात्रों के भविष्य को मद्देनजर रखते हुए विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग की हैं। 16 नवम्बर की रात को करीब 12 बजे इस भवन के मालिक द्वारा शराब पीकर बच्चों के साथ मारपीट करने की घटना को शर्मनाक बताया, उन्होंने रात को ही पुलिस प्रशासन और विभाग के अधिकारियों से बात की,पुलिस के पहुँचने पर ही बच्चे डर से थोड़ा उभर पाये,आज दोपहर बाद छात्रों ने छात्रावास से विभाग कार्यालय तक जुलुस निकाला एवं दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले आक्रोशित नारेबाजी करते हुए विभाग के कार्यालय का घेराव कर उपनिदेशक के कक्ष में ही जम गये.
उपनिदेशक अनिल व्यास के छुट्टी पर होने की वजह से छात्रों में गुस्सा बढ गया, इस दौरान विभाग में मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने उन्हें और जयपुर कार्यालय को सुचित किया, इस पर जयपुर कार्यालय में संयुक्त निदेशक अशोक जागीड़ और डीएसएमएम के प्रदेश संयोजक की फोन पर बातचीत हुई, उन्होंने इस बात का भरोसा दिलाया कि किसी भी कीमत पर आगामी 15 दिनों में छात्रों की सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाऐगा एवं इस छात्रावास को उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाऐगा। इस आश्वासन के बाद छात्रों ने आंदोलन को पंद्रह दिनों के लिए स्थगित कर दिया है एवं चेतावनी दी हैं कि यदि वादा-खिलाफी की तो उस छात्रावास को छोड़ कर बोरिया-बिस्तर बांध कर विभाग के कार्यालय में रहने के लिए आ जाएंगे ।
…..अंततः छात्र शक्ति के संघर्ष की जीत हुई और छात्रावास भवन सरकारी भवन में स्थानांतरित हो गया !

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