आम जन का मीडिया
The ADHAR is the biggest scam of this country!

आधार इस देश का सबसे बड़ा स्कैम है !

आधार इस देश का सबसे बड़ा घोटाला है, लेकिन परसेप्शन बिल्कुल उल्टा बना है. कुछ न हो रहा हो तो भी दो-चार चीज़ों को हर हफ़्ते आधार से जोड़ते रहने की मुनादी करके ये एहसास दिया गया है कि काम हो रहा है. इसके बाद विकास के इंतज़ार में थक चुके अच्छे दिनों के आग्रहियों ने आधार को ही विकास मान लिया.

इस बीच, ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खेहरा ने 500 रुपए में आधार डेटा लीक का स्कूप दिया. लीक पर जाएं तो इसमें नयापन नहीं है, नयापन ये है कि पहले संगठित रैकेट का इसमें पता चला. आधार की पूरी बुनियाद ही ‘प्राइवेसी’ और ‘सिक्योरिटी’ पर टिकी है.

जब सिक्योरिटी पर चोट पहुंची तो इसे विकास पर चोट की माफिक रिसीव किया गया. विकास पर चोट किसे बर्दाश्त है? लोग जब अपनी ज़मीन नहीं देते तो सरकार उनसे ज़मीन छीनकर ज़बर्दस्ती विकास थमाती रही है. आधार में तो इतना भौतिक मामला भी नहीं है. सब 12 डिजिट के रहस्यमयी नंबर का खेल है.

इस रहस्य से पर्दा उठाना ठीक नही है. पर्दे के पार सब अपने तरीक़े से दुनिया देख रहे हैं. सरकार को उधर उनमत्त विकास दिख रहा है, आलोचकों को अपनी लुटी-पिटी दुनिया. सरकार और UIDAI जैसे सत्ता प्रतिष्ठानों के लिए मनचाही तस्वीर से अलग कुछ भी देखना/दिखाना उनके समूचे ड्रीम प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले ही चरमरा देना है.

एक नैरेटिव उछलता है कि आधार की आलोचना राष्ट्र की आलोचना है. डिजिटल इंडिया में 12 डिजिट की चोरी की ख़बर कैसे छप सकती है? पत्रकारिता करनी है तो स्कैंडेनेविया चले जाइए. न्यू इंडिया में पॉजिटिव सोच रखिए, पॉजिटिव स्टोरी कीजिए.

– दिलीप खान
( फेसबुक टाइम लाइन से साभार )

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