टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ छात्र ने डिग्री लेने से किया इंकार

- नीरज बुनकर

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टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS) में पिछले 76 दिनो से चल रहे छात्र आंदोलन में आज एक नया पड़ाव देखने को मिला है । जैसा की सभी को विधित है कि ये आंदोलन वंचित समुदाय के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद कर देने के विरुद्ध किया जा रहा है. जहाँ प्रशासन कुछ माँगो पर सहमत हुआ है जिसमें वर्तमान में अध्ययनरत्त अजा/जजा के छात्रों की फ़ीस माफ़ कि वहीं ओ॰बी॰सी॰ व आने वाले सभी छात्रों को पूरी फ़ीस देनी होगी, इसी माँग को छात्र उठा रहे है और लगातार पिछले 76 दिनो से प्रशासन पर अपनी माँग मनवाने के लिये दबाव बना रहे है .

7 मई 2018 को TISS, Mumbai में आयोजित दीक्षांत समारोह में आंदोलन के संदर्भ में एक ऐतिहासिक घटना हुयी …समारोह में मंच पर डिग्री लेने पहुँचे अजीत शेखर(छात्र,दलित और आदिवासी अध्ययन एवं कृति विभाग,मुंबई) ने डिग्री लेने से इंकार किया तो हॉल में बैठे हुए सभी छात्र व अतिथि हतप्रभ रह गये । शेखर ने ये कहते हुए डिग्री लेने से मना किया कि – ‘’जब तक अजा/जजा, ओबीसी व तमाम वंचित समुदाय जिनके समर्थन में TISS में जो आंदोलन चल रहा है,उसकी माँगे पूरी नहीं हो जाती है ,तब तक इस काग़ज़ी डिग्री का कोई ओचित्य नहीं है ‘’. अजीत शेखर का आंदोलन कर रहे छात्रों ने जय भीम के नारों के साथ स्वागत किया और उनके इस क़दम को साहसिक बताया ।

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