परिवर्तन की पहल खुद से करें

- डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल 'मेघ'

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मृत्यु भोज करना एक पाप है और उसके निमित्त किसी भी रूप से मिठाई बनती है और खाते हैं यह घृणित पाप है। निर्णय स्वयं को लेना है। मैं हमेशा कहता हूँ कि हमारा शिक्षित वर्ग विशेष कर अध्यापक वर्ग अगर सोच ले तो सामाजिक कुरीतियों को आसानी से दूर फैंका जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक वर्ग का विशेष प्रभाव होता है। तकलीफ जब होती है जब शिक्षक बंधु ही बढ-चढ कर विभिन्न गली निकाल कर स्वयं इन कुरीतियों में भागीदार बनते हैं, मृत्यु भोज की मिठाई चटखारे लेकर खाते हैं। सामूहिक निर्णय से पहले स्वयं पहल करें मिशन सफल होगा। ऐसे अवसर पर कोई मिठाई बनाता है तो आप नहीं खाएं। इतना तो अपन कर सकते हैं। मैं ऐसा ही करता हूँ।

निम्न कार्य करना मेरी प्रवृति में है –
1 मृत्यु भोज या इसके निमित्त प्रसाद के रूप में मिठाई मैं कहीं नहीं खाता। अजमेर से बाहर होने की स्थिति भोजन के लिए और जगह नहीं होने पर मैं केवल पूडी सब्जी के अलावा कुछ नहीं लेता। नमकीन भी नहीं।

2- किसी सगे संबंधी का निधन होने पर मैं कपड़ा नहीं ले जाता।

2 या 5 नारियल लेकर जाता हूँ। कौन क्या कहेगा मेरे फ़र्क नहीं पड़ता। अब तो बहुत से लोग ऐसा करने लगे हैं।

3- मैने मेरे घर के किसी भी समारोह में बीड़ी सिगरेट गुटखा की प्लेट नहीं रखी।

4- मैने मेरे माता-पिता के निधन पर कोई किसी भी प्रकार का मीठा/मिठाई नहीं बनाया।

5- मैने मेरी पुत्री के विवाह के कार्ड पर किसी भी तरह का मनुवादी चिह्न या फोटो नहीं छपवाई।

6- मैं अंबेडकरवादी नहीं हूँ लेकिन मैं अंबेडकर विचारधारा की पालना करने का भरसक प्रयास करता हूँ।

7- मैं वही कहने और लिखने का प्रयास करता हूँ जो मैं स्वयं करता हूँ।

8- सकारात्मक और वैज्ञानिक पहल मैं स्वयं करता हूँ ,किसी सामूहिक निर्णय की कभी भी प्रतीक्षा नहीं करता।

9- मैं अपने सामाजिक समाचार पत्रों के प्रकाशन का पक्षधर हूँ।

10- मैं मेरे किसी अपने समाज के परिचित के शुभ अवसर पर गिफ्ट के रूप में सामाजिक समाचार पत्र “हकदार” की एक वर्ष की सदस्यता का पत्र उपहार में देता हूँ।

11- मैं समय का पाबंद व्यक्ति हूँ। मैंने मेरी पुत्री के विवाह के अवसर पर जिस कार्य के लिए जो समय लिखा था ,सभी कार्य उसी समय पर किए। यह बात मैंने कार्ड में लिख दी थी कि ‘विलंब से आने पर आपको असुविधा हो सकती है।’ वैसे मेरे परिचित मुझे जानते है कि ‘डाॅ सा’ब के यहाँ काम समय पर ही होगा। अपरिहार्य परिस्थितियों की बात अलग है। कुछ ढीढ व्यक्ति ऐसे भी थे जो आदत के अनुसार समय से एक घंटा लेट आये तो वे बेचारे कार्य समापन में ही रह सके।

12- मैं राजस्थान सरकार द्वारा जारी अनुसूचित जाति, जनजाति की सूची में सम्मिलित जाति के किसी भी वर्ग के व्यक्ति से जातिगत भेदभाव, छुआ-छूत नहीं करता हूँ क्योंकि मैं अंबेडकर विचारधारा का पढ़ा लिखा व्यक्ति हूँ।

कोशिश और पहल स्वयं से, स्वयं के घर से करें। पहले लोग आपको बुरा भला बोलेंगे फिर चुप हो जायेंगे। मृत्यु भोज करने के बहाने मत ढूंढो। निर्णय लेना है ले लो।

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