लो बाबा साहेब अंबेडकर का नाम ,जिससे नेतागिरी चमकाने में आसान हो जाये काम !

- बी एल बौद्ध

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देश में इस वक्त अपनी नेतागिरी चमकाने का एक फैशन सा बना हुआ है जिधर देखो उधर ही नेता बनने का भूत सवार हो रखा है, वैसे नेता बनना कोई बुरी बात नहीं है बल्कि हमारे समाज को आज बहुत सारे नेताओं की जरूरत है लेकिन नेता हवाई नहीं बल्कि धरातल पर काम करने वाला होना चाहिए.आज हवाई नेताओं की बाढ़ सी आ रखी है और इसके लिए बाबा साहेब अंबेडकर के नाम को जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है,क्योंकि बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर लोग आसानी से एकत्रित हो जाते हैं और लोग अपने खून पसीने की कमाई से सहयोग राशि भी आसानी से दे देते हैं ।
फिर होता यह है कि कल तक जिसका नाम कोई नहीं जानता था उसका नाम अखबारों में छपने लग जाता है, कल तक जिसको कोई नहीं पूछता था उससे मनुवादी पार्टियों के दलाल मोल भाव करना शुरु कर देते हैं और जो ज्यादा भीड़ दिखाएगा वह उतना ही ज्यादा मोल पायेगा, जो जितना अधिक समाज को बेवकूफ बनाएगा वह पहले टिकट का दावेदार बन जायेगा। जबकि हकीकत यह है कि टिकट मिल जाने मात्र से कोई भी व्यक्ति नेता नहीं बनता है वास्तविक नेता आंदोलनों से निकलकर सामने आते हैं।

आज ऐसे कई मुद्दे हैं जिनके लिए आंदोलन के द्वारा संघर्ष करना जरूरी है लेकिन कहीं भी कोई आन्दोलन नजर नहीं आ रहा है बल्कि बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर संगठन बनाकर हवाई नेता बन रहे हैं। लोगों की भावना बाबा साहेब अंबेडकर से जुड़ी हुई रहती हैं और इसी का फायदा उठाकर चतुर और स्वार्थी लोग अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं और समाज ठगा सा महसूस करके मायूस होकर बैठ जाता है। इस प्रकार के स्वार्थी लोगों को न तो आम आदमी पार्टी से व न कोंग्रेस से बल्कि बी जे पी में शामिल होने में भी कोई परहेज नहीं होता है। आज देश में हजारों संगठन बन चुके हैं और दिन प्रतिदिन बनते ही जा रहे हैं लेकिन कुछ संगठनों को छोड़कर अधिकतर संगठनों के लोग अपनी नेतागिरी चमकाने का ही काम करते हैं।

बाबा साहेब अंबेडकर के मिशन को यदि हम लोग सही में आगे बढ़ाना चाहते हैं तो समाज से लेने की बजाय देने की नीयत रखनी होगी और जब बात देने की आती है तो सबसे पहले शिक्षा की ओर ध्यान देना होगा क्योंकि बाबा साहेब अंबेडकर के संदेशों में पहला और सबसे महत्वपूर्ण सन्देश यही था कि समाज को शिक्षित करो, क्योंकि शिक्षा के बिना समाज की उन्नति संभव नहीं है। मनुवादियों की सरकारें बहुजन समाज को किसी भी सूरत में शिक्षित होते नहीं देखना चाहती हैं, जैसे 35 वर्ष पहले तक सभी जगह सरकारी स्कूलों में ही सभी लोग पढ़ते थे व सरकारी स्कूलों में पढ़कर ही डॉक्टर, इंजीनियर और कलेक्टर तक बनते थे लेकिन ज्यों ही सरकारी स्कूलों में बहुजन समाज के लड़के और लड़कियां ज्यादा पढ़ने लगे त्यों ही शिक्षा का निजीकरण शुरू हो गया और अब तो पूरे देश की सभी स्कूलों को पी पी पी मोड पर देने की तैयारी की जा रही है।

इसलिये हम लोगों को शिक्षा का जोरदार माहोल बनाने की रणनीति तैयार करने की जरूरत है और उस जरूरत को ध्यान में रखकर हम समाज को शिक्षित करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं, जिसके अनुसार सभी संगठनों के भीम सैनिक कमसे कम एक पिरीयड समाज के बच्चों को पढ़ाने का काम करेंगे। एक पिरीयड आप अपनी सुविधानुसार दे सकते हैं जैसे एक दिन में एक पिरीयड या फिर एक सप्ताह में एक पिरीयड अथवा एक पखवाड़े में एक पिरीयड या फिर एक महीने में एक पिरीयड और महीने में भी एक पिरीयड नहीं दे सकते हैं तो 100 रुपये हर महीने शिक्षा सहयोग दे सकते हैं लेकिन यदि हम लोग एक महीने में एक पिरीयड भी पढ़ाने को तैयार नहीं है अथवा न एक महीने में 100 रुपये का शिक्षा सहयोग करना चाहते हैं तो फिर हमारे अम्बेडकरवादी बनने से समाज को क्या लाभ मिलेगा।

हम सभी लोग यदि एक पिरीयड समाज के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देंगे तो जबरदस्त शिक्षा की क्रांति शुरू होगी और समाज के लोगों को महसूस होगा कि वास्तव में यह लोग अम्बेडकरवादी हैं और जब एक गरीब किसान मजदूर के बच्चे की हम शिक्षा में मदद करेंगे तो वह हमारी बात भी सुनेगा और बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा भी समझेगा। इस शिक्षा क्रांति में शामिल होने से सभी सामाजिक संगठनों में सामंजस्य स्थापित होगा जिससे मिशन का काम बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा। बाबा साहेब अंबेडकर ने पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी नामक एक संस्था की स्थापना की थी जो कि स्कूल, कॉलेज खोलती थी।हम लोग यदि स्कूल कॉलेज खोल नहीं सकते हैं तो कमसे कम एक पिरीयड पढ़ा तो सकते हैं।

हम लोग यदि रोजाना सुबह 4 बजे उठ कर शाखा नहीं लगा सकते हैं तो कमसे कम 7 दिन में एक पिरीयड पढ़ा तो सकते हैं।हम लोग यदि एक मंच पर एकत्रित नहीं हो सकते हैं तो कमसे कम अपने अपने संगठनों में रहकर एक पिरीयड पढ़ा तो सकते हैं।हम लोग यदि एक महीने में एक पिरीयड भी बच्चों को पढ़ा नहीं सकते हैं तो महीने में 100 रुपये शिक्षा सहयोग तो दे सकते हैं। हम लोग यदि न एक पिरीयड पढ़ा सकते हैं और न 100 रुपये शिक्षा सहयोग के दे सकते हैं अथवा शिक्षा के क्षेत्र में कुछ भी नहीं कर सकते हैं तो फिर बाबा साहेब अंबेडकर के तीन सन्देश समाज को शिक्षित करो, संगठित करो, संघर्ष करो की बात अपनी जुबान से बोलना बन्द तो कर ही सकते हैं।

अब समय आ गया है कि धरातल पर समाज के लिए कुछ अच्छा करना शुरू करो या फिर बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर समाज को बेवकूफ बनाना बन्द करो । लेकिन यदि बाबा साहेब अंबेडकर की बात करते हो तो *आओ मिलकर शिक्षा का अभियान चलाएं।एक पिरीयड समाज के बच्चों को निःशुल्क पढ़ायें।सर्व प्रथम मैं स्वयं संकल्प लेता हूँ कि 15 अगस्त 2018 से समाज के बच्चों को हर महीने 20 पिरीयड निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाऊंगा।

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